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सीपीआई के वीर पांडियन का पलटवार: 'डीएमके की गलतियों के लिए वामपंथी ज़िम्मेदार नहीं'

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सीपीआई के वीर पांडियन का पलटवार: 'डीएमके की गलतियों के लिए वामपंथी ज़िम्मेदार नहीं'

सारांश

सीपीआई के वीर पांडियन का पलटवार — 'DMK को बाहर से दिया समर्थन उसकी गलतियों की ज़िम्मेदारी नहीं बनाता।' मंत्री आधव अर्जुन की माँग ख़ारिज, विजय सरकार को अस्थिर न करने का आश्वासन।

मुख्य बातें

सीपीआई के तमिलनाडु राज्य सचिव एम.
वीर पांडियन ने मंत्री आधव अर्जुन की माँग को 22 सितंबर 2026 को सिरे से ख़ारिज किया।
वीर पांडियन ने कहा — वामपंथियों ने DMK सरकार को बाहर से समर्थन दिया था, इसलिए उसकी गलतियों के लिए वे उत्तरदायी नहीं।
उन्होंने मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्री कझगम सरकार को अस्थिर करने के इरादे से साफ़ इनकार किया।
वीर पांडियन का दावा — तमिलनाडु में किसी भी कम्युनिस्ट को आज तक भ्रष्टाचार के मामले में अदालत ने दोषी नहीं ठहराया।
मंत्री आधव अर्जुन ने मदुरंतकम की सभा में राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग की कथित अनियमितताओं पर वामपंथियों से जवाब माँगा था।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के तमिलनाडु राज्य सचिव एम. वीर पांडियन ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को मंत्री आधव अर्जुन की उस माँग को सिरे से ख़ारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने वामपंथी दलों से पिछली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के कार्यकाल में राजमार्ग और लोक निर्माण विभागों में कथित अनियमितताओं पर स्पष्टीकरण माँगा था। वीर पांडियन ने स्पष्ट किया कि बाहर से समर्थन देने वाले दल उस सरकार के हर निर्णय या चूक के लिए उत्तरदायी नहीं हो सकते।

मंत्री की चुनौती और सीपीआई का खंडन

मंत्री आधव अर्जुन ने मदुरंतकम में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए यह सवाल उठाया था कि क्या कम्युनिस्ट दल ईमानदारी से यह दावा कर सकते हैं कि पूर्व DMK प्रशासन के दौरान कोई अनियमितता नहीं हुई। उनका इशारा पिछली सरकार में वामपंथियों की साझेदारी को लेकर जवाबदेही तय करने की ओर था।

इस चुनौती को नकारते हुए वीर पांडियन ने कहा कि वामपंथी दलों ने DMK सरकार को लोकतंत्र की रक्षा की भावना से समर्थन दिया था — और यह समर्थन बाहर से था, गठबंधन में शामिल होकर नहीं। उन्होंने तर्क दिया कि इस समर्थन को उस सरकार की नीतियों या गलतियों की बिना शर्त स्वीकृति के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यों को तोड़ना-मरोड़ना है।

वीर पांडियन के तीखे बोल

वीर पांडियन ने सीधे शब्दों में कहा, 'क्या हमें पाँच साल बाद दूसरों की गलतियों का हिसाब देना चाहिए? हमारा समर्थन पिछली सरकार के साथ हुए समझौते पर आधारित था और बाहर से दिया गया था। हमें उसकी गलतियों के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।'

उन्होंने अर्जुन को सलाह दी कि वामपंथ पर आरोप लगाने से पहले वे कम्युनिस्ट आंदोलन का इतिहास पढ़ें और यह जानकारी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के साथ भी साझा करें।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीपीआई का बचाव

वीर पांडियन ने कम्युनिस्ट आंदोलन की साख का हवाला देते हुए कहा कि तमिलनाडु में किसी भी कम्युनिस्ट नेता को आज तक किसी अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी नहीं ठहराया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के सदस्यों ने न कभी रिश्वत ली और न ही दूसरों की भ्रष्टाचार देखकर मौन स्वीकृति दी।

