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रॉबर्ट वाड्रा मनी लॉन्ड्रिंग केस: ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर 25 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

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रॉबर्ट वाड्रा मनी लॉन्ड्रिंग केस: ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर 25 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

सारांश

रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर दिल्ली कोर्ट में सुनवाई हुई। ईडी ने लंदन की संपत्ति पर वाड्रा के पूर्ण नियंत्रण के सबूत पेश किए — ईमेल से लेकर रेनोवेशन बजट तक। अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी, जो इस बहुचर्चित मामले में एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ब्लैक मनी एक्ट से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर राऊज एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली में सुनवाई हुई।
अगली सुनवाई 25 जुलाई को निर्धारित; ईडी संज्ञान की माँग पर आगे की दलीलें रखेगी।
ईडी ने दावा किया कि लंदन के 12 ब्रायनस्टन स्क्वायर संपत्ति पर वाड्रा का वास्तविक और लाभकारी नियंत्रण था।
साक्ष्य में PMLA के तहत दर्ज बयान और ईमेल एक्सचेंज शामिल हैं, जो रेनोवेशन बजट पर वाड्रा की मंजूरी दर्शाते हैं।
ईडी ने वाड्रा के 'केवल सुझाव देने' के दावे को भ्रामक बताते हुए खारिज किया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा ब्लैक मनी एक्ट से जुड़े कथित धन शोधन मामले में कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के विरुद्ध दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर नई दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में 5 जुलाई 2025 को सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई के लिए निर्धारित की है, जब ईडी सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेने की अपनी माँग के समर्थन में आगे की दलीलें पेश करेगी।

अदालत में ईडी की मुख्य दलीलें

सुनवाई के दौरान ईडी ने अदालत को बताया कि इस मामले में पहले दाखिल मुख्य चार्जशीट पर अदालत पहले ही संज्ञान ले चुकी है। एजेंसी ने तर्क दिया कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट उसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए अलग से विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। ईडी ने यह भी सुझाव दिया कि अदालत चाहे तो इस चरण में रॉबर्ट वाड्रा को नोटिस जारी कर सकती है।

एजेंसी ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रावधानों के अनुसार अदालत अपराध (ऑफेंस) का संज्ञान लेती है, न कि आरोपी (ऑफेंडर) का — इसलिए मुख्य चार्जशीट पर संज्ञान के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट स्वाभाविक रूप से उसी दायरे में आती है।

लंदन संपत्ति और सबूतों का दावा

ईडी ने अदालत में दावा किया कि उसके पास इस मामले में पर्याप्त साक्ष्य हैं। इनमें धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज बयान और कई ईमेल एक्सचेंज शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि ये दस्तावेज़ यह साबित करते हैं कि लंदन के 12 ब्रायनस्टन स्क्वायर स्थित संपत्ति पर वास्तविक नियंत्रण पूरी तरह रॉबर्ट वाड्रा का था।

ईडी के अनुसार, कंपनियों के मालिकाना हक में बदलाव किए जाने के बावजूद इस संपत्ति का वास्तविक और लाभकारी नियंत्रण वाड्रा के पास ही बना रहा। एजेंसी का आरोप है कि अपराध से अर्जित धन को छिपाया गया और उसका उपयोग भी किया गया।

ईमेल एक्सचेंज से उठे सवाल

ईडी ने अदालत को बताया कि ईमेल एक्सचेंज से यह स्पष्ट होता है कि रॉबर्ट वाड्रा की मंजूरी के बिना उक्त संपत्ति में एक टाइल तक नहीं बदली जा सकती थी। रखरखाव से जुड़ी पूरी जानकारी उन्हें दी जाती थी, बजट की स्वीकृति भी उन्हीं से ली जाती थी और नवीनीकरण (रेनोवेशन) पर होने वाला खर्च भी वही वहन कर रहे थे।

