क्या भारतीय परिवार बन रहे हैं निवेशक? बैंकों में जमा राशि में भारी बढ़ोतरी: एसबीआई रिपोर्ट

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क्या भारतीय परिवार बन रहे हैं निवेशक? बैंकों में जमा राशि में भारी बढ़ोतरी: एसबीआई रिपोर्ट

सारांश

क्या आपको पता है कि भारतीय परिवार अब निवेशक बन रहे हैं? एसबीआई की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि बैंकों में जमा राशि और कर्ज की रकम में भारी वृद्धि हुई है। जानिए इसके पीछे की मुख्य वजहें और इसका अर्थ क्या है।

Key Takeaways

  • बैंकों में जमा राशि तीन गुना बढ़ी है।
  • कर्ज और जमा का अनुपात 79 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
  • सरकारी बैंकों की स्थिति में सुधार हो रहा है।
  • निवेश की दिशा में परिवारों का रुख बढ़ा है।
  • आर्थिक स्थिति में सुधार से बैंकिंग प्रणाली मजबूत हुई है।

नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वित्त वर्ष 2015 से 2025 के बीच भारतीय बैंकों में जमा राशि और कर्ज की राशि लगभग तीन गुना बढ़ गई है। यह स्पष्ट दर्शाता है कि देश का बैंकिंग सिस्टम और अधिक मजबूत हो गया है और कर्ज देने की प्रक्रिया फिर से तेज हो गई है। यह जानकारी सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में सामने आई है।

भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2015 से 2025 के बीच बैंकों में जमा राशि 85.3 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई है। वहीं, बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज 67.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि बैंकों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के मुकाबले बढ़कर 94 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 77 प्रतिशत थी। यह संकेत करता है कि देश की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग प्रणाली में मजबूती आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई राज्यों में अब परिवार केवल बचत नहीं कर रहे हैं, बल्कि निवेश की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं। गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में बैंक में जमा राशि का एक हिस्सा तेजी से शेयर बाजार और अन्य वित्तीय बाजारों की ओर जा रहा है।

दीर्घकालिक दृष्टि से, वित्त वर्ष 2005 से 2025 के बीच बैंकों में जमा राशि 18.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई है। इसी प्रकार, बैंकों का कर्ज 11.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इससे यह स्पष्ट है कि बैंकिंग प्रणाली का आकार काफी बढ़ गया है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कर्ज देने की गति जमा की तुलना में तेज रही है, जिससे कर्ज और जमा का अनुपात वित्त वर्ष 2021 में 69 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 79 प्रतिशत हो गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी बैंक भी धीरे-धीरे फिर से अधिक कर्ज देने लगे हैं। पहले कुछ वर्षों में उनका हिस्सा कम हो गया था, लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है और वे अधिक कर्ज देने के लिए तैयार हैं।

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में बैंकों में नई जमा राशि 8.6 लाख करोड़ रुपए से घटकर 8.1 लाख करोड़ रुपए रह गई, जबकि इस दौरान कर्ज बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपए हो गया।

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ने के पीछे ब्याज से होने वाली कमाई, सरकारी बॉंड से लाभ और खुदरा तथा छोटे कारोबारियों को दिए गए कर्ज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बैंकों का मुनाफा और बेहतर होगा। त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग, कर्ज में तेजी, कम कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) आवश्यकता से मिलने वाले लाभ और असुरक्षितएमएफआई सेगमेंट में डिफॉल्ट के मामलों के धीरे-धीरे सामान्य होने से बैंकों को लाभ होगा।

Point of View

बल्कि निवेश की ओर भी बढ़ रहे हैं। यह बदलाव हमारे देश की आर्थिक मजबूती का संकेत है।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

भारतीय बैंकों में जमा राशि में वृद्धि के पीछे क्या कारण है?
भारतीय परिवारों की वित्तीय जागरूकता और निवेश के प्रति बढ़ता रुझान इसके मुख्य कारण हैं।
क्या सरकारी बैंकों की स्थिति में सुधार हुआ है?
हां, सरकारी बैंकों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है और वे अधिक कर्ज देने के लिए तैयार हैं।
बैंकिंग प्रणाली का आकार कैसे बढ़ा है?
बैंकिंग प्रणाली का आकार कर्ज और जमा राशि की बढ़ती मात्रा के कारण बढ़ा है।
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