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मुंबई स्पेशल PMLA कोर्ट का बड़ा फैसला: ₹22.40 करोड़ की जब्त संपत्ति असली हकदारों को लौटाने का आदेश

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मुंबई स्पेशल PMLA कोर्ट का बड़ा फैसला: ₹22.40 करोड़ की जब्त संपत्ति असली हकदारों को लौटाने का आदेश

सारांश

मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट ने ₹916 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में ₹22.40 करोड़ की अटैच संपत्तियाँ असली हकदारों को लौटाने का आदेश दिया। ED ने खुद रिहाई पर आपत्ति नहीं जताई — यह PMLA के पीड़ित-केंद्रित उद्देश्य की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।

मुख्य बातें

मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट ने 23 जुलाई 2026 को ₹22.40 करोड़ की अटैच अचल संपत्तियाँ असली हकदारों को लौटाने का आदेश दिया।
विनोद कुमार चतुर्वेदी और मनोज पाठक पर अशर एग्रो लिमिटेड के ज़रिए बैंक कंसोर्टियम के साथ कथित तौर पर ₹916 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।
ED ने 2021 में संपत्तियाँ अटैच की थीं; एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने बाद में अटैचमेंट की पुष्टि की।
NCLT मुंबई में अशर इको पावर लिमिटेड की CIRP विफल होने के बाद लिक्विडेशन कार्यवाही शुरू हुई, जिसके बाद लिक्विडेटर ने कोर्ट का रुख किया।
ED ने संपत्ति रिहाई पर कोई आपत्ति नहीं जताई, जिसे अदालत ने PMLA के पीड़ित-राहत उद्देश्य के अनुरूप माना।

मुंबई की स्पेशल प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) कोर्ट ने 23 जुलाई 2026 को एक अहम फैसले में ₹22.40 करोड़ की अटैच अचल संपत्तियों को उनके असली हकदारों को वापस लौटाने का निर्देश दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्वयं कोर्ट को बताया कि उसे इन संपत्तियों की रिहाई पर कोई आपत्ति नहीं है, जिसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने यह आदेश पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

ED के मुंबई जोनल ऑफिस ने विनोद कुमार चतुर्वेदी, मनोज पाठक और अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की थी। जाँच में सामने आया कि अशर एग्रो लिमिटेड के मालिकाना हक और नियंत्रण पर चतुर्वेदी और पाठक का कब्जा था। आरोपों के अनुसार, उन्होंने बैंकों के एक कंसोर्टियम के साथ कथित तौर पर लगभग ₹916 करोड़ की धोखाधड़ी की।

जाँचकर्ताओं के अनुसार, प्रमोटरों ने शेल कंपनियों के नेटवर्क और संबद्ध समूह की कंपनियों का उपयोग करते हुए लोन की राशि को व्यवस्थित तरीके से डायवर्ट किया। इस आधार पर ED ने 2021 में ₹22.40 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था, जिसे बाद में PMLA के तहत एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भी पुष्ट किया।

इन्सॉल्वेंसी कार्यवाही और लिक्विडेटर की भूमिका

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई ने अशर इको पावर लिमिटेड के विरुद्ध कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) आरंभ की। रिज़ॉल्यूशन प्रक्रिया विफल होने के बाद लिक्विडेशन की कार्यवाही शुरू हुई।

इसके पश्चात लिक्विडेटर ने अटैच संपत्तियों की वापसी के लिए स्पेशल PMLA कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह ऐसे समय में आया जब ED भी इन संपत्तियों को अपराध की कमाई मानते हुए स्थायी जब्ती की माँग कर चुका था।

