रॉबर्ट वाड्रा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अग्रिम जमानत, ₹50,000 के बॉन्ड पर रिहाई; 10 जुलाई को आरोप-बहस
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत ने 16 मई 2026 को कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा को हरियाणा के शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने ₹50,000 के जमानत बॉन्ड पर वाड्रा को रिहा करने का आदेश दिया और मामले में आरोपों पर बहस के लिए 10 जुलाई की तारीख निर्धारित की।
अदालत का तर्क और कानूनी आधार
अपने आदेश में विशेष अदालत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, जब कोई आरोपी जाँच में सहयोग करे और अदालत की प्रक्रिया का पालन करे, तो उसकी स्वतंत्रता पर अनावश्यक प्रतिबंध उचित नहीं है। अदालत ने कहा, 'अदालत के समक्ष पेशी को स्वतः हिरासत के बराबर नहीं माना जा सकता है।'
न्यायाधीश चांगोत्रा ने यह भी रेखांकित किया कि जहाँ आरोपी को संज्ञान में आने से पूर्व गिरफ्तार नहीं किया गया और वे समन के जवाब में स्वयं पेश हुए, वहाँ उन्हें हिरासत में लेने का प्रश्न ही नहीं उठता। अदालत ने धारा 88 दंड प्रक्रिया संहिता और धारा 91 बीएनएसएस के तहत बॉन्ड जमा करने पर रिहाई का अनुरोध स्वीकार किया।
ईडी की जाँच और आरोपों का सार
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अभियोजन शिकायत के अनुसार, वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' ने फरवरी 2008 में हरियाणा के शिकोहपुर गाँव में लगभग 3.5 एकड़ जमीन 'ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड' से ₹7.50 करोड़ में खरीदी थी, जबकि कथित तौर पर कंपनी के पास सीमित पूँजी थी। जाँच एजेंसी का दावा है कि कोई वास्तविक भुगतान नहीं किया गया और बिक्री विलेख में एक ऐसे चेक का उल्लेख था जो कथित तौर पर कभी जारी या भुनाया ही नहीं गया।
ईडी ने आगे आरोप लगाया है कि बिक्री विलेख में जमीन का मूल्य जानबूझकर कम दर्शाया गया, जिससे स्टांप शुल्क की चोरी हुई — जो आईपीसी की धारा 423 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। एजेंसी ने अपनी शिकायत में ₹58 करोड़ को अपराध से अर्जित आय के रूप में चिह्नित किया है और ₹38.69 करोड़ मूल्य की 43 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं।
जाँच अधिकारी की सराहना
अदालत ने ईडी के जाँच अधिकारी की इस बात के लिए प्रशंसा की कि उन्होंने आरोपी की स्वतंत्रता का हनन किए बिना जाँच पूरी करने का प्रयास किया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा गिरफ्तारी के बिना शिकायत दर्ज करना इस बात का संकेत है कि जाँच अधिकारी ने विवेकपूर्ण निर्णय लिया। अदालत ने ईडी को अगली सुनवाई पर आगे की जाँच की स्थिति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
मामले में आरोप तय करने पर बहस 10 जुलाई 2026 को होगी, जो इस कानूनी प्रक्रिया का अगला निर्णायक चरण होगा। यह मामला उन कई कानूनी विवादों में से एक है जो वाड्रा से जुड़े जमीन सौदों को लेकर वर्षों से चले आ रहे हैं। गौरतलब है कि वाड्रा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति हैं, जो इस मामले को राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील बनाता है।