रॉबर्ट वाड्रा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अग्रिम जमानत, ₹50,000 के बॉन्ड पर रिहाई; 10 जुलाई को आरोप-बहस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रॉबर्ट वाड्रा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अग्रिम जमानत, ₹50,000 के बॉन्ड पर रिहाई; 10 जुलाई को आरोप-बहस

सारांश

दिल्ली की विशेष PMLA अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा को शिकोहपुर जमीन सौदे के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹50,000 बॉन्ड पर अग्रिम जमानत दे दी। ईडी ने ₹58 करोड़ की अपराध-आय और ₹38.69 करोड़ की 43 संपत्तियाँ कुर्क की हैं। आरोपों पर बहस 10 जुलाई को होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली की विशेष PMLA अदालत ने 16 मई 2026 को रॉबर्ट वाड्रा को अग्रिम जमानत प्रदान की।
जमानत ₹50,000 के बॉन्ड पर दी गई; आरोपों पर बहस 10 जुलाई 2026 को होगी।
ईडी ने ₹58 करोड़ को अपराध से अर्जित आय बताया और ₹38.69 करोड़ मूल्य की 43 संपत्तियाँ कुर्क की हैं।
मामला फरवरी 2008 में हरियाणा के शिकोहपुर गाँव में 3.5 एकड़ जमीन की ₹7.50 करोड़ में कथित खरीद से जुड़ा है।
अदालत ने ईडी को अगली सुनवाई पर जाँच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

दिल्ली की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत ने 16 मई 2026 को कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा को हरियाणा के शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने ₹50,000 के जमानत बॉन्ड पर वाड्रा को रिहा करने का आदेश दिया और मामले में आरोपों पर बहस के लिए 10 जुलाई की तारीख निर्धारित की।

अदालत का तर्क और कानूनी आधार

अपने आदेश में विशेष अदालत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, जब कोई आरोपी जाँच में सहयोग करे और अदालत की प्रक्रिया का पालन करे, तो उसकी स्वतंत्रता पर अनावश्यक प्रतिबंध उचित नहीं है। अदालत ने कहा, 'अदालत के समक्ष पेशी को स्वतः हिरासत के बराबर नहीं माना जा सकता है।'

न्यायाधीश चांगोत्रा ने यह भी रेखांकित किया कि जहाँ आरोपी को संज्ञान में आने से पूर्व गिरफ्तार नहीं किया गया और वे समन के जवाब में स्वयं पेश हुए, वहाँ उन्हें हिरासत में लेने का प्रश्न ही नहीं उठता। अदालत ने धारा 88 दंड प्रक्रिया संहिता और धारा 91 बीएनएसएस के तहत बॉन्ड जमा करने पर रिहाई का अनुरोध स्वीकार किया।

ईडी की जाँच और आरोपों का सार

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अभियोजन शिकायत के अनुसार, वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' ने फरवरी 2008 में हरियाणा के शिकोहपुर गाँव में लगभग 3.5 एकड़ जमीन 'ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड' से ₹7.50 करोड़ में खरीदी थी, जबकि कथित तौर पर कंपनी के पास सीमित पूँजी थी। जाँच एजेंसी का दावा है कि कोई वास्तविक भुगतान नहीं किया गया और बिक्री विलेख में एक ऐसे चेक का उल्लेख था जो कथित तौर पर कभी जारी या भुनाया ही नहीं गया।

ईडी ने आगे आरोप लगाया है कि बिक्री विलेख में जमीन का मूल्य जानबूझकर कम दर्शाया गया, जिससे स्टांप शुल्क की चोरी हुई — जो आईपीसी की धारा 423 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। एजेंसी ने अपनी शिकायत में ₹58 करोड़ को अपराध से अर्जित आय के रूप में चिह्नित किया है और ₹38.69 करोड़ मूल्य की 43 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं।

जाँच अधिकारी की सराहना

अदालत ने ईडी के जाँच अधिकारी की इस बात के लिए प्रशंसा की कि उन्होंने आरोपी की स्वतंत्रता का हनन किए बिना जाँच पूरी करने का प्रयास किया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा गिरफ्तारी के बिना शिकायत दर्ज करना इस बात का संकेत है कि जाँच अधिकारी ने विवेकपूर्ण निर्णय लिया। अदालत ने ईडी को अगली सुनवाई पर आगे की जाँच की स्थिति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

मामले में आरोप तय करने पर बहस 10 जुलाई 2026 को होगी, जो इस कानूनी प्रक्रिया का अगला निर्णायक चरण होगा। यह मामला उन कई कानूनी विवादों में से एक है जो वाड्रा से जुड़े जमीन सौदों को लेकर वर्षों से चले आ रहे हैं। गौरतलब है कि वाड्रा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति हैं, जो इस मामले को राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जाँच की आवश्यकता के आधार पर ही उचित माना जाता है — और ईडी ने स्वयं बिना गिरफ्तारी के शिकायत दर्ज कर इसे स्वीकार किया। असली सवाल यह है कि ₹58 करोड़ की कथित अपराध-आय और 43 कुर्क संपत्तियों के साथ, क्या अभियोजन पक्ष 10 जुलाई की सुनवाई में आरोप तय कराने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर पाएगा। यह मामला 2008 के एक जमीन सौदे की जाँच है जो डेढ़ दशक बाद भी अदालत में है — जो प्रवर्तन तंत्र की गति और प्राथमिकताओं पर स्वाभाविक प्रश्न उठाता है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रॉबर्ट वाड्रा को अग्रिम जमानत क्यों दी गई?
विशेष PMLA अदालत ने पाया कि वाड्रा जाँच में सहयोग करते रहे और समन पर स्वयं पेश हुए, इसलिए उनकी स्वतंत्रता पर प्रतिबंध उचित नहीं था। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के उस सिद्धांत का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि अदालत में पेशी को हिरासत के समान नहीं माना जा सकता।
शिकोहपुर जमीन सौदा मनी लॉन्ड्रिंग मामला क्या है?
ईडी के अनुसार, वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' ने फरवरी 2008 में हरियाणा के शिकोहपुर गाँव में 3.5 एकड़ जमीन ₹7.50 करोड़ में खरीदी, जबकि कथित तौर पर कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ। बिक्री विलेख में जमीन का मूल्य कम दर्शाने और स्टांप शुल्क चोरी का भी आरोप है।
ईडी ने इस मामले में कितनी संपत्ति कुर्क की है?
ईडी ने ₹38.69 करोड़ मूल्य की 43 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं और ₹58 करोड़ को अपराध से अर्जित आय के रूप में चिह्नित किया है।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
विशेष PMLA अदालत ने मामले में आरोपों पर बहस के लिए 10 जुलाई 2026 की तारीख तय की है। अदालत ने ईडी को उस तारीख तक जाँच की स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल करने का निर्देश दिया है।
क्या रॉबर्ट वाड्रा को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था?
नहीं, वाड्रा को इस मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया था। ईडी ने बिना गिरफ्तारी के शिकायत दर्ज की थी और वाड्रा समन पर स्वयं अदालत में पेश हुए, जिसे अदालत ने उनके सहयोग का प्रमाण माना।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 11 घंटे पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले