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दिव्या दत्ता: मैं अपनी शर्तों पर जीती हूं, सिंगल रहना मेरा चुनाव

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दिव्या दत्ता: मैं अपनी शर्तों पर जीती हूं, सिंगल रहना मेरा चुनाव

सारांश

अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने सिंगल रहने और समाज की पितृसत्तात्मक सोच पर बेबाकी से अपने विचार साझा किए। जानें, उन्होंने क्या कहा।

मुख्य बातें

सिंगल रहना कोई कमी नहीं है।
हर इंसान की कहानी अलग है।
पितृसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाना जरूरी है।
दूसरों की जिंदगी के फैसलों पर राय बनाना गलत है।
फैसलों पर गर्व करना चाहिए।

मुंबई, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेत्री दिव्या दत्ता जितने प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर हर किरदार को निभाती हैं, वास्तविक जीवन में भी उनकी सच्चाई और बेबाकी के लिए उन्हें जाना जाता है। हाल ही में, दिव्या ने समाज की पुरानी और पितृसत्तात्मक सोच पर खुलकर अपनी बात रखी।

राष्ट्र प्रेस के साथ खास बातचीत में दिव्या ने सिंगल रहने, शादी और मातृत्व को लेकर समाज की अपेक्षाओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी की जिंदगी को एक ही तराजू में नहीं तोला जा सकता और हर किसी की कहानी अलग होती है।

जब दिव्या से पूछा गया कि आज के समय में सिंगल रहना कितना चुनौतीपूर्ण है और क्या समाज अब भी मानता है कि कोई महिला शादी या बच्चे होने से ही 'पूरी' होती है, तो उन्होंने उत्तर दिया, "चाहे मेरे पास पार्टनर हो या मैं सिंगल हूं, मैं अपनी जिंदगी का आनंद लेती हूं और यही सबसे महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि हर इंसान की कहानी अलग होती है। यह सोच बनाना कि पार्टनर होना अच्छा है या सिंगल रहना, यह किसी के लिए भी सही नहीं। जो आपके लिए सही है, वही सबसे बेहतर है। मेरे लिए यही सही है और मैं इससे खुश हूं।"

उन्होंने आगे कहा, "मेरा स्पष्ट मानना है कि दूसरों की जिंदगी के फैसलों पर राय नहीं बनानी चाहिए। अगर किसी को अच्छा पार्टनर मिल गया, तो उनके लिए सही है। अगर नहीं मिला, तो उन्हें जो सही लगे, वही करना चाहिए। आप किसी की जिंदगी को एक ही तराजू में नहीं तोल सकते। मेरी जिंदगी ऐसी ही रही है और मैं इसका मजा लेती हूं। इसलिए जो भी फैसले मैंने लिए, उन पर मुझे गर्व है।"

समाज में आज भी मौजूद पितृसत्तात्मक सोच पर बात करते हुए दिव्या ने कहा, "हालांकि तरक्की के बावजूद ये पुरानी सोच बनी हुई है। शिक्षा का इससे कोई लेना-देना नहीं है, यह बस एक सोच है। हर इंसान का सफर अलग होता है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए, न कि तुलना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिव्या दत्ता ने शादी और सिंगल रहने के बारे में क्या कहा?
दिव्या ने कहा कि सिंगल रहने का मतलब यह नहीं है कि आप अधूरे हैं, हर किसी की कहानी अलग होती है।
क्या दिव्या दत्ता ने पितृसत्तात्मक सोच पर कुछ कहा?
हां, उन्होंने कहा कि समाज में पुरानी सोच अभी भी बनी हुई है, जो शिक्षा से नहीं जुड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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