रॉबर्ट वाड्रा के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई समाप्त, राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

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रॉबर्ट वाड्रा के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई समाप्त, राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

सारांश

रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई समाप्त की। अब कोर्ट ने 15 अप्रैल तक फैसला सुरक्षित रखा है। यह मामला शिकोहपुर लैंड डील से संबंधित है, जिसमें ईडी ने चार्जशीट दाखिल की है। जानिए इस मामले की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • रॉबर्ट वाड्रा के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।
  • सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में पूरी हुई।
  • ईडी ने चार्जशीट दाखिल की है।
  • 15 अप्रैल को कोर्ट का फैसला सुनाया जाएगा।
  • 58 करोड़ रुपए की अपराध से हुई कमाई का मामला।

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। रॉबर्ट वाड्रा से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई समाप्त हो गई है और अब कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर लैंड डील से संबंधित है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाड्रा और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। कोर्ट अब यह तय करेगा कि इस चार्जशीट पर कार्रवाई की जाए या नहीं। इसके लिए 15 अप्रैल की तारीख निर्धारित की गई है।

यह मामला वास्तव में वर्ष 2008 का है, जब गुरुग्राम के शिकोहपुर क्षेत्र में लगभग 3.53 एकड़ भूमि का सौदा हुआ था। ईडी का आरोप है कि इस भूमि लेन-देन में मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अनियमितताएं हुईं। जांच एजेंसी के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने फरवरी 2008 में यह भूमि ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी।

ईडी का कहना है कि इस सौदे में कई तरह की गड़बड़ियां हुईं। एजेंसी के मुताबिक, कंपनी के पास उस समय इतनी पूंजी नहीं थी, फिर भी जमीन खरीदी गई। इतना ही नहीं, आरोप है कि इस डील में असली भुगतान नहीं किया गया और सेल डीड में गलत जानकारी दी गई। यहाँ तक कि एक ऐसे चेक का जिक्र भी किया गया जो कभी जारी ही नहीं हुआ या कैश नहीं हुआ।

जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि भूमि की कीमत को जानबूझकर कम दर्शाया गया, जिससे स्टाम्प ड्यूटी की चोरी की जा सके। ईडी ने इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 423 के तहत अपराध बताया है। अपनी शिकायत में ईडी ने कहा है कि इस पूरे मामले में लगभग 58 करोड़ रुपए की अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) सामने आई है।

इसी के तहत ईडी ने लगभग 38.69 करोड़ रुपए की 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच भी किया है। एजेंसी का कहना है कि ये प्रॉपर्टीज या तो सीधे तौर पर इस कथित गड़बड़ी से जुड़ी हैं या फिर इसके माध्यम से हासिल की गई हैं। इन संपत्तियों का स्वामित्व रॉबर्ट वाड्रा, उनकी कंपनियों जैसे आर्टेक्स, स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और अन्य संबंधित फर्मों के पास बताया जा रहा है।

हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने 2012 में इस लैंड डील में गड़बड़ियों का हवाला देते हुए इसे रद्द कर दिया था। हालांकि बाद में एक सरकारी पैनल ने वाड्रा और डीएलएफ को क्लीन चिट दे दी थी लेकिन हरियाणा में भाजपा सरकार आने के बाद इस मामले में फिर से जांच शुरू हुई और पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

Point of View

जो मनी लॉन्ड्रिंग और भूमि सौदों में गड़बड़ियों से संबंधित हैं। हालाँकि, कानूनी प्रक्रिया का पालन होना आवश्यक है, और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
NationPress
04/04/2026

Frequently Asked Questions

क्या रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ आरोप सही हैं?
प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि वाड्रा की कंपनी ने भूमि सौदों में अनियमितताएं की हैं, लेकिन यह अदालत पर निर्भर करता है कि वह इन आरोपों को कैसे देखता है।
कोर्ट ने निर्णय कब सुनाने का निर्णय लिया?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले के लिए 15 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है।
इस मामले में ईडी का क्या कहना है?
ईडी ने आरोप लगाया है कि मनी लॉन्ड्रिंग और गड़बड़ियों के चलते करीब 58 करोड़ रुपए की अपराध से हुई कमाई सामने आई है।
क्या इस मामले में कोई संपत्तियाँ अटैच की गई हैं?
हां, ईडी ने लगभग 38.69 करोड़ रुपए की 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
क्या वाड्रा को पहले भी क्लीन चिट मिली थी?
हां, 2012 में एक सरकारी पैनल ने वाड्रा को क्लीन चिट दी थी, लेकिन बाद में यह मामला फिर से जांच के दायरे में आया।
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