21 अगस्त 2026
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वाराणसी में वरुणा नदी उफान पर: निचले इलाकों में बाढ़, 46 राहत केंद्र सक्रिय

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वाराणसी में वरुणा नदी उफान पर: निचले इलाकों में बाढ़, 46 राहत केंद्र सक्रिय

सारांश

वाराणसी में गंगा और वरुणा नदी के उफान से निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से दो मीटर नीचे है, लेकिन खतरा बरकरार है। प्रशासन ने 46 राहत केंद्र खोले हैं और वरिष्ठ अधिकारियों ने नदियों का निरीक्षण किया।

मुख्य बातें

वाराणसी में 21 अगस्त को वरुणा नदी उफान पर आई, निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों में घुसा।
गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर 70.26 मीटर से लगभग दो मीटर नीचे; खतरे का निशान 71.26 मीटर ।
जिला प्रशासन ने शहर में 46 बाढ़ राहत केंद्र स्थापित किए; निचले इलाकों के लोग शिविरों में जाने लगे।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने गंगा व वरुणा नदियों का स्थलीय निरीक्षण किया।
नाविकों और घाटों पर रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश; अफ़वाहों से बचने की अपील।

वाराणसी में 21 अगस्त को गंगा और उसकी सहायक वरुणा नदी के जलस्तर में तेज़ वृद्धि के चलते शहर के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुँच गया है। वरुणा कॉरिडोर और आसपास की कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे रिहायशी इलाकों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बाढ़ की मौजूदा स्थिति

गुरुवार को गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर 70.26 मीटर से लगभग दो मीटर नीचे बह रहा था। वाराणसी में गंगा का खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है। जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है, जिससे प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। वरुणा नदी के किनारे बसे कई मोहल्लों में पानी घरों की दहलीज़ तक पहुँच गया है और कुछ स्थानों पर अंदर भी घुस गया है।

बाढ़ पीड़ितों की आपबीती

बाढ़ प्रभावित निवासी सुनील यादव ने बताया, 'जब पानी बढ़ जाता है तो काफी परेशानी होती है। सामान उठाकर ऊपर की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में खाने-पीने की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो जाता है।' यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की तेज़ बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में पहले से ही बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं।

प्रशासन की तैयारी और निरीक्षण

जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने गंगा और वरुणा नदी का स्थलीय निरीक्षण कर बाढ़ की स्थिति का जायज़ा लिया। जिला प्रशासन ने शहर में कुल 46 बाढ़ राहत केंद्र स्थापित किए हैं। एहतियात के तौर पर निचले इलाकों के निवासी इन राहत शिविरों में जाने लगे हैं।

अधिकारियों की अपील

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने नागरिकों से अपील की है कि वे बाढ़ के दौरान जोखिम भरी गतिविधियों से बचें और प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि अफ़वाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचित करें। अधिकारियों ने नाविकों और घाटों पर रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

आगे क्या होगा

गंगा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के मद्देनज़र स्थिति और बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन की नज़र जलस्तर पर बनी हुई है और राहत केंद्रों को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि दीर्घकालिक जल-निकासी और बाढ़-रोधी ढाँचे पर कब ठोस काम होगा — जो हर साल की इस पीड़ा को स्थायी रूप से कम कर सके।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी में वरुणा नदी के उफान से कौन-से इलाके प्रभावित हुए हैं?
वरुणा कॉरिडोर और उसके आसपास की कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जबकि शहर के निचले इलाकों में बसे रिहायशी क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घरों के अंदर तक पहुँच गया है।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर अभी कितना है और खतरे का निशान क्या है?
21 अगस्त को गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर 70.26 मीटर से लगभग दो मीटर नीचे बह रहा था। वाराणसी में गंगा का खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है।
बाढ़ से निपटने के लिए वाराणसी प्रशासन ने क्या इंतज़ाम किए हैं?
जिला प्रशासन ने शहर में कुल 46 बाढ़ राहत केंद्र स्थापित किए हैं। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने नदियों का निरीक्षण किया और नाविकों व घाटों पर रहने वालों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
वाराणसी बाढ़ के दौरान लोगों को क्या करना चाहिए?
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने नागरिकों से अपील की है कि वे जोखिम भरी गतिविधियों से बचें, अफ़वाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचित करें। ज़रूरत पड़ने पर राहत शिविरों में जाएँ।
क्या वाराणसी में बाढ़ की स्थिति और बिगड़ सकती है?
गंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन जलस्तर पर निरंतर नज़र रख रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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