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साहिल वाकोडे मौत मामला: IIT बॉम्बे छात्र के पिता की भूख हड़ताल, प्रताड़ितों की गिरफ्तारी की माँग

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साहिल वाकोडे मौत मामला: IIT बॉम्बे छात्र के पिता की भूख हड़ताल, प्रताड़ितों की गिरफ्तारी की माँग

सारांश

IIT बॉम्बे के होनहार छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद उनके माता-पिता मुंबई के आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। जातिगत भेदभाव के आरोप, इसरो से जुड़े छात्र की असमय मौत और संस्थागत जवाबदेही के सवालों ने इस मामले को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया है।

मुख्य बातें

साहिल वाकोडे ( 22 वर्ष ), IIT बॉम्बे बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र, 18 सितंबर 2026 को हॉस्टल में मृत पाए गए थे।
पिता रवींद्र वाकोडे ने 24 सितंबर 2026 को मुंबई के आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू की, प्रताड़ितों की गिरफ्तारी और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की माँग की।
परिवार ने साहिल के संस्थान में बार-बार जातिगत भेदभाव का सामना करने का आरोप लगाया है।
साहिल का चयन इसरो के एक रोबोटिक्स व एआई कार्यक्रम में 50 लोगों की टीम के नेतृत्व के लिए हुआ था।
माता-पिता ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष से मिलकर ज्ञापन सौंपा।
पूर्व बोर्ड चेयरमैन शरद सराफ के अनुसार, घटना परीक्षा में कथित नकल पकड़े जाने के बाद शुरू हुई।

मुंबई के आज़ाद मैदान में 24 सितंबर 2026 को आईआईटी बॉम्बे के 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में न्याय की माँग को लेकर उनके माता-पिता ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। परिवार ने कथित तौर पर साहिल को प्रताड़ित करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जाँच और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की माँग रखी है।

परिवार की माँग और पिता का बयान

साहिल के पिता रवींद्र वाकोडे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'जिन लोगों ने हमारे बच्चे को परेशान किया, उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। हम गिरफ्तारी की माँग करते हैं।' उन्होंने बताया कि परिवार ने मामले की जाँच कर रहे आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की है और उनसे न्याय की उम्मीद बनाए हुए हैं।

रवींद्र ने साहिल को एक असाधारण प्रतिभाशाली छात्र बताया। उनके अनुसार, साहिल का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए हुआ था और उन्हें रोबोटिक्स तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े एक कार्यक्रम में करीब 50 लोगों की टीम का नेतृत्व करना था। रवींद्र ने कहा कि उनका बेटा पढ़ाई और तकनीकी गतिविधियों में बेहद दक्ष था, इसलिए वह यह समझ नहीं पा रहे कि वह ऐसा कदम कैसे उठा सकता था।

जातिगत भेदभाव का आरोप

साहिल के पिता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे ने संस्थान में बार-बार जातिगत भेदभाव का सामना करने की बात परिवार को बताई थी। परिवार की माँग है कि जाँच में इस पहलू को भी शामिल किया जाए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

रवींद्र ने कहा कि उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि इतने प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह की घटनाएँ हो सकती हैं। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में हुई अन्य छात्र आत्महत्याओं का भी उल्लेख करते हुए सभी मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से मुलाकात

साहिल के माता-पिता रवींद्र और सोनाली वाकोडे ने मुंबई में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष से भी मुलाकात की। परिवार ने आयोग को एक ज्ञापन सौंपते हुए साहिल की मौत की त्वरित जाँच की माँग की।

घटनाक्रम: क्या हुआ था उस रोज़

आईआईटी बॉम्बे के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के पूर्व अध्यक्ष शरद सराफ ने घटना के बारे में बताया कि एक परीक्षा के दौरान प्रोफेसर सूर्य ढोले ने साहिल को फोन के ज़रिये नकल करते हुए पकड़ा — यह घटना कैमरे में दर्ज हुई और आसपास के छात्रों ने भी देखी। सराफ के अनुसार, प्रोफेसर ने छात्र को डिपार्टमेंट हेड के पास भेजा, फोन जब्त कर लिया, लेकिन उसे निलंबन या किसी अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई के बिना परीक्षा जारी रखने की अनुमति दी। इसके बाद साहिल अपने हॉस्टल लौट गया और दुखद रूप से इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली।

उल्लेखनीय है कि साहिल बीटेक के द्वितीय वर्ष का छात्र था। 18 सितंबर 2026 की शाम उसे हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया था।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि यह मामला सिर्फ एक छात्र की मौत का सवाल नहीं, बल्कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव, मानसिक स्वास्थ्य सहायता की कमी और संस्थागत जवाबदेही के व्यापक सवाल उठाता है। परिवार फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग पर अडिग है। जाँच आयोग की रिपोर्ट और आगामी कानूनी कार्यवाही के नतीजे तय करेंगे कि इस मामले में न्याय किस दिशा में जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संस्थागत ढाँचे की गहरी खामियों की ओर इशारा करते हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को ज्ञापन और फास्ट ट्रैक कोर्ट की माँग दर्शाती है कि परिवार को न्याय की सामान्य गति पर भरोसा नहीं रह गया। असली परीक्षा यह है कि जाँच आयोग जातिगत भेदभाव के आरोपों को गंभीरता से लेता है या इसे महज एक अनुशासनात्मक घटना तक सीमित कर देता है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साहिल वाकोडे कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
साहिल वाकोडे आईआईटी बॉम्बे में बीटेक के द्वितीय वर्ष के 22 वर्षीय छात्र थे। 18 सितंबर 2026 की शाम उन्हें हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया था। पूर्व बोर्ड चेयरमैन के अनुसार, यह घटना उसी दिन एक परीक्षा में कथित नकल पकड़े जाने के बाद हुई।
साहिल के परिवार की मुख्य माँगें क्या हैं?
परिवार ने मामले की निष्पक्ष जाँच, कथित प्रताड़ितों की तत्काल गिरफ्तारी और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की माँग की है। परिवार ने जाँच में जातिगत भेदभाव के पहलू को भी शामिल करने पर ज़ोर दिया है।
जातिगत भेदभाव का आरोप क्यों लगाया जा रहा है?
साहिल के पिता रवींद्र वाकोडे के अनुसार, साहिल ने परिवार को बताया था कि संस्थान में उसे बार-बार जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा था। इसीलिए परिवार ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से भी संपर्क किया और ज्ञापन सौंपा।
साहिल इसरो से कैसे जुड़े थे?
साहिल का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यक्रम में हुआ था। उन्हें इस कार्यक्रम में लगभग 50 लोगों की टीम का नेतृत्व करना था।
परीक्षा में नकल प्रकरण और साहिल की मौत का क्या संबंध है?
आईआईटी बॉम्बे के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के पूर्व अध्यक्ष शरद सराफ के अनुसार, उसी दिन एक परीक्षा में प्रोफेसर सूर्य ढोले ने साहिल को फोन के ज़रिये नकल करते हुए पकड़ा। प्रोफेसर ने उन्हें बिना निलंबन के परीक्षा जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन इसके बाद साहिल हॉस्टल लौटे और कथित तौर पर इमारत से कूद गए। परिवार इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जाँच की माँग कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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