IIT बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे मामला: राहुल गांधी और खड़गे से मिले परिजन, डेढ़ महीने बाद भी गिरफ्तारी नहीं
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026: IIT बॉम्बे के पिछड़े वर्ग के छात्र साहिल वाकोडे की कथित संस्थागत हत्या के मामले में डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस न्याय की माँग को लेकर मुंबई कांग्रेस की सांसद वर्षा गायकवाड़ साहिल वाकोडे और अनिकेत अंभोरे के परिजनों को लेकर नई दिल्ली में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलीं। मामले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत केस दर्ज है।
मुख्य घटनाक्रम
सांसद वर्षा गायकवाड़ ने मीडिया को बताया कि पिछले 13 महीनों में IIT बॉम्बे में 4 छात्रों ने आत्महत्या की है। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान में पिछड़े वर्ग के छात्रों को लगातार उत्पीड़न और अपमान का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, जिन प्रोफेसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है।
गायकवाड़ ने कहा, 'भविष्य में कोई और साहिल वाकोडे न बने, इसके लिए इस मामले में त्वरित न्याय आवश्यक है।'
परिजनों की पीड़ा
साहिल वाकोडे के पिता ने कहा कि उनके बेटे के साथ घोर अन्याय हुआ है और जो इसके जिम्मेदार हैं, उन्हें अब तक गिरफ्तार तक नहीं किया गया। उन्होंने कहा, 'मेरे बेटे की हत्या हुई है, दोषियों को बचाया जा रहा है। सरकार हमारी ओर ध्यान नहीं दे रही, इसलिए मैं राहुल गांधी से मिला। मुझे उम्मीद है कि वह हमें इंसाफ दिलाएँगे।'
राहुल गांधी और खड़गे की प्रतिक्रिया
सांसद गायकवाड़ के अनुसार, राहुल गांधी ने बैठक में पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली और परिजनों को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी परिवारों से मुलाकात कर उनकी व्यथा सुनी। कांग्रेस ने इस मामले को दलित छात्रों के उत्पीड़न का प्रतीक बताते हुए राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही है।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के उत्पीड़न की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि IIT बॉम्बे में 13 महीनों में 4 छात्रों की मौत एक गंभीर प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है। आलोचकों का कहना है कि संस्थागत भेदभाव और सामाजिक अलगाव पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य संकट की जड़ में हैं।
आगे क्या होगा
अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी न होने पर परिजन और विपक्ष दोनों सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस के इस मुद्दे को संसदीय मंच पर उठाने की संभावना है। अब यह देखना होगा कि पुलिस और संबंधित प्रशासनिक तंत्र इस बढ़ते दबाव के बाद क्या कदम उठाता है।