24 सितंबर 2026
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ईडी छापेमारी के खिलाफ पंजाब सरकार हाईकोर्ट पहुँची, वारंट ऑफिसर आज दोपहर 2 बजे देंगे रिपोर्ट

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ईडी छापेमारी के खिलाफ पंजाब सरकार हाईकोर्ट पहुँची, वारंट ऑफिसर आज दोपहर 2 बजे देंगे रिपोर्ट

सारांश

GMADA पर ED की छापेमारी ने पंजाब सरकार और केंद्र के बीच टकराव को अदालत तक पहुँचा दिया है। हाईकोर्ट के वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट और ₹100 करोड़ से अधिक के कथित नुकसान के आरोपों के बीच यह मामला केंद्र राज्य संघर्ष का नया मोर्चा बन गया है।

मुख्य बातें

पंजाब सरकार ने GMADA व अन्य जगहों पर ED की छापेमारी को चुनौती देते हुए 24 सितंबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने जस्टिस संजय वशिष्ठ की पीठ में एक वरिष्ठ वारंट ऑफिसर नियुक्त किया, जो गुरुवार दोपहर 2 बजे स्टेटस रिपोर्ट सौंपेंगे।
ED की कार्रवाई PMLA के तहत मोहाली से शुरू होकर चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली तक फैली; कथित नुकसान ₹100 करोड़ से अधिक बताया गया।
छापेमारी में तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और संबद्ध कंपनियाँ भी शामिल हैं।
आम आदमी पार्टी ने BJP पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया; हाईकोर्ट ने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की।
कथित तौर पर कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को हिरासत में लिया गया; राज्य सरकार ने सरकारी कामकाज ठप होने की दलील दी।

पंजाब सरकार ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) और राज्य के अन्य ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चल रही छापेमारी को चुनौती देते हुए 24 सितंबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। अदालत ने इन अभियानों की निगरानी के लिए एक वरिष्ठ वारंट ऑफिसर नियुक्त किया है, जिन्हें गुरुवार दोपहर 2 बजे तक स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी है।

मामला कोर्ट तक कैसे पहुँचा

यह मामला बुधवार देर रात जस्टिस संजय वशिष्ठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए आया और कार्यवाही गुरुवार सुबह तक चली। अदालत को बताया गया कि ED की तलाशी और जब्ती अभियान जारी था तथा कथित तौर पर कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को हिरासत में लिया गया था। राज्य सरकार ने दलील दी कि इस कार्रवाई से सरकारी कामकाज ठप हो गया है।

कोर्ट ने नियुक्त वारंट ऑफिसर को किसी भी समय छापेमारी वाले स्थानों पर जाने का अधिकार दिया। साथ ही चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक और मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को वारंट ऑफिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

ED की छापेमारी का दायरा और आरोप

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह कार्रवाई मंगलवार को मोहाली स्थित GMADA मुख्यालय से शुरू हुई और पंजाब, चंडीगढ़, पंचकूला तथा दिल्ली तक फैल गई। एजेंसी जमीन अधिग्रहण, भू उपयोग परिवर्तन और निजी रियल एस्टेट कंपनियों को दी गई वित्तीय रियायतों में कथित अनियमितताओं की जाँच कर रही है।

ED ने आरोप लगाया है कि निजी कंपनियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुँचाने और सरकारी खज़ाने को हुआ नुकसान ₹100 करोड़ से अधिक हो सकता है। छापेमारी में तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के ठिकाने भी शामिल हैं। एजेंसी GMADA द्वारा अधिग्रहित भूमि, भू उपयोग परिवर्तन और अथॉरिटी को देय बकाया राशि से संबंधित दस्तावेज़ों की पड़ताल कर रही है।

AAP बनाम केंद्र: राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप

आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार पर पंजाब के अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। हालाँकि अदालत ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है। AAP का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पंजाब में राजनीतिक आधार खो चुकी है और अब केंद्रीय एजेंसियों के ज़रिए दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि GMADA के कामकाज में रुकावट डालकर भगवंत मान सरकार की कल्याणकारी योजनाओं — जैसे 'मावां धीयां सत्कार योजना' — को बाधित करने का प्रयास हो रहा है। AAP के बयान में कहा गया, "भाजपा राजनीतिक तरीकों से कल्याणकारी योजनाओं को रोकने में नाकाम रही है, इसलिए अब प्रशासनिक दबाव और बाधाएं पैदा करने की कोशिश की जा रही है। पंजाब की जनता इन हथकंडों को कामयाब नहीं होने देगी।"

AAP ने यह भी कहा कि अरविंद केजरीवाल के चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर किए गए खुलासों ने केंद्र को और परेशान किया है। गौरतलब है कि कोर्ट ने इस राजनीतिक विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

आगे क्या होगा

नियुक्त वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की सुनवाई में ED की कार्रवाई की वैधता पर विचार कर सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष शासित राज्यों और केंद्रीय जाँच एजेंसियों के बीच टकराव की घटनाएँ पूरे देश में बढ़ रही हैं। पंजाब में GMADA से जुड़े रियल एस्टेट मामले की अगली सुनवाई और वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट पर अदालत का रुख यह तय करेगा कि ED की जाँच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और पंजाब सरकार का हाईकोर्ट जाना इसी की प्रतिक्रिया है। असली सवाल यह है कि ₹100 करोड़ के कथित नुकसान के आरोप कितने ठोस साक्ष्यों पर आधारित हैं — क्योंकि अगर मामला कमज़ोर निकला तो यह एजेंसी की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाएगा। वारंट ऑफिसर की रिपोर्ट और उसके बाद अदालत का रुख यह तय करेगा कि न्यायपालिका इस केंद्र राज्य तनाव में किस हद तक हस्तक्षेप करने को तैयार है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट का रुख क्यों किया?
पंजाब सरकार ने GMADA और राज्य के अन्य ठिकानों पर ED की PMLA के तहत चल रही छापेमारी को चुनौती देने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सरकार ने तर्क दिया कि इस कार्रवाई से सरकारी कामकाज ठप हो गया है और कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों को हिरासत में लिया गया।
हाईकोर्ट का वारंट ऑफिसर क्या करेगा?
हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त वरिष्ठ वारंट ऑफिसर को किसी भी समय छापेमारी वाले स्थानों पर जाने और स्थिति की निगरानी करने का अधिकार दिया गया है। उन्हें गुरुवार दोपहर 2 बजे तक अदालत में स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी है, जिसके आधार पर आगे की सुनवाई होगी।
ED की छापेमारी में किन पर आरोप हैं?
ED PMLA के तहत GMADA में जमीन अधिग्रहण, भू उपयोग परिवर्तन और निजी रियल एस्टेट कंपनियों को दी गई वित्तीय रियायतों में कथित अनियमितताओं की जाँच कर रही है। आरोप है कि सरकारी खज़ाने को ₹100 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ और तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य कंपनियाँ इसमें शामिल हो सकती हैं।
AAP ने इस छापेमारी पर क्या कहा?
आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर पंजाब के अधिकारियों पर दबाव बनाने और भगवंत मान सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को बाधित करने के लिए जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। हालाँकि हाईकोर्ट ने इन राजनीतिक आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
छापेमारी की कार्रवाई कहाँ कहाँ हुई?
ED की छापेमारी मंगलवार को मोहाली स्थित GMADA मुख्यालय से शुरू हुई और पंजाब, चंडीगढ़, पंचकूला तथा दिल्ली में कई अन्य स्थानों तक फैल गई। इसमें तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के परिसर भी शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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