शिकोहपुर लैंड डील: दिल्ली हाईकोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा की याचिका पर सुनवाई 18 मई तक टाली, राहत नहीं

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शिकोहपुर लैंड डील: दिल्ली हाईकोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा की याचिका पर सुनवाई 18 मई तक टाली, राहत नहीं

सारांश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा को कोई तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। ईडी ने याचिका में 'झूठे बयान' का आरोप लगाया। अब 18 मई की सुनवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 14 मई 2026 को रॉबर्ट वाड्रा को शिकोहपुर लैंड डील मामले में कोई तत्काल राहत नहीं दी।
वाड्रा ने राऊज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें ईडी की शिकायत पर उन्हें और 8 अन्य को समन जारी किए गए थे।
ईडी का आरोप है कि फरवरी 2008 में 3.5 एकड़ जमीन ₹7.50 करोड़ में खरीदी गई, लेकिन कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ।
एजेंसी ने ₹58 करोड़ को अपराध की आय और ₹38.69 करोड़ मूल्य की 43 संपत्तियाँ कुर्क की हैं।
अगली सुनवाई 18 मई को जस्टिस मनोज जैन की पीठ के समक्ष निर्धारित है।

व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा को 14 मई 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय से कोई तत्काल राहत नहीं मिली। गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 2008 के एक जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी याचिका पर अदालत ने अगली सुनवाई 18 मई के लिए निर्धारित कर दी है। वाड्रा ने राऊज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत का संज्ञान लेते हुए उन्हें और आठ अन्य लोगों को समन जारी किया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी के अनुसार, वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' ने फरवरी 2008 में हरियाणा के शिकोहपुर गांव में लगभग 3.5 एकड़ जमीन 'ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज़ प्राइवेट लिमिटेड' से ₹7.50 करोड़ में खरीदी थी, जबकि कंपनी के पास उस समय सीमित पूंजी थी। जांच एजेंसी का दावा है कि कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ और बिक्री विलेख में एक ऐसे चेक का उल्लेख था जो कथित तौर पर कभी जारी या भुनाया नहीं गया।

ईडी ने अपनी अभियोजन शिकायत में ₹58 करोड़ को अपराध से प्राप्त आय के रूप में चिह्नित किया है और ₹38.69 करोड़ मूल्य की 43 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि बिक्री विलेख में जमीन का मूल्य कम दिखाने से स्टांप शुल्क की चोरी हुई, जो आईपीसी की धारा 423 के तहत अपराध है।

वाड्रा पक्ष की दलीलें

वाड्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत जिन अपराधों का आरोप है, उन्हें 2008 और 2012 के बीच कथित अपराध किए जाने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की अनुसूची में जोड़ा गया था। उनका तर्क था कि अधिकार क्षेत्र और प्रावधानों के पूर्वव्यापी अनुप्रयोग का मुद्दा ट्रायल कोर्ट के सामने उठाया गया था, किंतु उस पर विचार नहीं किया गया।

ईडी की प्रतिक्रिया

याचिका का विरोध करते हुए ईडी के वकील जोहेब हुसैन ने अदालत में कहा कि वाड्रा ने अपनी याचिका में झूठे और गलत बयान दिए हैं। हुसैन ने कहा, 'मैंने सभी मूल कानूनों को खंगालने का काम किया है। ये पूरी तरह से झूठी दलीलें हैं। पीएमएलए की अनुसूची में धारा 467 आईपीसी अपने मूल रूप में ही मौजूद थी।' उन्होंने माँग की कि इस याचिका को जुर्माने के साथ खारिज किया जाए।

न्यायालय का निर्देश

जस्टिस मनोज जैन की एकल-न्यायाधीश पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई 18 मई के लिए निर्धारित की। जस्टिस जैन ने वाड्रा के वकील से कहा, 'मिस्टर सिंघवी, कृपया सोमवार को इस पहलू पर पूरी तैयारी के साथ आएं, क्योंकि यही आपका मुख्य आधार है। हम सोमवार को आपकी बात सुनेंगे।'

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि 15 अप्रैल को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी की अभियोजन शिकायत का संज्ञान लेते हुए वाड्रा और आठ अन्य आरोपियों को 16 मई को अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था। दिल्ली उच्च न्यायालय से तत्काल राहत न मिलने के कारण वाड्रा को समन का पालन करते हुए ट्रायल कोर्ट के सामने उपस्थित होना होगा। 18 मई की सुनवाई में पूर्वव्यापी अनुप्रयोग के कानूनी प्रश्न पर अदालत का रुख स्पष्ट होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पीएमएलए के पूर्वव्यापी अनुप्रयोग की उस व्यापक कानूनी बहस का हिस्सा है जो देश की कई अदालतों में चल रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी का तर्क — कि अपराध किए जाने के बाद संबंधित धाराएँ पीएमएलए की अनुसूची में जोड़ी गईं — एक वैध संवैधानिक प्रश्न है जिसे सर्वोच्च न्यायालय भी विभिन्न संदर्भों में परख चुका है। दूसरी ओर, ईडी का 'झूठे बयान' वाला आक्रामक रुख यह संकेत देता है कि एजेंसी इस मुकदमे को केवल कानूनी नहीं, बल्कि सार्वजनिक विश्वसनीयता की लड़ाई के रूप में भी लड़ रही है। 18 मई की सुनवाई यह तय करेगी कि क्या उच्च न्यायालय ट्रायल प्रक्रिया में हस्तक्षेप करेगा — जो भविष्य के पीएमएलए मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिकोहपुर लैंड डील मामला क्या है?
यह 2008 का एक जमीन सौदा है जिसमें ईडी का आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' ने हरियाणा के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन ₹7.50 करोड़ में खरीदी, लेकिन कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ। ईडी ने ₹58 करोड़ को अपराध की आय बताते हुए 43 संपत्तियाँ कुर्क की हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा को राहत क्यों नहीं दी?
अदालत ने याचिका पर सुनवाई पूरी किए बिना कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया और मामले की अगली तारीख 18 मई निर्धारित की। जस्टिस मनोज जैन ने वाड्रा के वकील से पूर्वव्यापी अनुप्रयोग के मुख्य आधार पर पूरी तैयारी के साथ आने को कहा।
वाड्रा के वकील का मुख्य कानूनी तर्क क्या है?
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का तर्क है कि जिन अपराधों का आरोप है, वे 2008-2012 के बीच के हैं, जबकि संबंधित धाराएँ बाद में पीएमएलए की अनुसूची में जोड़ी गईं। उनका कहना है कि इन प्रावधानों का पूर्वव्यापी अनुप्रयोग कानूनी रूप से अमान्य है।
ईडी ने इस मामले में क्या-क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने ₹58 करोड़ को अपराध से प्राप्त आय घोषित किया है और ₹38.69 करोड़ मूल्य की 43 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 15 अप्रैल को ईडी की अभियोजन शिकायत का संज्ञान लेते हुए वाड्रा सहित नौ लोगों को समन जारी किए।
राष्ट्र प्रेस
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