बेल्जियम PM बार्ट डी वेवर का भारत दौरा: मोदी से मुलाकात, व्यापार-रक्षा सहयोग पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर बुधवार, 3 सितंबर 2025 को अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुँच रहे हैं। फरवरी 2024 में पद संभालने के बाद यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन भी इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।
मुख्य घटनाक्रम
गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बार्ट डी वेवर के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता व्यापार, रक्षा सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और भारत-यूरोपीय संघ (EU) के व्यापक संबंधों पर विचार-विमर्श करेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।
MEA के अनुसार, डी वेवर भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक विशेष कारोबारी कार्यक्रम में मुख्य भाषण भी देंगे। यह आयोजन भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संदर्भ में होगा, जो दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
मुंबई में व्यापारिक बैठकें
नई दिल्ली के कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बार्ट डी वेवर मुंबई जाएंगे, जहाँ वे विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इनमें हीरा उद्योग, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़े प्रमुख व्यवसायी शामिल होंगे। मुंबई का यह चरण यात्रा के व्यापारिक आयाम को रेखांकित करता है, क्योंकि बेल्जियम का एंटवर्प बंदरगाह यूरोप के सबसे बड़े हीरा व्यापार केंद्रों में से एक है और भारत के सूरत से उसका गहरा कारोबारी रिश्ता है।
पृष्ठभूमि: रणनीतिक वार्ता की नींव
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-बेल्जियम संबंध तेज़ी से प्रगाढ़ हो रहे हैं। पिछले महीने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट ने 15 जुलाई को ब्रुसेल्स में पहली भारत-बेल्जियम रणनीतिक वार्ता की सह-अध्यक्षता की थी। उस बैठक में राजनीति, अर्थव्यवस्था, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, मोबिलिटी और दवा उद्योग सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा हुई थी।
उस बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा था, 'ब्रुसेल्स में उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट के साथ पहली भारत-बेल्जियम रणनीतिक वार्ता की सह-अध्यक्षता की। हाल के वर्षों में हमारी साझेदारी काफी मजबूत हुई है। आज की चर्चा ने बेल्जियम और यूरोपीय संघ के साथ भारत के रिश्तों की महत्वाकांक्षा को दर्शाया।' उन्होंने यह भी कहा था कि बंदरगाह, समुद्री क्षेत्र, सेमीकंडक्टर और सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित बनाने के अवसरों पर भी चर्चा हुई, साथ ही पश्चिम एशिया सहित वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
यात्रा का व्यापक महत्व
MEA ने इस यात्रा को भारत-बेल्जियम साझेदारी को नई ऊँचाई देने का अवसर बताया है। व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, संपर्क व्यवस्था और लोगों के बीच आपसी संबंधों को मज़बूत करने पर विशेष ध्यान रहेगा। गौरतलब है कि बेल्जियम यूरोपीय संघ का मुख्यालय होने के नाते भारत-EU FTA वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए यह यात्रा केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि व्यापक यूरोपीय संदर्भ में भी अहम है।
आगे क्या होगा
यात्रा के दौरान होने वाली वार्ताओं के नतीजे आने वाले हफ्तों में भारत-EU FTA की गति को प्रभावित कर सकते हैं। रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन की उपस्थिति संकेत देती है कि रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में ठोस समझौतों की संभावना है। दोनों देशों के बीच इस यात्रा से संबंधों में एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।