सीईएल की 200 मेगावाट सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग लाइन राष्ट्र को समर्पित, स्वच्छ ऊर्जा में बड़ा कदम
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 14 मई 2026 को सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) की 200 मेगावाट क्षमता की सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग लाइन औपचारिक रूप से देश को समर्पित कर दी। यह सुविधा भारत के स्वदेशी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। भारत इस समय सौर, पवन, परमाणु और समुद्र-आधारित ऊर्जा प्रणालियों सहित कई गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षेत्रों में तेज़ी से अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा में नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका रहने वाली है। उन्होंने इस निर्माण सुविधा के शुभारंभ को देश के स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि करार दिया।
उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के लिए 24 अप्रैल 2025 को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया गया था। इसके बाद एक महीने के भीतर सफल बोलीदाता का चयन कर लिया गया और एक वर्ष से भी कम समय में यह मैन्युफैक्चरिंग सुविधा पूरी तरह चालू हो गई।
सीईएल की ऐतिहासिक यात्रा
डॉ. सिंह ने सीईएल के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत का पहला सोलर सेल 1977 में सीईएल ने ही निर्मित किया था और देश का पहला सोलर प्लांट 1979 में इसी संगठन ने स्थापित किया था।
मंत्री ने कहा कि सीईएल का सफर अत्यंत प्रेरणादायक रहा है — एक समय यह संस्था विनिवेश की कगार पर खड़ी थी, लेकिन आज यह एक लाभकारी मिनी रत्न कंपनी के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनके अनुसार यह परिवर्तन सुदृढ़ नेतृत्व, सरकारी नीतियों के समर्थन और संगठन के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों तथा कर्मचारियों की अथक मेहनत का परिणाम है।
नेट-जीरो लक्ष्य और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के लिए वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की पृष्ठभूमि में सीईएल की यह नई विनिर्माण क्षमता स्वदेशी सोलर मॉड्यूल उत्पादन को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करने में सहायक होगी। डॉ. सिंह ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और सतत विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।
सीईएल का भविष्य विस्तार
सीईएल अब कई नए भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है, जिनमें वर्टिकल एक्सिस विंड टर्बाइन, हाइब्रिड रिन्यूएबल सिस्टम, डेटा सेंटर, एडवांस डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और छोटे हथियार प्रणालियाँ शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि यह विविधीकरण भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक सोलर सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने के लिए नीतिगत स्तर पर कई कदम उठाए जा रहे हैं।