क्या भारत पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में बड़ा खिलाड़ी बनेगा?

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क्या भारत पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में बड़ा खिलाड़ी बनेगा?

सारांश

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पिछले 11 वर्षों में 6 गुना बढ़ा है। सेमीकंडक्टर संयंत्रों के साथ, भारत जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बन जाएगा। जानिए इस विषय में और क्या जानकारी है।

Key Takeaways

  • भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 6 गुना बढ़ा है।
  • एप्पल ने 2025 में 50 अरब डॉलर मूल्य के मोबाइल फोन भेजने की योजना बनाई है।
  • सेमीकंडक्टर संयंत्रों का व्यावसायिक उत्पादन इस वर्ष शुरू होगा।
  • डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम से 24 नए चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में रोजगार की संख्या 25 लाख है।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि भारत जल्द ही पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की दिशा में बढ़ रहा है। इसमें डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लीकेशन, मटेरियल और इक्विपमेंट शामिल हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किया कि एप्पल ने 2025 में भारत से 50 अरब डॉलर मूल्य के मोबाइल फोन भेजने का लक्ष्य रखा है। यह मेक इन इंडिया और हमारे उत्पादन केंद्रित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

वैष्णव ने आगे कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन पिछले 11 वर्षों में छह गुना बढ़ा है। इसके साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात आठ गुना बढ़ा है, जिससे यह देश के शीर्ष तीन निर्यातों में शामिल हो गया है।"

उन्होंने यह भी बताया कि 46 कंपोनेंट निर्माण परियोजनाएं और लैपटॉप, सर्वर, और ऑडियो उपकरण निर्माताओं के जुड़ने से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था का एक मुख्य चालक बन रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस वर्ष चार सेमीकंडक्टर संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में कुल रोजगार की संख्या 25 लाख है, जिनमें से कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में एक ही स्थान पर 5,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। कुछ यूनिट्स में तो एक ही स्थान पर 40,000 तक कर्मचारी कार्यरत हैं।

इससे पहले, केंद्र सरकार ने रविवार को डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (डीएलआई) के अंतर्गत भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत करने के लिए 24 नए चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी। ये प्रोजेक्ट्स वीडियो निगरानी, ड्रोन का पता लगाने, एनर्जी मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड, और आईओटी सिस्टम ऑन-चिप्स (एसओसी) जैसे क्षेत्रों में हैं।

सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन चिप निर्माण प्रक्रिया में सबसे अधिक मूल्य जोड़ने वाला हिस्सा है। यह आपूर्ति श्रृंखला में 50 प्रतिशत और फैबलेस सेगमेंट के माध्यम से वैश्विक सेमीकंडक्टर बिक्री में 30-35 प्रतिशत का योगदान देता है।

सरकारी बयान में कहा गया कि डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) समर्थित योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अब तक 16 टेप-आउट, 6 एएसआईसी चिप्स, 10 पेटेंट और 1,000 से अधिक इंजीनियर शामिल हो चुके हैं। साथ ही, निजी निवेश भी तीन गुना तक बढ़ा है।

Point of View

यह क्षेत्र न केवल रोजगार सृजन कर रहा है, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी भारत की स्थिति को मजबूत कर रहा है।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पिछले 11 वर्षों में कितना बढ़ा है?
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पिछले 11 वर्षों में 6 गुना बढ़ा है।
भारत में सेमीकंडक्टर संयंत्रों का क्या महत्व है?
सेमीकंडक्टर संयंत्रों का महत्व इस बात में है कि वे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और रोजगार सृजित करते हैं।
डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (डीएलआई) क्या है?
डीएलआई योजना भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत करने के लिए सरकारी प्रोत्साहन है।
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