साहिल वाकोडे केस: जोगेंद्र कवाड़े ने IIT बॉम्बे निदेशक से की मुलाकात, सीबीआई जांच और गिरफ्तारी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की कथित आत्महत्या के मामले में जोगेंद्र कवाड़े ने 24 सितंबर 2026 को संस्थान के निदेशक से मुलाकात की और पूरे मामले की सीबीआई जांच तथा आरोपी प्रोफेसर की तत्काल गिरफ्तारी की माँग रखी। मुलाकात के बाद कवाड़े ने कहा कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक साहिल को सच्चा न्याय नहीं मिलेगा।
निदेशक से मुलाकात और मुख्य बातें
जोगेंद्र कवाड़े ने बताया कि वे मूलतः साहिल वाकोडे के माता-पिता से मिलने और उन्हें सांत्वना देने के इरादे से आईआईटी बॉम्बे परिसर पहुँचे थे। हालाँकि, वहाँ उन्हें जानकारी मिली कि साहिल के माता-पिता को संस्थान के भीतर ही रोक दिया गया है, जिसे उन्होंने अन्यायपूर्ण करार दिया।
इसके बाद कवाड़े ने निदेशक से करीब आधे घंटे तक बातचीत की। निदेशक ने उन्हें आश्वासन दिया कि संस्थान जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और मामला अब क्राइम ब्रांच के पास स्थानांतरित हो चुका है।
निलंबित प्रोफेसर पर सवाल
कवाड़े ने निदेशक से यह भी पूछा कि संस्थान की आंतरिक जांच के बाद यदि संबंधित प्रोफेसर को निलंबित किया गया है, तो उन्हें अब तक पुलिस के हवाले क्यों नहीं किया गया। उनका तर्क था कि गिरफ्तारी और जांच साथ-साथ चल सकती है; पहले आरोपी को हिरासत में लेना आवश्यक है।
कवाड़े ने यह भी कहा कि यदि जांच के दौरान संस्थान के किसी अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
सीबीआई जांच की माँग और संस्थान का रुख
कवाड़े ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की माँग दोहराई। उन्होंने बताया कि संस्थान प्रबंधन ने कहा है कि यदि सीबीआई जांच का आदेश होता है, तो वे उसमें भी पूरा सहयोग करेंगे। वर्तमान में मामला क्राइम ब्रांच के पास है और प्रारंभिक जांच शुरू हो चुकी है।
जातीय मानसिकता और संस्थागत जवाबदेही का सवाल
कवाड़े ने एक गंभीर आरोप भी लगाया — उन्होंने कहा कि साहिल की मृत्यु के बाद कुछ प्रोफेसरों ने कथित तौर पर निलंबित प्रोफेसर के समर्थन में मोर्चा निकाला, जबकि साहिल को श्रद्धांजलि देने के लिए संस्थान में कोई समान बैठक आयोजित नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में जातीय मानसिकता का पहलू भी सामने आता है। उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसी मानसिकता को बदलने के लिए सरकार को ठोस नीतिगत कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में कोई छात्र ऐसी परिस्थितियों में इस तरह का कदम उठाने के लिए विवश न हो।
आगे की राह
कवाड़े ने स्पष्ट किया कि उनकी दो प्रमुख माँगें हैं — साहिल वाकोडे को न्याय दिलाना और आगे चलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना। मामले में क्राइम ब्रांच की जांच जारी है; यदि उच्च न्यायालय या सरकार सीबीआई को जांच सौंपने का निर्देश देती है, तो यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक जाँच के दायरे में आएगा। आईआईटी बॉम्बे में दलित एवं वंचित वर्ग के छात्रों की सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने की माँग अब और तेज हो गई है।