रॉबर्ट वाड्रा को शिकोहपुर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत, बोले — 'निडर हूं, ईडी को झेलने की हिम्मत है'
सारांश
मुख्य बातें
बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा को शनिवार, 16 मई को शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली से ₹50,000 के मुचलके पर जमानत मिल गई। कोर्ट से बाहर निकलने के बाद वाड्रा ने मीडिया से कहा कि वे निडर हैं और उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है — बस प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को झेलना है।
कोर्ट में क्या हुआ
राउज एवेन्यू कोर्ट में वाड्रा के वकील ने दलील दी कि इस मामले में उन्हें पहले कभी गिरफ्तार नहीं किया गया, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए। अदालत ने यह दलील स्वीकार करते हुए ₹50,000 के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर कर ली। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की गई है।
वाड्रा का बयान — न्यायपालिका पर भरोसा, ईडी पर सवाल
जमानत मिलने के बाद वाड्रा ने कहा, 'मुझे इस देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। मुझे पता है कि ईडी को सरकार चला रही है और ईडी सरकार के इशारों पर ही काम करती रहेगी। इसलिए, ईडी की तरफ से यह रवैया सही नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा, 'मैं यहीं हूं, मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं हमेशा यहीं रहूंगा और सभी सवालों के जवाब दूंगा।'
वाड्रा ने राजनीतिक संदर्भ देते हुए कहा कि यदि उनका परिवार चुनाव जीत रहा है और लोगों का समर्थन बना हुआ है, तो स्वाभाविक है कि उन्हें इस तरह की कार्रवाइयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने जोड़ा, 'मुझमें इसका सामना करने की पूरी हिम्मत है। झेलने की क्षमता है, वह सबसे बड़ी चीज है।'
ईडी के आरोप — क्या है पूरा मामला
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' ने फरवरी 2008 में हरियाणा के शिकोहपुर गांव में लगभग 3.5 एकड़ जमीन 'ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड' से ₹7.50 करोड़ में खरीदी थी, जबकि कथित तौर पर कंपनी के पास उस समय सीमित पूंजी थी।
जांच एजेंसी का दावा है कि इस सौदे में कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ और बिक्री विलेख (सेल डीड) में झूठे बयान दर्ज किए गए, जिसमें एक ऐसे चेक का उल्लेख भी था जो कथित तौर पर कभी जारी या भुनाया ही नहीं गया।
आर्थिक नुकसान और संपत्ति कुर्की
ईडी ने आगे आरोप लगाया है कि बिक्री विलेख में जमीन का मूल्य जानबूझकर कम दिखाया गया, जिससे स्टांप शुल्क की चोरी हुई — यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 423 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। अपनी अभियोजन शिकायत में ईडी ने ₹58 करोड़ को अपराध से प्राप्त आय के रूप में चिह्नित किया है और 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनका कुल मूल्य ₹38.69 करोड़ बताया गया है।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी। वाड्रा ने स्पष्ट किया कि वे सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करेंगे और जांच में सहयोग जारी रखेंगे। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि वाड्रा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति हैं।