भारत-बेल्जियम रक्षा साझेदारी: 10 समझौतों से रॉकेट, ड्रोन और माइन-वॉरफेयर में संयुक्त उत्पादन का रास्ता खुला
सारांश
मुख्य बातें
भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा सहयोग एक नए और ठोस चरण में प्रवेश कर रहा है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान रक्षा उद्योग से जुड़े 10 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने हैं, जिनमें रॉकेट, गोला-बारूद, ड्रोन, रडार और समुद्री सुरक्षा तकनीक के क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन एवं असेंबली की योजनाएँ शामिल हैं। यह यात्रा दोनों देशों के रक्षा संबंधों को राजनयिक बयानबाजी से आगे ले जाकर औद्योगिक धरातल पर स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल और समझौतों का दायरा
प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ बेल्जियम की 15 रक्षा कंपनियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत आया है, जिनमें से अधिकांश का प्रतिनिधित्व उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वयं कर रहे हैं। प्रस्तावित समझौतों के अंतर्गत बेल्जियम की कई रक्षा तकनीकों का भारत में उत्पादन और असेंबली शुरू होने की संभावना है।
इन तकनीकों में रॉकेट, गोला-बारूद, हथियार प्रणालियाँ, ड्रोन, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और काउंटर-ड्रोन तकनीक शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेल्जियम के प्रधानमंत्री की बैठक और दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर हस्ताक्षर इस सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
प्रमुख औद्योगिक परियोजनाएँ
सबसे ठोस समझौतों में से एक बेल्जियम की न्यू लाचौसे और भारत की टेंबो क्लासिक इंजीनियरिंग के बीच है। इसके तहत दो प्रकार के गोला-बारूद के लिए पूरी उत्पादन लाइन और दो अन्य कैलिबर के लिए उपकरण उपलब्ध कराए जाएँगे। प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता करीब 10 करोड़ राउंड प्रति वर्ष होगी और परियोजना का अनुमानित मूल्य 5 करोड़ यूरो है, जिसकी डिलीवरी 2028 और 2029 में निर्धारित है।
इसके अतिरिक्त, बेल्जियम के 70 मिमी रॉकेट अब भारत में भी असेंबल किए जाएँगे, जिसमें भारतीय कंपनियाँ उत्पादन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेंगी। भारत में पूरी तरह निर्मित पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है।
समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर एक्सैल बेल्जियम और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के बीच सहयोग उल्लेखनीय है। L&T भारत के लिए माइन काउंटरमेजर वेसल बना रही है, जबकि एक्सैल इन जहाजों के लिए समुद्री बारूदी सुरंगों को खोजने, पहचानने और निष्क्रिय करने वाली स्वायत्त प्रणालियाँ उपलब्ध कराएगी। पहले चरण में 12 जहाजों का कार्यक्रम है, जो भविष्य में 59 तक पहुँच सकता है।
बेल्जियम की एफएन हर्स्टल और कल्याणी स्ट्रेटजिक सिस्टम्स भारत में हथियार तथा काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाएँ तलाश रही हैं। वहीं ओआईपी सेंसर सिस्टम्स और सरकारी कंपनी इंडिया ओप्टेल के बीच सहयोग पहले से जारी है — ओआईपी अर्जुन एमके-I टैंक के लिए 130 से अधिक साइट उपलब्ध करा चुकी है और अर्जुन एमके-II के लिए नया फायर-कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है जो लेजर-गाइडेड मिसाइलें लॉन्च करने में भी सक्षम है।
भारत के हल्के टैंक जोरावर कार्यक्रम में बेल्जियम की जॉन कॉकेरिल डिफेंस टरेट आपूर्ति की दावेदार है। जोरावर को ऊँचाई वाले इलाकों में सैन्य अभियानों के लिए विकसित किया जा रहा है, जिसका सीधा संबंध चीन से लगी भारत की सीमा पर सैन्य क्षमता बढ़ाने से है।
बेल्जियम की पिटागन भारत में मोबाइल बैरियर तकनीक के उत्पादन और बिक्री के लिए क्रिशना एलिड के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित कर रही है, जिसमें पिटागन की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। कंपनी भारत को दक्षिण-पूर्व एशियाई बाज़ारों तक पहुँचने के केंद्र के रूप में भी देख रही है।
संस्थागत ढाँचा और उद्योग संगठनों की भूमिका
भारत के सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चर्स (SIDM) और बेल्जियम के बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री (BSDI) के बीच भी सहयोग समझौता किया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों की रक्षा कंपनियों को भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत संयुक्त विकास और उत्पादन परियोजनाओं में भाग लेने का रास्ता आसान करना है।
इस समझौते के अंतर्गत दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, अधिकारियों का आदान-प्रदान, अनुसंधान एवं विकास, सेमिनार, संयुक्त सैन्य अभ्यास और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का ढाँचा तैयार किया जाएगा। बेल्जियम डिफेंस कॉलेज 2027 में अपनी 'वर्ल्ड स्टडी ट्रिप' के लिए भारत को मेजबान देश के रूप में चुनने की योजना बना रहा है।
रणनीतिक संदर्भ: क्यों अहम है यह साझेदारी
मंत्री थियो फ्रांकेन ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की एक तेजी से उभरती आर्थिक और सैन्य शक्ति बताते हुए कहा, "यूरोप और एशिया की सुरक्षा अब एक-दूसरे से अलग नहीं देखी जा सकती। रूस-यूक्रेन में युद्ध जारी है और वह ईरान तथा उत्तर कोरिया के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। वहीं चीन हिंद-प्रशांत में लगातार अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है।"
गौरतलब है कि मौजूदा रक्षा पहल की नींव पिछले आर्थिक मिशन के दौरान रखी गई थी। यह ऐसे समय में हो रहा है जब यूरोप और हिंद-प्रशांत दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। फ्रांकेन के अनुसार, बेल्जियम जैसे खुले व्यापार वाले देश के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है — बंदरगाहों, पाइपलाइनों और समुद्र के भीतर बिछी डेटा केबल जैसी बुनियादी संरचनाओं की रक्षा भी सहयोग के दायरे में है।
आगे की राह
फ्रांकेन ने स्पष्ट किया कि अब अगला चरण केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि संयुक्त प्रशिक्षण, औद्योगिक परियोजनाओं और कंपनियों के लिए वास्तविक कारोबारी अवसर पैदा करने का है। दोनों देश रक्षा उद्योग के लिए एक साझा औद्योगिक रोडमैप तैयार करने पर भी काम करेंगे। बेल्जियम का मानना है कि भारत के बड़े पैमाने पर सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण से उसकी कंपनियों के लिए दीर्घकालिक कारोबारी अवसर खुलेंगे — और भारत के लिए यह साझेदारी अत्याधुनिक यूरोपीय तकनीक, तकनीकी हस्तांतरण और वैश्विक सप्लाई चेन में नई पहुँच का द्वार खोल सकती है।