8 अगस्त 2026
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वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, 33 गाँवों में बाढ़ का संकट; घाटों पर आवाजाही ठप

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वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, 33 गाँवों में बाढ़ का संकट; घाटों पर आवाजाही ठप

सारांश

सावन के पवित्र महीने में वाराणसी के लिए दोहरी मार — गंगा चेतावनी बिंदु पार कर चुकी है, घाटों पर नाव सेवा ठप है और 33 गाँव खतरे में हैं। 300 लोग शिविर में हैं, पाँच किलोमीटर पैदल चलकर राहत सामग्री मिल रही है। बाढ़ का यह दबाव अभी थमने के आसार नहीं।

मुख्य बातें

वाराणसी में गंगा का जलस्तर 8 अगस्त 2026 को चेतावनी बिंदु से ऊपर पहुँचा; हर घंटे जलस्तर बढ़ रहा है।
एक दिन में 20-25 फीट पानी बढ़ा; गंगा के दूसरे किनारे पर नाव सेवा पूरी तरह बंद ।
33 गाँवों में बाढ़ का खतरा; एक गाँव के 300 लोगों को शरणार्थी शिविर में स्थानांतरित किया गया।
फर्रुखाबाद में भी कई गाँव जलमग्न; राहत सामग्री के लिए 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है।
सावन के महीने में श्रद्धालुओं की रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना बाधित; सुरक्षा उपाय बढ़ाए गए।

वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर 8 अगस्त 2026 को लगातार बढ़ता रहा और चेतावनी बिंदु को पार कर गया, जिससे शहर के प्रमुख घाटों के बीच आवाजाही बाधित हो गई है। सावन के पवित्र महीने में यह संकट श्रद्धालुओं, पर्यटकों और नाविकों — सभी के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन गया है।

मुख्य घटनाक्रम

स्थानीय पुजारी पंडित विवेकानंद पांडे के अनुसार, गंगा का जलस्तर इतनी तेज़ी से बढ़ रहा है कि हर घंटे चौकियों को ऊपर ले जाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दिन में ही 20-25 फीट पानी बढ़ चुका है। उनके अनुसार, "गंगा का जलस्तर बढ़ने से हमें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले जब जलस्तर कम था, तो हम मंदिरों में रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना कर पाते थे। अब जलस्तर बढ़ने के कारण रुद्राभिषेक करना मुश्किल हो गया है।"

पांडे ने यह भी कहा कि सावन के कारण भक्तों को विशेष कठिनाई होगी और घाटों के बीच मार्ग बाधित होने से उन्हें रास्ते में पड़ने वाले छोटे शिवलिंगों पर पूजा करनी पड़ सकती है।

नाव संचालन और पर्यटन पर असर

बाढ़ के चलते नाव संचालन धीरे-धीरे ठप हो रहा है। गंगा के दूसरे किनारे पर नाव सेवा पूरी तरह बंद हो चुकी है, जिससे नाविकों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित हुई है और सुरक्षा के उपाय बढ़ा दिए गए हैं।

फर्रुखाबाद में भी गहराया संकट

फर्रुखाबाद में भी बाढ़ ने कई गाँवों को अपनी चपेट में ले लिया है। स्थानीय निवासी तौसीम ने बताया कि सड़कें डूब गई हैं और गाँव जलमग्न हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अभी यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि पानी और कितना बढ़ेगा। आस-पास के इलाकों में भूमि कटान भी जारी है और राहत सामग्री लेने के लिए लोगों को पाँच किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने बताया कि गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर है और 33 गाँवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। एक गाँव में पानी घुस जाने के बाद वहाँ के 300 लोगों को शरणार्थी शिविर में स्थानांतरित किया गया है। शिविर में पशुओं के लिए भी व्यवस्था की गई है। सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरित की जा रही है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब सावन के महीने में वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या सर्वाधिक होती है। गंगा का जलस्तर यदि इसी गति से बढ़ता रहा, तो और अधिक घाट और निचले इलाके जलमग्न होने की आशंका है। प्रशासन स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सावन के महीने में इसका आना धार्मिक और आर्थिक — दोनों दृष्टियों से दोगुना नुकसानदेह है। हर साल बाढ़ का यही चक्र दोहराया जाता है और हर साल प्रशासन 'राहत वितरण' की औपचारिकता निभाता है, जबकि स्थायी तटबंध और जल-प्रबंधन की योजनाएँ कागज़ों पर ही रह जाती हैं। 300 लोगों को शिविर में भेजना तात्कालिक राहत है — असली सवाल यह है कि इन्हीं गाँवों को हर मानसून में खाली क्यों करना पड़ता है। नाविकों और पुजारियों की आजीविका पर पड़ने वाला असर मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर हाशिये पर रहता है, जबकि यही वह वर्ग है जो हर बार सबसे पहले और सबसे गहरे डूबता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी में गंगा का जलस्तर कितना बढ़ा है?
8 अगस्त 2026 को गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर पहुँच गया है और एक दिन में 20-25 फीट पानी बढ़ चुका है। जिलाधिकारी अंकुर लाठर के अनुसार स्थिति पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।
वाराणसी में बाढ़ से कौन-कौन से घाट प्रभावित हैं?
बाढ़ के कारण वाराणसी के कई प्रमुख घाटों के बीच आवाजाही बाधित हो गई है। नाव सेवा धीरे-धीरे बंद हो रही है और गंगा के दूसरे किनारे पर नाव संचालन पूरी तरह ठप हो चुका है।
बाढ़ से कितने गाँव प्रभावित हुए हैं और लोगों को कहाँ भेजा गया?
जिलाधिकारी के अनुसार 33 गाँवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है और एक गाँव में पानी घुस जाने के बाद वहाँ के 300 लोगों को शरणार्थी शिविर में स्थानांतरित किया गया है। शिविर में पशुओं के लिए भी व्यवस्था की गई है।
सावन में गंगा बाढ़ का श्रद्धालुओं पर क्या असर पड़ा है?
सावन के महीने में रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना बाधित हो गई है। पंडित विवेकानंद पांडे के अनुसार घाटों के बीच मार्ग बंद होने से भक्तों को रास्ते में पड़ने वाले छोटे शिवलिंगों पर पूजा करनी पड़ सकती है।
फर्रुखाबाद में बाढ़ की स्थिति कैसी है?
फर्रुखाबाद में भी बाढ़ ने कई गाँवों को जलमग्न कर दिया है और सड़कें डूब गई हैं। राहत सामग्री के लिए लोगों को पाँच किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है और आस-पास के इलाकों में भूमि कटान भी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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