गौरतलब है कि यह राजनीतिक विवाद ऐसे समय में उभरा है जब तमिलनाडु में तमिलगा वेट्री कझगम की सत्ता नई है और विपक्षी दल पिछली सरकार की कथित विफलताओं को बार-बार उठा रहे हैं।

विजय सरकार को अस्थिर करने का कोई इरादा नहीं

वीर पांडियन ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम सरकार को अस्थिर करने का उनकी पार्टी का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के साथ वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों को लोकतांत्रिक तरीकों से उठाया जाएगा।

यह बयान महत्त्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि वामपंथी दल फ़िलहाल सत्ता-पक्ष के साथ टकराव की बजाय संवाद की नीति अपनाना चाहते हैं।

आगे की राह

इस विवाद ने तमिलनाडु की राजनीति में 'बाहरी समर्थन बनाम जवाबदेही' की पुरानी बहस को फिर से हवा दे दी है। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक गठजोड़ में भले ही औपचारिक भागीदारी न हो, लेकिन नैतिक ज़िम्मेदारी से पूरी तरह पीछा नहीं छुड़ाया जा सकता। सीपीआई के तेवर बता रहे हैं कि आने वाले समय में तमिलनाडु में राजनीतिक बहसें और तेज़ होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसके लिए 'हमने तो सिर्फ बाहर से समर्थन दिया था' का तर्क जनता के बीच कितना ग्राह्य होगा, यह देखना बाकी है। यह विवाद दरअसल तमिलनाडु की उस पुरानी राजनीतिक संस्कृति को उजागर करता है जहाँ गठजोड़ अवसरवादी होते हैं और जवाबदेही के ढाँचे अस्पष्ट रहते हैं।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीआई के वीर पांडियन ने मंत्री आधव अर्जुन की माँग क्यों ख़ारिज की?
वीर पांडियन ने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टियों ने पिछली DMK सरकार को बाहर से समर्थन दिया था, इसलिए उस सरकार की प्रशासनिक गलतियों या अनियमितताओं की ज़िम्मेदारी वामपंथियों पर नहीं डाली जा सकती। उनके अनुसार, राजनीतिक समर्थन का अर्थ सरकार के हर कार्य की बिना शर्त स्वीकृति नहीं होता।
मंत्री आधव अर्जुन ने वामपंथियों से क्या जवाब माँगा था?
मंत्री आधव अर्जुन ने मदुरंतकम की एक सभा में पूर्व DMK सरकार के दौरान राजमार्ग और लोक निर्माण विभागों में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कम्युनिस्ट दलों से पूछा था कि क्या वे ईमानदारी से दावा कर सकते हैं कि उस कार्यकाल में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
क्या सीपीआई तमिलगा वेट्री कझगम सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करेगी?
नहीं। वीर पांडियन ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्री कझगम सरकार को अस्थिर करने का उनकी पार्टी का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्ता-पक्ष से राजनीतिक मतभेदों को लोकतांत्रिक तरीकों से उठाया जाएगा।
वीर पांडियन ने कम्युनिस्ट आंदोलन की साख के बारे में क्या कहा?
वीर पांडियन ने दावा किया कि तमिलनाडु में किसी भी कम्युनिस्ट को आज तक भ्रष्टाचार के मामले में किसी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी सदस्यों ने न कभी रिश्वत ली और न ही अन्य लोगों की भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी पर मौन रहे।
यह विवाद तमिलनाडु की राजनीति में क्यों अहम है?
यह विवाद 'बाहरी समर्थन बनाम जवाबदेही' की उस व्यापक बहस को फिर से जीवंत करता है जो भारतीय राज्य-स्तरीय राजनीति में बार-बार उठती है। तमिलनाडु में नई सरकार के शुरुआती महीनों में यह विवाद राजनीतिक दलों के बीच सत्ता और उत्तरदायित्व के समीकरणों को परिभाषित करने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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