24 सितंबर 2026
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साहिल वाकोडे केस: जोगेंद्र कवाड़े ने IIT बॉम्बे निदेशक से की मुलाकात, सीबीआई जांच और गिरफ्तारी की मांग

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साहिल वाकोडे केस: जोगेंद्र कवाड़े ने IIT बॉम्बे निदेशक से की मुलाकात, सीबीआई जांच और गिरफ्तारी की मांग

सारांश

साहिल वाकोडे केस अब सिर्फ एक छात्र की मौत का मामला नहीं रहा — यह उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव और संस्थागत जवाबदेही का सवाल बन चुका है। जोगेंद्र कवाड़े की सीबीआई जांच की माँग और निलंबित प्रोफेसर की गिरफ्तारी न होने का सवाल इस बहस को नई धार दे रहा है।

मुख्य बातें

जोगेंद्र कवाड़े ने 24 सितंबर 2026 को आईआईटी बॉम्बे के निदेशक से करीब आधे घंटे की बैठक की।
साहिल वाकोडे की कथित आत्महत्या के मामले में कवाड़े ने सीबीआई जांच और आरोपी प्रोफेसर की तत्काल गिरफ्तारी की माँग रखी।
संस्थान द्वारा एक प्रोफेसर को निलंबित किया जा चुका है; मामला अब क्राइम ब्रांच के पास है।
कवाड़े ने आरोप लगाया कि कुछ प्रोफेसरों ने कथित तौर पर निलंबित प्रोफेसर के समर्थन में मोर्चा निकाला, जबकि साहिल को श्रद्धांजलि देने की कोई बैठक नहीं हुई।
संस्थान प्रबंधन ने कहा कि सीबीआई जांच होने पर वे सहयोग करेंगे।
कवाड़े ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय मानसिकता बदलने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की माँग की।

आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की कथित आत्महत्या के मामले में जोगेंद्र कवाड़े ने 24 सितंबर 2026 को संस्थान के निदेशक से मुलाकात की और पूरे मामले की सीबीआई जांच तथा आरोपी प्रोफेसर की तत्काल गिरफ्तारी की माँग रखी। मुलाकात के बाद कवाड़े ने कहा कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक साहिल को सच्चा न्याय नहीं मिलेगा।

निदेशक से मुलाकात और मुख्य बातें

जोगेंद्र कवाड़े ने बताया कि वे मूलतः साहिल वाकोडे के माता-पिता से मिलने और उन्हें सांत्वना देने के इरादे से आईआईटी बॉम्बे परिसर पहुँचे थे। हालाँकि, वहाँ उन्हें जानकारी मिली कि साहिल के माता-पिता को संस्थान के भीतर ही रोक दिया गया है, जिसे उन्होंने अन्यायपूर्ण करार दिया।

इसके बाद कवाड़े ने निदेशक से करीब आधे घंटे तक बातचीत की। निदेशक ने उन्हें आश्वासन दिया कि संस्थान जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और मामला अब क्राइम ब्रांच के पास स्थानांतरित हो चुका है।

निलंबित प्रोफेसर पर सवाल

कवाड़े ने निदेशक से यह भी पूछा कि संस्थान की आंतरिक जांच के बाद यदि संबंधित प्रोफेसर को निलंबित किया गया है, तो उन्हें अब तक पुलिस के हवाले क्यों नहीं किया गया। उनका तर्क था कि गिरफ्तारी और जांच साथ-साथ चल सकती है; पहले आरोपी को हिरासत में लेना आवश्यक है।

कवाड़े ने यह भी कहा कि यदि जांच के दौरान संस्थान के किसी अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।

सीबीआई जांच की माँग और संस्थान का रुख

कवाड़े ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की माँग दोहराई। उन्होंने बताया कि संस्थान प्रबंधन ने कहा है कि यदि सीबीआई जांच का आदेश होता है, तो वे उसमें भी पूरा सहयोग करेंगे। वर्तमान में मामला क्राइम ब्रांच के पास है और प्रारंभिक जांच शुरू हो चुकी है।