एजेंसी ने वाड्रा के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि वह केवल रेनोवेशन को लेकर सुझाव दे रहे थे। जाँच के दौरान मिले दस्तावेज़ों के अनुसार, वह अपने एक सहयोगी के माध्यम से इस काम के लिए धन भी उपलब्ध करा रहे थे — जिससे ईडी ने उनके दावे को भ्रामक करार दिया।

आगे क्या होगा

25 जुलाई की सुनवाई में ईडी सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेने की माँग के पक्ष में अपनी शेष दलीलें रखेगी। यह मामला ब्लैक मनी एक्ट और PMLA दोनों के तहत दर्ज है, जो इसे कानूनी दृष्टि से जटिल बनाता है। गौरतलब है कि यह मामला कई वर्षों से अदालत में विचाराधीन है और अब सप्लीमेंट्री चार्जशीट के संज्ञान का प्रश्न एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान का सवाल अब एक कानूनी कसौटी बन गया है। ईडी की यह दलील — कि अपराध का संज्ञान एक बार लिए जाने के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर अलग प्रक्रिया अनावश्यक है — अगर अदालत मान लेती है, तो यह भविष्य के PMLA मामलों में एक महत्वपूर्ण नज़ीर बन सकती है। लंदन संपत्ति पर नियंत्रण के ईमेल-आधारित साक्ष्य मज़बूत दिखते हैं, लेकिन अदालत में उनकी स्वीकार्यता और वज़न अभी परखा जाना बाकी है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर राजनीतिक कोण पर केंद्रित रहती है — असली सवाल यह है कि PMLA के तहत 'लाभकारी स्वामित्व' की कानूनी परिभाषा इस मामले में कहाँ तक लागू होती है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रॉबर्ट वाड्रा का मनी लॉन्ड्रिंग मामला क्या है?
यह ब्लैक मनी एक्ट और PMLA के तहत दर्ज कथित धन शोधन का मामला है, जिसमें ईडी का आरोप है कि लंदन के 12 ब्रायनस्टन स्क्वायर स्थित संपत्ति पर रॉबर्ट वाड्रा का वास्तविक और लाभकारी नियंत्रण था। एजेंसी ने इस मामले में मुख्य चार्जशीट के बाद अब सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की है।
25 जुलाई की सुनवाई में क्या होगा?
25 जुलाई को राऊज एवेन्यू कोर्ट में ईडी सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेने की माँग के समर्थन में अपनी शेष दलीलें पेश करेगी। यह सुनवाई तय करेगी कि अदालत इस चार्जशीट पर संज्ञान लेगी या नहीं।
ईडी के पास वाड्रा के खिलाफ क्या सबूत हैं?
ईडी के अनुसार, उसके पास PMLA के तहत दर्ज बयान और ईमेल एक्सचेंज हैं जो दर्शाते हैं कि लंदन संपत्ति के रखरखाव, रेनोवेशन बजट और खर्च पर रॉबर्ट वाड्रा की मंजूरी ली जाती थी। एजेंसी का दावा है कि वाड्रा एक सहयोगी के माध्यम से इस काम के लिए धन भी उपलब्ध करा रहे थे।
ईडी ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर अलग सुनवाई का विरोध क्यों किया?
ईडी का तर्क है कि कानूनी प्रावधानों के तहत अदालत अपराध का संज्ञान लेती है, न कि आरोपी का। चूँकि मुख्य चार्जशीट पर पहले ही संज्ञान लिया जा चुका है, इसलिए सप्लीमेंट्री चार्जशीट उसी प्रक्रिया का हिस्सा है और अलग विस्तृत सुनवाई आवश्यक नहीं है।
वाड्रा ने लंदन संपत्ति के बारे में क्या कहा था?
रॉबर्ट वाड्रा ने दावा किया था कि वह उक्त संपत्ति के रेनोवेशन को लेकर केवल सुझाव दे रहे थे। ईडी ने इस दावे को भ्रामक बताते हुए खारिज किया है और कहा है कि जाँच में मिले दस्तावेज़ उनकी सक्रिय वित्तीय भूमिका को दर्शाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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