क्या बॉबस्ले एक अद्वितीय बर्फीला खेल है, जिसे 'बर्फ का फॉर्मूला 1' कहा जाता है?
सारांश
Key Takeaways
- बॉबस्ले एक उत्कृष्ट शीतकालीन खेल है।
- इसका इतिहास 1860 के दशक से शुरू होता है।
- टीमवर्क और संतुलन महत्वपूर्ण हैं।
- सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनना आवश्यक है।
- बॉबस्ले में स्पर्धाएं विश्व स्तर पर आयोजित होती हैं।
नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉबस्ले को बर्फ का फॉर्मूला 1 माना जाता है। यह एक बेहद रोमांचक शीतकालीन खेल है, जहाँ खिलाड़ी विशेष स्लेज पर बैठकर बर्फीले ट्रैक पर उच्च गति से फिसलते हैं। इस खेल में टीमवर्क, संतुलन और सटीक मोड़ों का सही तालमेल ही विजेता का निर्धारण करता है।
बॉबस्ले का जन्म 1860 के दशक में स्विस लोगों द्वारा हुआ, जो इसे डिलीवरी स्लेज के रूप में विकसित किया गया था। 1880 के दशक तक, ब्रिटिश पर्यटक साधारण स्लेज का उपयोग कर रहे थे, किन्तु अब उन्हें अधिक रोमांच की तलाश थी।
सेंट मॉर्टिज के होटल मालिक कैस्पर बैडरट ने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस खेल को प्रोत्साहित किया, लेकिन विरोध के बाद इसे सार्वजनिक सड़कों के बजाय विशेष ट्रैक पर खेला जाने लगा।
चालक स्लेज की गति को बढ़ाने के लिए आगे-पीछे बॉब की तकनीक का प्रयोग करता है, जिससे इस खेल का नाम बॉबस्ले पड़ा।
शुरुआत में लकड़ी की स्लेज का उपयोग होता था, जिसे बाद में स्टील की स्लेज से बदल दिया गया। आजकल की बेहतरीन टीमें आर्टिफिशियल आइस ट्रैक पर हाई-टेक फाइबरग्लास और स्टील से बनी स्लेज का इस्तेमाल करती हैं।
19वीं शताब्दी के अंत में बॉबस्ले खेल का विकास हुआ। स्विस खिलाड़ियों ने दो स्केलेटन स्लेज को जोड़कर और स्टीयरिंग मैकेनिज्म लगाकर एक नई स्लेज बनाई, जिसमें सुरक्षा के लिए एक फ्रेम भी जोड़ा गया।
साल 1897 में दुनिया का पहला बॉबस्ले क्लब सेंट मोरिट्ज में स्थापित हुआ। वर्ष 1903 में यहाँ पहला बॉबस्ले ट्रैक बना और 1904 में पहली रेस का आयोजन हुआ।
करीब दो दशकों में इस खेल ने शीतकालीन ओलंपिक में भी अपनी जगह बना ली। 1923 में फेडरेशन इंटरनेशनेल डी बॉबस्ले एट डी टोबोगनिंग की स्थापना हुई। अगले वर्ष, 1924 में शैमॉनिक्स विंटर ओलंपिक में चार पुरुषों की स्पर्धा को शामिल किया गया। इसके बाद 1932 में दो पुरुष इवेंट को जोड़ा गया। साल 2002 में पहली बार 2-वुमेन बॉबस्ले रेस का आयोजन हुआ।
बॉबस्ले रेस में खिलाड़ी स्लेज को 50 मीटर तक धक्का देते हैं, जिससे स्लेज 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है। पायलट सबसे पहले स्लेज में कूदता है, उसके बाद टीम के अन्य सदस्य इसमें शामिल होते हैं।
बॉबस्ले में स्लेज और टीम के कुल वजन की सीमा तय होती है। डबल्स में स्लेज की लंबाई 2-7 मीटर होती है, जबकि चार खिलाड़ियों की रेस में स्लेज 3-8 मीटर लंबा होता है। महिलाओं की दौड़ में स्लेज का वजन 340 किलोग्राम है, जबकि पुरुषों की दौड़ में यह 390 किलोग्राम होता है। चार खिलाड़ियों की दौड़ में यह 630 किलोग्राम से अधिक नहीं हो सकता। खिलाड़ी खास ग्रिप वाले जूते पहनते हैं और सिर पर हेलमेट पहनना अनिवार्य है।
स्लेज के अंदर लगे स्टीयरिंग रिंग्स के माध्यम से पायलट स्लेज की दिशा को नियंत्रित करता है। ट्रैक की लंबाई लगभग 1200-1500 मीटर होती है, जिसमें 15 मोड़ होते हैं। आमतौर पर दो दिनों में चार हीट होती हैं, और विजेता का निर्धारण कुल समय के आधार पर किया जाता है। ब्रेकमैन फिनिश लाइन पार करने के बाद ब्रेक लीवर खींचकर स्लेज को रोकता है।