वाराणसी में वरुणा नदी उफान पर: निचले इलाकों में बाढ़, 46 राहत केंद्र सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी में 21 अगस्त को गंगा और उसकी सहायक वरुणा नदी के जलस्तर में तेज़ वृद्धि के चलते शहर के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुँच गया है। वरुणा कॉरिडोर और आसपास की कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे रिहायशी इलाकों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ की मौजूदा स्थिति
गुरुवार को गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर 70.26 मीटर से लगभग दो मीटर नीचे बह रहा था। वाराणसी में गंगा का खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है। जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है, जिससे प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। वरुणा नदी के किनारे बसे कई मोहल्लों में पानी घरों की दहलीज़ तक पहुँच गया है और कुछ स्थानों पर अंदर भी घुस गया है।
बाढ़ पीड़ितों की आपबीती
बाढ़ प्रभावित निवासी सुनील यादव ने बताया, 'जब पानी बढ़ जाता है तो काफी परेशानी होती है। सामान उठाकर ऊपर की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में खाने-पीने की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो जाता है।' यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की तेज़ बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में पहले से ही बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं।
प्रशासन की तैयारी और निरीक्षण
जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने गंगा और वरुणा नदी का स्थलीय निरीक्षण कर बाढ़ की स्थिति का जायज़ा लिया। जिला प्रशासन ने शहर में कुल 46 बाढ़ राहत केंद्र स्थापित किए हैं। एहतियात के तौर पर निचले इलाकों के निवासी इन राहत शिविरों में जाने लगे हैं।
अधिकारियों की अपील
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने नागरिकों से अपील की है कि वे बाढ़ के दौरान जोखिम भरी गतिविधियों से बचें और प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि अफ़वाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचित करें। अधिकारियों ने नाविकों और घाटों पर रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
आगे क्या होगा
गंगा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के मद्देनज़र स्थिति और बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन की नज़र जलस्तर पर बनी हुई है और राहत केंद्रों को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है।