रॉबर्ट वाड्रा को शिकोहपुर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत, बोले — 'निडर हूं, ईडी को झेलने की हिम्मत है'

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रॉबर्ट वाड्रा को शिकोहपुर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत, बोले — 'निडर हूं, ईडी को झेलने की हिम्मत है'

सारांश

शिकोहपुर जमीन सौदे के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा को राउज एवेन्यू कोर्ट से ₹50,000 के मुचलके पर जमानत मिली। कोर्ट के बाहर उन्होंने ईडी पर सरकारी इशारों पर चलने का आरोप लगाया, लेकिन न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया। अगली सुनवाई 10 जुलाई को।

मुख्य बातें

रॉबर्ट वाड्रा को 16 मई को शिकोहपुर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट से ₹50,000 के मुचलके पर जमानत मिली।
वाड्रा ने ईडी पर सरकारी इशारों पर काम करने का आरोप लगाया, न्यायपालिका पर भरोसा जताया।
ईडी के अनुसार, 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी' ने फरवरी 2008 में 3.5 एकड़ जमीन ₹7.50 करोड़ में खरीदी — कथित तौर पर बिना वास्तविक भुगतान के।
ईडी ने ₹58 करोड़ को अपराध की आय बताया है; 43 संपत्तियाँ ( ₹38.69 करोड़ ) अस्थायी रूप से कुर्क।
मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित।

बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा को शनिवार, 16 मई को शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली से ₹50,000 के मुचलके पर जमानत मिल गई। कोर्ट से बाहर निकलने के बाद वाड्रा ने मीडिया से कहा कि वे निडर हैं और उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है — बस प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को झेलना है।

कोर्ट में क्या हुआ

राउज एवेन्यू कोर्ट में वाड्रा के वकील ने दलील दी कि इस मामले में उन्हें पहले कभी गिरफ्तार नहीं किया गया, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए। अदालत ने यह दलील स्वीकार करते हुए ₹50,000 के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर कर ली। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की गई है।

वाड्रा का बयान — न्यायपालिका पर भरोसा, ईडी पर सवाल

जमानत मिलने के बाद वाड्रा ने कहा, 'मुझे इस देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। मुझे पता है कि ईडी को सरकार चला रही है और ईडी सरकार के इशारों पर ही काम करती रहेगी। इसलिए, ईडी की तरफ से यह रवैया सही नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा, 'मैं यहीं हूं, मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं हमेशा यहीं रहूंगा और सभी सवालों के जवाब दूंगा।'

वाड्रा ने राजनीतिक संदर्भ देते हुए कहा कि यदि उनका परिवार चुनाव जीत रहा है और लोगों का समर्थन बना हुआ है, तो स्वाभाविक है कि उन्हें इस तरह की कार्रवाइयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने जोड़ा, 'मुझमें इसका सामना करने की पूरी हिम्मत है। झेलने की क्षमता है, वह सबसे बड़ी चीज है।'

ईडी के आरोप — क्या है पूरा मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' ने फरवरी 2008 में हरियाणा के शिकोहपुर गांव में लगभग 3.5 एकड़ जमीन 'ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड' से ₹7.50 करोड़ में खरीदी थी, जबकि कथित तौर पर कंपनी के पास उस समय सीमित पूंजी थी।

जांच एजेंसी का दावा है कि इस सौदे में कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ और बिक्री विलेख (सेल डीड) में झूठे बयान दर्ज किए गए, जिसमें एक ऐसे चेक का उल्लेख भी था जो कथित तौर पर कभी जारी या भुनाया ही नहीं गया।

आर्थिक नुकसान और संपत्ति कुर्की

ईडी ने आगे आरोप लगाया है कि बिक्री विलेख में जमीन का मूल्य जानबूझकर कम दिखाया गया, जिससे स्टांप शुल्क की चोरी हुई — यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 423 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। अपनी अभियोजन शिकायत में ईडी ने ₹58 करोड़ को अपराध से प्राप्त आय के रूप में चिह्नित किया है और 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनका कुल मूल्य ₹38.69 करोड़ बताया गया है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी। वाड्रा ने स्पष्ट किया कि वे सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करेंगे और जांच में सहयोग जारी रखेंगे। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि वाड्रा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे मामले के ठोस आरोपों पर ध्यान नहीं हटता। ₹58 करोड़ की कथित अपराध-आय और 43 कुर्क संपत्तियाँ महज कागज़ी दावे नहीं हैं — ये अदालत में साबित या खारिज होने हैं। गौरतलब है कि यह मामला 2008 के सौदे से जुड़ा है, यानी डेढ़ दशक से अधिक समय बाद भी कानूनी निपटारा नहीं हुआ — जो खुद में जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया दोनों पर सवाल खड़े करता है। असली जवाबदेही 10 जुलाई की सुनवाई में नहीं, बल्कि इस बात में है कि क्या अभियोजन पक्ष अदालत में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत कर पाता है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रॉबर्ट वाड्रा को किस मामले में जमानत मिली है?
रॉबर्ट वाड्रा को शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 16 मई को राउज एवेन्यू कोर्ट से ₹50,000 के निजी मुचलके पर जमानत मिली है। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किया गया है।
शिकोहपुर जमीन सौदा मामला क्या है?
ईडी के आरोपों के अनुसार, वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' ने फरवरी 2008 में हरियाणा के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन ₹7.50 करोड़ में खरीदी, लेकिन कथित तौर पर कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ और बिक्री विलेख में झूठे बयान दर्ज किए गए। ईडी ने ₹58 करोड़ को अपराध से प्राप्त आय बताया है।
वाड्रा के मामले में ईडी ने कितनी संपत्तियाँ कुर्क की हैं?
ईडी ने इस मामले में 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनका कुल मूल्य ₹38.69 करोड़ बताया गया है। साथ ही ₹58 करोड़ को अपराध से अर्जित आय के रूप में चिह्नित किया गया है।
रॉबर्ट वाड्रा के मामले की अगली सुनवाई कब है?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की है। वाड्रा ने कहा है कि वे सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करेंगे और जांच में सहयोग जारी रखेंगे।
रॉबर्ट वाड्रा ने ईडी के बारे में क्या कहा?
वाड्रा ने आरोप लगाया कि ईडी सरकार के इशारों पर काम करती है और यह रवैया सही नहीं है। हालांकि, उन्होंने देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा जताया और कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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