साई ग्रुप पर ₹43.73 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने 10 आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए कोर्ट में शिकायत दायर की
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 31 जुलाई 2026 को मुंबई की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में साई ग्रुप और उसके प्रमोटरों के विरुद्ध ₹43.73 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी औपचारिक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। इस मामले में जयेश विनोद तन्ना, दीप विनोद तन्ना, विवेक जयेश तन्ना और साई ग्रुप की सात अन्य कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच 2024 में मुंबई पुलिस द्वारा जयेश विनोद तन्ना, दीप विनोद तन्ना और अन्य के खिलाफ दर्ज 17 प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। इन एफआईआर में भारतीय दंड संहिता और महाराष्ट्र ओनरशिप फ्लैट्स एक्ट, 1963 की विभिन्न धाराएं लगाई गई थीं। अब तक मुंबई पुलिस इन 17 में से 14 मामलों में चार्जशीट दायर कर चुकी है।
यह शिकायत प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 3 और धारा 70 के तहत दर्ज अपराध से संबंधित है, जिसके लिए धारा 4 में दंड का प्रावधान है। पीएमएलए स्पेशल कोर्ट ने संज्ञान लेने से पूर्व सभी आरोपियों को प्री-कॉग्निजेंस नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
किस तरह हुई ठगी
ईडी की जांच के अनुसार, साई ग्रुप के प्रमोटरों ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के डीएन नगर, अंधेरी, कांदिवली और गोरेगांव में प्रस्तावित रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए फ्लैट और दुकान खरीदारों से एकत्र धनराशि को निजी लाभ के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया। इस कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं।
जांच में यह भी सामने आया कि प्रमोटरों ने खरीदारों का पैसा अन्य प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट किया और कुछ राशि विदेश भेजी गई। इस धन को वैध दिखाने के लिए विभिन्न कंपनियों के माध्यम से लेन-देन किया गया। इससे फ्लैट खरीदारों, पुराने किरायेदारों (सोसायटी के मूल सदस्यों) और निवेशकों को कुल ₹43.73 करोड़ का नुकसान हुआ।
संपत्तियों की कुर्की
ईडी पहले ही पीएमएलए की धारा 5 के तहत ₹43.73 करोड़ मूल्य की संपत्तियाँ अटैच कर चुकी है। अटैच की गई संपत्तियों में मुंबई और महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित अचल संपत्तियाँ शामिल हैं। इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम में स्थित एक अचल संपत्ति को भी कुर्क किया गया है — जो इस मामले को अंतरराष्ट्रीय आयाम देता है।
कोर्ट में साक्ष्य
ईडी ने अपनी कंप्लेंट में दस्तावेजी सबूत, बैंक लेन-देन के विवरण और गवाहों के बयान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। अब कोर्ट संज्ञान लेने से पहले सभी आरोपियों से जवाब माँगेगी।
आगे क्या होगा
पीएमएलए स्पेशल कोर्ट के नोटिस के बाद आरोपियों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। यह मामला मुंबई के रीयल एस्टेट क्षेत्र में फ्लैट खरीदारों की सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानूनों की प्रभावशीलता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।