ईडी छापेमारी के खिलाफ पंजाब सरकार हाईकोर्ट पहुँची, वारंट ऑफिसर आज दोपहर 2 बजे देंगे रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब सरकार ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) और राज्य के अन्य ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चल रही छापेमारी को चुनौती देते हुए 24 सितंबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। अदालत ने इन अभियानों की निगरानी के लिए एक वरिष्ठ वारंट ऑफिसर नियुक्त किया है, जिन्हें गुरुवार दोपहर 2 बजे तक स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी है।
मामला कोर्ट तक कैसे पहुँचा
यह मामला बुधवार देर रात जस्टिस संजय वशिष्ठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए आया और कार्यवाही गुरुवार सुबह तक चली। अदालत को बताया गया कि ED की तलाशी और जब्ती अभियान जारी था तथा कथित तौर पर कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को हिरासत में लिया गया था। राज्य सरकार ने दलील दी कि इस कार्रवाई से सरकारी कामकाज ठप हो गया है।
कोर्ट ने नियुक्त वारंट ऑफिसर को किसी भी समय छापेमारी वाले स्थानों पर जाने का अधिकार दिया। साथ ही चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक और मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को वारंट ऑफिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
ED की छापेमारी का दायरा और आरोप
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह कार्रवाई मंगलवार को मोहाली स्थित GMADA मुख्यालय से शुरू हुई और पंजाब, चंडीगढ़, पंचकूला तथा दिल्ली तक फैल गई। एजेंसी जमीन अधिग्रहण, भू उपयोग परिवर्तन और निजी रियल एस्टेट कंपनियों को दी गई वित्तीय रियायतों में कथित अनियमितताओं की जाँच कर रही है।
ED ने आरोप लगाया है कि निजी कंपनियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुँचाने और सरकारी खज़ाने को हुआ नुकसान ₹100 करोड़ से अधिक हो सकता है। छापेमारी में तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के ठिकाने भी शामिल हैं। एजेंसी GMADA द्वारा अधिग्रहित भूमि, भू उपयोग परिवर्तन और अथॉरिटी को देय बकाया राशि से संबंधित दस्तावेज़ों की पड़ताल कर रही है।
AAP बनाम केंद्र: राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप
आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार पर पंजाब के अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। हालाँकि अदालत ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है। AAP का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पंजाब में राजनीतिक आधार खो चुकी है और अब केंद्रीय एजेंसियों के ज़रिए दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि GMADA के कामकाज में रुकावट डालकर भगवंत मान सरकार की कल्याणकारी योजनाओं — जैसे 'मावां धीयां सत्कार योजना' — को बाधित करने का प्रयास हो रहा है। AAP के बयान में कहा गया, "भाजपा राजनीतिक तरीकों से कल्याणकारी योजनाओं को रोकने में नाकाम रही है, इसलिए अब प्रशासनिक दबाव और बाधाएं पैदा करने की कोशिश की जा रही है। पंजाब की जनता इन हथकंडों को कामयाब नहीं होने देगी।"
AAP ने यह भी कहा कि अरविंद केजरीवाल के चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर किए गए खुलासों ने केंद्र को और परेशान किया है। गौरतलब है कि कोर्ट ने इस राजनीतिक विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
आगे क्या होगा
नियुक्त वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की सुनवाई में ED की कार्रवाई की वैधता पर विचार कर सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष शासित राज्यों और केंद्रीय जाँच एजेंसियों के बीच टकराव की घटनाएँ पूरे देश में बढ़ रही हैं। पंजाब में GMADA से जुड़े रियल एस्टेट मामले की अगली सुनवाई और वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट पर अदालत का रुख यह तय करेगा कि ED की जाँच किस दिशा में आगे बढ़ती है।