जातीय मानसिकता और संस्थागत जवाबदेही का सवाल

कवाड़े ने एक गंभीर आरोप भी लगाया — उन्होंने कहा कि साहिल की मृत्यु के बाद कुछ प्रोफेसरों ने कथित तौर पर निलंबित प्रोफेसर के समर्थन में मोर्चा निकाला, जबकि साहिल को श्रद्धांजलि देने के लिए संस्थान में कोई समान बैठक आयोजित नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में जातीय मानसिकता का पहलू भी सामने आता है। उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसी मानसिकता को बदलने के लिए सरकार को ठोस नीतिगत कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में कोई छात्र ऐसी परिस्थितियों में इस तरह का कदम उठाने के लिए विवश न हो।

आगे की राह

कवाड़े ने स्पष्ट किया कि उनकी दो प्रमुख माँगें हैं — साहिल वाकोडे को न्याय दिलाना और आगे चलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना। मामले में क्राइम ब्रांच की जांच जारी है; यदि उच्च न्यायालय या सरकार सीबीआई को जांच सौंपने का निर्देश देती है, तो यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक जाँच के दायरे में आएगा। आईआईटी बॉम्बे में दलित एवं वंचित वर्ग के छात्रों की सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने की माँग अब और तेज हो गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उसी के समर्थन में प्रदर्शन होना — ये दोनों तथ्य संस्थागत जवाबदेही की खामियों को उजागर करते हैं। क्राइम ब्रांच की जांच भले ही शुरू हो गई हो, लेकिन सीबीआई की माँग इसलिए उठ रही है क्योंकि स्थानीय स्तर की जांच में प्रभाव और दबाव की आशंका बनी रहती है। जब तक संस्थानों में समान व्यवहार और शिकायत निवारण के तंत्र को मजबूत नहीं किया जाता, साहिल जैसे मामले केवल आँकड़े बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साहिल वाकोडे केस में जोगेंद्र कवाड़े ने क्या माँगें रखीं?
जोगेंद्र कवाड़े ने आईआईटी बॉम्बे निदेशक से मिलकर पूरे मामले की सीबीआई जांच और निलंबित प्रोफेसर की तत्काल गिरफ्तारी की माँग रखी। उनका कहना था कि जो भी व्यक्ति इस मामले में दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ बिना देर किए कार्रवाई होनी चाहिए।
IIT बॉम्बे में साहिल वाकोडे केस में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
आईआईटी बॉम्बे ने अपनी आंतरिक जांच के बाद एक प्रोफेसर को निलंबित किया है और मामला अब क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। निदेशक ने कवाड़े को बताया कि संस्थान जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।
सीबीआई जांच की माँग क्यों उठाई जा रही है?
कवाड़े का तर्क है कि मामले की निष्पक्षता और उच्च-स्तरीय जांच के लिए सीबीआई आवश्यक है। संस्थान प्रबंधन ने भी कहा है कि यदि सीबीआई जांच का आदेश होता है तो वे सहयोग करेंगे।
इस मामले में जातीय भेदभाव का पहलू क्यों उठाया जा रहा है?
कवाड़े ने आरोप लगाया कि साहिल की मौत के बाद कुछ प्रोफेसरों ने कथित तौर पर निलंबित प्रोफेसर के समर्थन में मोर्चा निकाला, जबकि साहिल को श्रद्धांजलि की कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय मानसिकता बदलने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
साहिल के माता-पिता को परिसर में क्यों रोका गया?
कवाड़े ने बताया कि जब वे साहिल के माता-पिता से मिलने पहुँचे, तो उन्हें जानकारी मिली कि माता-पिता को आईआईटी बॉम्बे परिसर में ही रोक दिया गया है। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताया, हालाँकि संस्थान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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