वाराणसी बाढ़: PM मोदी ने मेयर-कलेक्टर से ली जानकारी, युद्धस्तर पर राहत के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 सितंबर को वाराणसी में बाढ़ की बिगड़ती स्थिति को लेकर मेयर अशोक तिवारी और कलेक्टर सत्येंद्र कुमार से फोन पर विस्तृत जानकारी ली और अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत कार्य सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। गंगा नदी का जलस्तर 70.29 मीटर पर पहुँचकर चेतावनी के निशान 70.26 मीटर को पार कर चुका है, जिससे निचले इलाकों और घाटों के पास रहने वाले नागरिकों में चिंता बढ़ गई है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित नागरिकों को राहत शिविरों में हर ज़रूरी सुविधा तत्काल उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त राहत सामग्री की आवश्यकता पड़ने पर बिना देरी के व्यवस्था की जाए। वाराणसी लोकसभा सीट से सांसद होने के नाते मोदी स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं।
इससे पहले बुधवार को जिला प्रशासन ने गंगा में नावों का संचालन रोक दिया और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी। केंद्रीय जल आयोग के आँकड़ों के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर 70.29 मीटर दर्ज किया गया, जो 70.26 मीटर के चेतावनी स्तर से ऊपर है।
जलस्तर की स्थिति
वाराणसी में गंगा का खतरे का स्तर 71.26 मीटर निर्धारित है, जबकि अब तक का सर्वाधिक बाढ़ स्तर 73.90 मीटर रिकॉर्ड किया गया है। फिलहाल जलस्तर चेतावनी और खतरे के स्तर के बीच है, लेकिन यदि बारिश जारी रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। गौरतलब है कि निचले इलाकों और घाटों के समीप रहने वाले परिवारों को सबसे अधिक जोखिम है।
प्रशासन की सतर्कता
जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए गंगा नदी में नौका परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया है। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे घाटों की ओर न जाएँ और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। यह ऐसे समय में आया है जब वाराणसी में पर्यटन और धार्मिक गतिविधियाँ चरम पर होती हैं।
आम जनता पर असर
बाढ़ के कारण घाटों के निकट रहने वाले परिवारों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया जा रहा है। प्रशासन राहत सामग्री वितरण और चिकित्सा सुविधाओं की निगरानी कर रहा है। प्रधानमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद राहत कार्यों की रफ्तार बढ़ाए जाने की उम्मीद है।
क्या होगा आगे
अधिकारियों के अनुसार जलस्तर पर लगातार नज़र रखी जा रही है। यदि गंगा का स्तर 71.26 मीटर के खतरे के निशान के करीब पहुँचा, तो व्यापक निकासी अभियान शुरू किया जा सकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से स्थिति की नियमित समीक्षा जारी रहने की बात कही गई है।