वाराणसी में गंगा का जलस्तर 68.92 मीटर पर, चेतावनी निशान से 1.34 मीटर नीचे; नाव संचालन अभी भी बंद
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर 1 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से घटते हुए 68.92 मीटर पर पहुँच गया है — जो 70.26 मीटर के चेतावनी बिंदु से करीब 1.34 मीटर नीचे है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार बाढ़ का तत्काल खतरा कम हुआ है, लेकिन नदी में नौकायन अभी भी निलंबित है और घाटों पर गंदगी व मिट्टी जमा हो गई है।
मौजूदा जलस्तर की स्थिति
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के मापन केंद्र पर 12 सितंबर 2026 को गंगा का जलस्तर 68.92 मीटर दर्ज किया गया। इससे पहले शनिवार को जलस्तर 69.28 मीटर था। इस प्रकार नदी का स्तर लगातार गिर रहा है, हालाँकि यह अभी भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है।
गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों में जलस्तर करीब 4.5 फीट घट चुका है। घाटों पर कीचड़ और मिट्टी की परत जमी होने से श्रद्धालुओं के लिए गंगा स्नान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
नाव संचालन और आम जनता पर असर
स्थानीय निवासी विकास कुमार सहनी के अनुसार, फिलहाल नौकायन पूरी तरह बंद है और जलस्तर में और अधिक गिरावट आने के बाद ही इसे फिर से शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें अभी काफी समय लग सकता है।
नाव संचालन ठप होने से घाटों पर जीविका चलाने वाले नाविक, पुजारी और दुकानदार सीधे प्रभावित हो रहे हैं। पंडित ओमकारनाथ त्रिपाठी ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के चलते लोग स्नान नहीं कर पाते, जिससे घाटों पर पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियाँ भी सिमट गई हैं। उन्होंने कहा, 'गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण हम लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा।'
प्रयागराज में भी राहत के संकेत
प्रयागराज में भी गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है। आँकड़ों के अनुसार, नैनी में यमुना का जलस्तर 81.02 मीटर, फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 81.90 मीटर और छतनाग में गंगा का जलस्तर 80.57 मीटर दर्ज किया गया।
बक्सी बांध स्थित एसटीपी के निकट भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जहाँ जलस्तर 81.18 मीटर रहा। प्रयागराज जिले में गंगा और यमुना दोनों के लिए खतरे का निशान 84.734 मीटर निर्धारित है, और दोनों नदियाँ इस सीमा से काफी नीचे हैं।
आगे क्या होगा
जल स्तर में निरंतर गिरावट से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में घाटों पर सामान्य गतिविधियाँ धीरे-धीरे बहाल हो सकती हैं। हालाँकि, प्रशासन ने नौकायन बहाली का कोई आधिकारिक समय-सीमा अभी तक घोषित नहीं की है। घाटों की सफाई और मिट्टी हटाने का काम शुरू होने के बाद ही श्रद्धालुओं की वापसी संभव होगी।