ED का रुख और कोर्ट का आदेश

ED ने कोर्ट के समक्ष स्पष्ट किया कि PMLA का मूल उद्देश्य अपराध से प्रभावित वास्तविक पीड़ितों को राहत दिलाना है। इसी को ध्यान में रखते हुए एजेंसी ने संपत्तियों की रिहाई पर आपत्ति न जताने का निर्णय लिया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने ED की दलीलों को स्वीकार करते हुए 23 जुलाई 2026 को आदेश पारित किया कि अटैच की गई अचल संपत्तियाँ असली हकदारों को वापस की जाएँ। ED के अनुसार, यह कदम उसकी उन व्यापक कोशिशों का हिस्सा है, जिनका लक्ष्य वित्तीय धोखाधड़ी से पीड़ित लोगों तक न्याय पहुँचाना है।

आम जनता और पीड़ितों पर असर

गौरतलब है कि यह मामला बैंक कंसोर्टियम की ₹916 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें बड़ी संख्या में लेनदार और वित्तीय संस्थाएँ प्रभावित हुई हैं। संपत्तियों की वापसी का आदेश उन हकदारों के लिए राहत का संकेत है, जो लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे।

यह फैसला इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि इसमें ED, NCLT और स्पेशल PMLA कोर्ट — तीनों न्यायिक और नियामक मंचों की समन्वित भूमिका दिखती है। आगे की कार्यवाही में लिक्विडेशन प्रक्रिया के तहत संपत्तियों का वास्तविक हस्तांतरण सुनिश्चित किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है — जब ED खुद अटैचमेंट छोड़ने को तैयार हो, तो वर्षों तक संपत्ति जब्त रखने की जरूरत क्या थी? ₹916 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मुकाबले ₹22.40 करोड़ की वापसी एक सीमित राहत है, और मुख्य आरोपियों के विरुद्ध अभियोजन की गति पर कोई स्पष्टता नहीं है। PMLA की ताकत तभी सार्थक है जब वह पीड़ितों तक समय पर न्याय पहुँचाए — वर्षों की कानूनी उलझन के बाद नहीं।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई PMLA कोर्ट ने ₹22.40 करोड़ की संपत्ति वापस करने का आदेश क्यों दिया?
स्पेशल PMLA कोर्ट ने यह आदेश इसलिए दिया क्योंकि ED ने स्वयं संपत्तियों की रिहाई पर कोई आपत्ति नहीं जताई और PMLA का उद्देश्य अपराध से प्रभावित असली हकदारों को राहत दिलाना है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 23 जुलाई 2026 को यह आदेश पारित किया।
अशर एग्रो लिमिटेड मामला क्या है?
अशर एग्रो लिमिटेड के प्रमोटर विनोद कुमार चतुर्वेदी और मनोज पाठक पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों के एक कंसोर्टियम के साथ कथित तौर पर ₹916 करोड़ की धोखाधड़ी की। उन्होंने शेल कंपनियों और संबद्ध समूह की कंपनियों के जरिए लोन की राशि डायवर्ट की, जिसके बाद ED ने 2021 में ₹22.40 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच कीं।
NCLT और इस PMLA मामले का क्या संबंध है?
NCLT मुंबई ने अशर इको पावर लिमिटेड के विरुद्ध CIRP शुरू की थी, जो विफल होने के बाद लिक्विडेशन में बदल गई। लिक्विडेटर ने अटैच संपत्तियों की वापसी के लिए स्पेशल PMLA कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद यह आदेश आया।
PMLA के तहत जब्त संपत्ति असली हकदारों को कैसे वापस मिलती है?
PMLA का उद्देश्य अपराध से हुई कमाई को वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार वास्तविक पीड़ितों तक पहुँचाना है। जब ED को संतोष हो कि संपत्ति किसी हकदार की है और उसे जब्त रखना उचित नहीं, तो वह कोर्ट को रिहाई पर आपत्ति न होने की जानकारी देता है और कोर्ट आदेश पारित करती है।
क्या इस मामले में मुख्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा जारी है?
हाँ, ED ने मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट में विनोद कुमार चतुर्वेदी, मनोज पाठक और अन्य के विरुद्ध प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। संपत्तियों की वापसी का आदेश अभियोजन कार्यवाही को प्रभावित नहीं करता।
राष्ट्र प्रेस
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