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राजनाथ सिंह ने जर्मनी के कील में TKMS सबमरीन प्लांट का दौरा किया, नौसेना तकनीक देख बोले — 'बेहद प्रभावशाली'

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राजनाथ सिंह ने जर्मनी के कील में TKMS सबमरीन प्लांट का दौरा किया, नौसेना तकनीक देख बोले — 'बेहद प्रभावशाली'

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी के कील में TKMS सबमरीन प्लांट का दौरा किया और उन्नत नौसेना तकनीक का निरीक्षण किया। जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ बर्लिन में हुई बैठक में दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 22 अप्रैल 2025 को जर्मनी के कील शहर में TKMS सबमरीन प्लांट का दौरा किया।
जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस इस दौरे में राजनाथ सिंह के साथ मौजूद रहे।
राजनाथ सिंह ने TKMS की पनडुब्बी तकनीक को बेहद प्रभावशाली बताया और दौरे को काफी जानकारी देने वाला कहा।
बर्लिन में हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने रक्षा सह-उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और नौसेना सहयोग पर सहमति जताई।
भारत अपनी पनडुब्बी क्षमता और समुद्री रक्षा शक्ति मजबूत करने की दिशा में जर्मनी जैसे देशों से सहयोग बढ़ा रहा है।
भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के तहत आने वाले समय में नौसेना प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सह-निर्माण समझौतों की संभावनाएं और प्रबल हुई हैं।

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने आधिकारिक जर्मनी दौरे के दौरान कील शहर स्थित थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के विश्वस्तरीय सबमरीन निर्माण प्लांट का दौरा किया। यहां उन्हें अत्याधुनिक पनडुब्बी निर्माण तकनीकों और समुद्री युद्धक क्षमताओं की विस्तृत जानकारी दी गई। यह दौरा भारत-जर्मनी रक्षा साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सबमरीन यार्ड में क्या-क्या देखा राजनाथ सिंह ने

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने TKMS के कील सबमरीन यार्ड का गहन निरीक्षण किया। उन्हें पनडुब्बी के डिजाइन, इंजीनियरिंग और परिचालन तैनाती से जुड़ी तकनीकी बारीकियां समझाई गईं।

इस दौरान जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस भी उनके साथ मौजूद रहे। TKMS को दुनिया की सबसे उन्नत पारंपरिक पनडुब्बियां बनाने वाली कंपनियों में गिना जाता है।

राजनाथ सिंह ने भारत और जर्मनी के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ डॉकयार्ड में विस्तृत चर्चा की और कई तस्वीरें भी साझा कीं।

राजनाथ सिंह की प्रतिक्रिया

बुधवार, 22 अप्रैल को रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए इस दौरे को 'काफी जानकारी देने वाला' करार दिया। उन्होंने कहा कि यहां प्रदर्शित तकनीक और परिचालन क्षमता 'बेहद प्रभावशाली' है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस यात्रा से उन्हें आधुनिक पनडुब्बी निर्माण और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास को करीब से समझने का अवसर मिला, जो वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बर्लिन में बोरिस पिस्टोरियस से द्विपक्षीय वार्ता

सबमरीन प्लांट दौरे से पहले राजनाथ सिंह ने बर्लिन में जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस से औपचारिक द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग विस्तार और बदलती वैश्विक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर गहन चर्चा की।

बातचीत में नई तकनीकों में संयुक्त विकास, सह-उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे अहम मुद्दे शामिल रहे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों ने सैन्य सहयोग को अपनी रणनीतिक साझेदारी का अभिन्न अंग बनाने पर सहमति व्यक्त की।

भारत की नौसेना शक्ति विस्तार में जर्मनी की भूमिका

यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारत अपनी पनडुब्बी क्षमता और समुद्री रक्षा शक्ति को व्यापक रूप से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। जर्मनी जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देशों के साथ साझेदारी इसी रणनीति का हिस्सा है।

भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग के अंतर्गत तकनीकी साझेदारी, संयुक्त नौसेना अभ्यास और समुद्री सुरक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहे हैं। TKMS की पनडुब्बी तकनीक भारतीय नौसेना की भविष्य की जरूरतों के लिए अत्यंत प्रासंगिक मानी जाती है।

आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रक्षा उत्पादन में सह-निर्माण समझौतों और नौसेना प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की संभावनाएं और प्रबल होने की उम्मीद है, जो भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को नई गति देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति को नई धार भी देती है। भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग का यह नया अध्याय दोनों देशों की रणनीतिक निकटता को ठोस आकार दे रहा है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने जर्मनी में किस सबमरीन प्लांट का दौरा किया?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी के कील शहर में थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के सबमरीन निर्माण प्लांट का दौरा किया। यह सुविधा दुनिया की सबसे उन्नत पारंपरिक पनडुब्बियां बनाने के लिए जानी जाती है।
राजनाथ सिंह के जर्मनी दौरे में क्या हुआ?
राजनाथ सिंह ने बर्लिन में जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस से द्विपक्षीय वार्ता की और कील में TKMS सबमरीन प्लांट का निरीक्षण किया। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, सह-उत्पादन और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई।
TKMS सबमरीन प्लांट भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
TKMS विश्व की अग्रणी पनडुब्बी निर्माता कंपनी है और इसकी तकनीक भारतीय नौसेना की भविष्य की जरूरतों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। भारत अपनी पनडुब्बी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है और जर्मनी के साथ तकनीकी सहयोग इसमें सहायक हो सकता है।
भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग कैसा है?
भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है जिसमें तकनीकी साझेदारी, संयुक्त नौसेना अभ्यास और सह-उत्पादन शामिल हैं। दोनों देशों ने सैन्य सहयोग को अपनी रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा बनाने पर सहमति जताई है।
राजनाथ सिंह ने TKMS प्लांट के बारे में क्या कहा?
राजनाथ सिंह ने इस दौरे को काफी जानकारी देने वाला बताया और वहां प्रदर्शित तकनीक एवं परिचालन क्षमता को बेहद प्रभावशाली करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के दौरे दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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