रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का जर्मनी दौरा: रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर
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नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आगामी सप्ताह में जर्मनी की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और भी मजबूती प्रदान करना है। इस दौरान वह अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस और अन्य उच्च अधिकारियों से बातचीत करेंगे।
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस दौरे में दोनों नेताओं के बीच रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने, मिलिट्री-टू-मिलिट्री संबंधों को सुदृढ़ करने, और साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा ड्रोन जैसे उभरते क्षेत्रों में नए अवसरों की खोज पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
अपनी बैठक में, दोनों मंत्रियों के बीच एक डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित शांति अभियानों में प्रशिक्षण सहयोग से संबंधित समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस दौरे का उद्देश्य वर्तमान में चल रहे रक्षा सहयोग पहलों की समीक्षा करना और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच नए सहयोग के रास्ते पहचानना है। राजनाथ सिंह इस दौरान जर्मन रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों से भी चर्चा कर सकते हैं, जिससे मेक-इन-इंडिया पहल के तहत संयुक्त विकास और उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
14 अप्रैल को, भारत और जर्मनी ने बर्लिन में एक विदेश कार्यालय परामर्शरक्षा, औद्योगिक सहयोग, डिजिटल गवर्नेंस, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, नवाचार और तीसरे देशों में विकास सहयोग शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि बैठक के दौरान, दोनों देशों के अधिकारियों ने आपसी रिश्तों की मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन किया और भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर विचार किया।
इससे पूर्व, 2019 में भारत की पूर्व रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जर्मनी का दौरा किया था। इसके बाद बोरिस पिस्टोरियस ने जून 2023 में भारत आकर राजनाथ सिंह से बातचीत की थी।
रक्षा मंत्रालय ने कहा, "भारत और जर्मनी के बीच एक मजबूत और विविधतापूर्ण रणनीतिक साझेदारी है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के राज और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति समान प्रतिबद्धता पर आधारित है। हाल के वर्षों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग इस साझेदारी का एक आवश्यक स्तंभ बनकर उभरा है। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करना और क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति, स्थिरता और खुशहाली में योगदान देना है।