22 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बॉम्बे हाई कोर्ट की विजय माल्या को चेतावनी: मनी लॉन्ड्रिंग सुनवाई के दौरान अदालती दस्तावेज एक्स पर न डालें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बॉम्बे हाई कोर्ट की विजय माल्या को चेतावनी: मनी लॉन्ड्रिंग सुनवाई के दौरान अदालती दस्तावेज एक्स पर न डालें

सारांश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को उस कदम पर फटकार लगाई जिसमें उन्होंने ईडी का अनदेखा हलफनामा सीधे एक्स पर डाल दिया। अदालत ने भारत न लौटने की उनकी दलील पर भी सवाल उठाए और 13 अक्टूबर को SBI, ईडी व सरकार के जवाब तलब किए।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को विजय माल्या को अदालती दस्तावेज सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने की चेतावनी दी।
ईडी ने आपत्ति जताई थी कि माल्या ने एजेंसी का हलफनामा अदालत द्वारा विचार किए बिना ही एक्स (X) पर अपलोड कर दिया।
अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को; SBI को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई को विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के आदेश।
अदालत ने माल्या की ब्रिटेन न छोड़ने की दलील को 'सर्वमान्य औचित्य' मानने से इनकार किया।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को भगोड़े व्यवसायी विजय माल्या को कड़ी चेतावनी दी कि वे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई के दौरान अदालती दस्तावेज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करने से बाज आएं। यह निर्देश ईडी की उस आपत्ति के बाद आया जिसमें माल्या पर अपने एक्स (X) खाते पर एजेंसी का हलफनामा — जिस पर अदालत ने अभी विचार भी नहीं किया था — अपलोड करने का आरोप लगाया गया था।

मामले का पृष्ठभूमि

ब्रिटेन में रह रहे विजय माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित किया गया है। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दायर कर रखी हैं — पहली, जिसमें उन्हें FEOA के तहत भगोड़ा घोषित करने को चुनौती दी गई है, और दूसरी, जिसमें उन्हें औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित करने वाले अदालती आदेश को चुनौती दी गई है। वकील आशीष मेहता ने अदालत को बताया कि ईडी ने माल्या के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा।

अदालत ने उठाए भारत वापसी पर सवाल

माल्या की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने सर्वोच्च न्यायालय के उन पूर्व निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें याचिकाकर्ताओं की अनुपस्थिति में भी रिट याचिकाओं की सुनवाई की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि माल्या ब्रिटेन की अदालतों के बाध्यकारी आदेशों के कारण देश छोड़ने में असमर्थ हैं और प्रत्यर्पण की कार्यवाही वहाँ चल रही है।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस दलील पर संदेह जताया। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि माल्या ब्रिटिश अदालती आदेशों का सहारा ले रहे हैं, जबकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन आदेशों को चुनौती दी गई है या नहीं। गौरतलब है कि माल्या ने फरवरी 2026 में भी हाई कोर्ट को बताया था कि वह भारत वापसी की कोई समयसीमा देने की स्थिति में नहीं हैं।

अदालत के ताज़ा निर्देश

हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 के लिए तय की है। अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को निर्देश दिया कि वह ईडी द्वारा किए गए खुलासों को ध्यान में रखते हुए एक नया हलफनामा दाखिल करे। इसके अतिरिक्त, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को माल्या के हलफनामे पर सरकार का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

अदालत ने अमित देसाई से यह भी कहा कि वे सुनवाई के दौरान दिए गए सभी बयानों को रिकॉर्ड पर रखते हुए एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करें, ताकि भारत सरकार उचित जवाब दे सके।

मामले का व्यापक संदर्भ

यह मामला उस वृहद कानूनी संघर्ष का हिस्सा है जो भारतीय बैंकों और जांच एजेंसियों ने विजय माल्या से हज़ारों करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली के लिए वर्षों से चला रखा है। माल्या 2016 से ब्रिटेन में हैं और तब से भारत वापस नहीं आए। उनका एक्स खाते पर अदालती दस्तावेज पोस्ट करना न केवल प्रक्रियागत आपत्तियों का विषय बना, बल्कि इसने न्यायिक शुचिता पर भी सवाल खड़े किए। यह ऐसे समय में आया है जब भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर कसते शिकंजे को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस तेज़ है।

आगे क्या होगा

13 अक्टूबर 2026 की सुनवाई में SBI का नया हलफनामा, ईडी की प्रतिक्रिया और देसाई का विस्तृत बयान अदालत के सामने आएगा। अदालत माल्या के भारत न लौट पाने की दलील की गहन समीक्षा करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले का परिणाम भगोड़े आर्थिक अपराधियों से जुड़े भावी मुकदमों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस रणनीति का हिस्सा लगता है जिसमें अदालत के बाहर जनमत को प्रभावित करने की कोशिश होती है — यह प्रवृत्ति हाई-प्रोफाइल आर्थिक मामलों में बढ़ती जा रही है। अदालत ने ब्रिटिश आदेशों की दलील को 'सर्वमान्य औचित्य' मानने से इनकार कर एक महत्वपूर्ण संकेत दिया है — कि दशक भर से चल रहे इस मामले में धैर्य की सीमाएं हैं। असली सवाल यह है कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया को लेकर ब्रिटेन और भारत के बीच कूटनीतिक व कानूनी समन्वय कितना प्रभावी है, जो अभी भी अस्पष्ट बना हुआ है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को क्या चेतावनी दी है?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई के दौरान अदालती दस्तावेज एक्स (पूर्व में ट्विटर) या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट न करने की चेतावनी दी है। यह निर्देश ईडी की उस शिकायत के बाद आया जिसमें माल्या पर एजेंसी का हलफनामा अदालत द्वारा विचार से पहले ही सार्वजनिक करने का आरोप लगाया गया।
विजय माल्या के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में कौन सी याचिकाएं चल रही हैं?
माल्या ने दो याचिकाएं दायर की हैं — एक में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित करने को चुनौती दी गई है, और दूसरी में उन्हें औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित करने वाले अदालती आदेश को चुनौती दी गई है।
माल्या भारत वापस क्यों नहीं आ रहे?
माल्या के वकील अमित देसाई के अनुसार, ब्रिटेन की अदालतों के बाध्यकारी आदेशों के कारण वे ब्रिटेन नहीं छोड़ सकते और वहाँ प्रत्यर्पण की कार्यवाही चल रही है। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस दलील पर संदेह जताया और कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि उन ब्रिटिश आदेशों को चुनौती दी गई है या नहीं।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को तय की गई है। उस तारीख तक SBI को ईडी के खुलासों को ध्यान में रखते हुए नया हलफनामा दाखिल करना है और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को माल्या के हलफनामे पर सरकार का जवाब पेश करना है।
SBI को इस मामले में क्यों शामिल किया गया है?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) उन प्रमुख बैंकों में से एक है जिन्होंने माल्या को भारी कर्ज दिया था और जो उस रकम की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। हाई कोर्ट ने SBI को ईडी के नए खुलासों के आलोक में अद्यतन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले