वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, 33 गाँवों में बाढ़ का संकट; घाटों पर आवाजाही ठप
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर 8 अगस्त 2026 को लगातार बढ़ता रहा और चेतावनी बिंदु को पार कर गया, जिससे शहर के प्रमुख घाटों के बीच आवाजाही बाधित हो गई है। सावन के पवित्र महीने में यह संकट श्रद्धालुओं, पर्यटकों और नाविकों — सभी के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन गया है।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय पुजारी पंडित विवेकानंद पांडे के अनुसार, गंगा का जलस्तर इतनी तेज़ी से बढ़ रहा है कि हर घंटे चौकियों को ऊपर ले जाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दिन में ही 20-25 फीट पानी बढ़ चुका है। उनके अनुसार, "गंगा का जलस्तर बढ़ने से हमें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले जब जलस्तर कम था, तो हम मंदिरों में रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना कर पाते थे। अब जलस्तर बढ़ने के कारण रुद्राभिषेक करना मुश्किल हो गया है।"
पांडे ने यह भी कहा कि सावन के कारण भक्तों को विशेष कठिनाई होगी और घाटों के बीच मार्ग बाधित होने से उन्हें रास्ते में पड़ने वाले छोटे शिवलिंगों पर पूजा करनी पड़ सकती है।
नाव संचालन और पर्यटन पर असर
बाढ़ के चलते नाव संचालन धीरे-धीरे ठप हो रहा है। गंगा के दूसरे किनारे पर नाव सेवा पूरी तरह बंद हो चुकी है, जिससे नाविकों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित हुई है और सुरक्षा के उपाय बढ़ा दिए गए हैं।
फर्रुखाबाद में भी गहराया संकट
फर्रुखाबाद में भी बाढ़ ने कई गाँवों को अपनी चपेट में ले लिया है। स्थानीय निवासी तौसीम ने बताया कि सड़कें डूब गई हैं और गाँव जलमग्न हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अभी यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि पानी और कितना बढ़ेगा। आस-पास के इलाकों में भूमि कटान भी जारी है और राहत सामग्री लेने के लिए लोगों को पाँच किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने बताया कि गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर है और 33 गाँवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। एक गाँव में पानी घुस जाने के बाद वहाँ के 300 लोगों को शरणार्थी शिविर में स्थानांतरित किया गया है। शिविर में पशुओं के लिए भी व्यवस्था की गई है। सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरित की जा रही है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब सावन के महीने में वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या सर्वाधिक होती है। गंगा का जलस्तर यदि इसी गति से बढ़ता रहा, तो और अधिक घाट और निचले इलाके जलमग्न होने की आशंका है। प्रशासन स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं।