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उत्तर प्रदेश विधान परिषद समितियों के भ्रमण कार्यक्रम स्थगित, ईंधन बचत अभियान का असर

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उत्तर प्रदेश विधान परिषद समितियों के भ्रमण कार्यक्रम स्थगित, ईंधन बचत अभियान का असर

सारांश

ईंधन बचत की मुहिम अब विधायिका तक पहुँची — उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने सभी समितियों के भ्रमण कार्यक्रम अगले आदेश तक स्थगित कर दिए हैं। वाहन बेड़ा 50% घटाने के बाद यह अगला बड़ा कदम है, और जिला अधिकारी अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठकों में शामिल होंगे।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय समितियों के सभी भ्रमण कार्यक्रम 14 मई 2025 से अगले आदेशों तक स्थगित।
सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने आधिकारिक निर्देश जारी किए; प्रमुख सचिव डॉ.
राजेश सिंह ने जानकारी दी।
समितियों की नियमित बैठकें और कार्यवाही पर कोई असर नहीं — केवल भ्रमण निलंबित।
जिला अधिकारी अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए समिति बैठकों में भाग लेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही सरकारी वाहन बेड़ा 50% घटाने का निर्णय ले चुके हैं।

उत्तर प्रदेश में ईंधन बचत और सरकारी खर्चों में कटौती की मुहिम के तहत उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय समितियों के सभी पूर्व निर्धारित भ्रमण कार्यक्रम 14 मई 2025 से अगले आदेशों तक स्थगित कर दिए गए हैं। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन संरक्षण और व्यय नियंत्रण के आह्वान के अनुपालन में लिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने समितियों के भ्रमण कार्यक्रमों को स्थगित करने के आधिकारिक निर्देश जारी किए। परिषद के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह ने स्पष्ट किया कि यह निलंबन अस्थायी है और परिस्थितियों के अनुसार आगामी आदेश जारी किए जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि इस निर्णय का प्रभाव केवल भ्रमण कार्यक्रमों तक सीमित रहेगा — समितियों की नियमित बैठकें और कार्यवाही पूर्ववत जारी रहेंगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रशासनिक निरंतरता

भ्रमण स्थगित होने के बावजूद प्रशासनिक कार्यों में बाधा न आए, इसके लिए जिला स्तर के अधिकारी अब संसदीय समितियों की बैठकों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लेंगे। इससे एक ओर अनावश्यक यात्रा और ईंधन की खपत में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर विधायी निगरानी की प्रक्रिया भी बाधित नहीं होगी।

योगी सरकार की व्यापक मितव्ययिता नीति

यह कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पहले से लागू मितव्ययिता उपायों की कड़ी में जुड़ा है। मुख्यमंत्री पहले ही स्वयं के, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिले तथा सरकारी वाहनों के बेड़े को 50 प्रतिशत तक घटाने का निर्णय ले चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने भी सभी मंत्रालयों और राज्यों को सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के निर्देश दिए हैं।

आम जनता और प्रशासन पर असर

सरकार की इस पहल को प्रशासनिक सादगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, आने वाले दिनों में अन्य विभागों और सरकारी संस्थाओं में भी इसी प्रकार के उपाय लागू किए जा सकते हैं।

क्या होगा आगे

अगले आदेश जारी होने तक भ्रमण कार्यक्रम निलंबित रहेंगे। प्रशासनिक आवश्यकताओं और परिस्थितियों के आधार पर सभापति कार्यालय नए दिशानिर्देश जारी करेगा। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग से यह पहल दीर्घकालिक कार्यशैली में बदलाव का संकेत भी दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग फील्ड निरीक्षण की जगह ले सकती है — विशेषकर उन समितियों के लिए जो ज़मीनी हकीकत जाँचने के लिए बनी हैं। मितव्ययिता के नाम पर विधायी निगरानी की गुणवत्ता से समझौता न हो, यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है। वाहन बेड़े में कटौती और भ्रमण निलंबन एक सुसंगत नीति दिशा दर्शाते हैं, पर इनके दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन तभी होगा जब स्पष्ट समयसीमा और समीक्षा तंत्र सामने आए।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के भ्रमण कार्यक्रम क्यों स्थगित किए गए?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन बचत और सरकारी खर्च में कटौती के आह्वान के अनुपालन में सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने संसदीय समितियों के सभी भ्रमण कार्यक्रम अगले आदेशों तक स्थगित कर दिए हैं। इसका उद्देश्य अनावश्यक यात्रा और ईंधन खपत को कम करना है।
क्या भ्रमण स्थगित होने से समितियों की बैठकें भी बंद हो जाएंगी?
नहीं। प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह के अनुसार केवल भ्रमण कार्यक्रम निलंबित हुए हैं — समितियों की नियमित बैठकें और कार्यवाही पूर्ववत जारी रहेंगी। जिला स्तर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठकों में भाग लेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईंधन बचत के लिए और क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं के, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिले तथा सरकारी वाहनों के बेड़े को 50 प्रतिशत तक कम करने का निर्णय पहले ही लिया है। विधान परिषद के भ्रमण स्थगन को इसी व्यापक मितव्ययिता नीति की अगली कड़ी माना जा रहा है।
भ्रमण कार्यक्रम कब तक स्थगित रहेंगे?
ये कार्यक्रम अगले आधिकारिक आदेश जारी होने तक स्थगित रहेंगे। सभापति कार्यालय प्रशासनिक आवश्यकताओं और परिस्थितियों के आधार पर नए दिशानिर्देश जारी करेगा; अभी कोई निश्चित तारीख नहीं दी गई है।
क्या अन्य सरकारी विभागों में भी ऐसे कदम उठाए जाएंगे?
रिपोर्टों के अनुसार आने वाले दिनों में अन्य विभागों और सरकारी संस्थाओं में भी इसी प्रकार के मितव्ययिता उपाय लागू किए जा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से पूरा करना है।
राष्ट्र प्रेस
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