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आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत: पवई पुलिस ने एडीआर दर्ज किया, परिवार थाने पहुंचा

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आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत: पवई पुलिस ने एडीआर दर्ज किया, परिवार थाने पहुंचा

सारांश

परीक्षा में ChatGPT पकड़े जाने के बाद आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की कथित आत्महत्या ने परिसर को हिला दिया। संस्थान का कहना है कि कोई कार्यवाही नहीं हुई थी, पर छात्रों का आरोप है कि एक वर्ष के निलंबन की धमकी दी गई — इस विरोधाभास की जाँच अब पुलिस के हाथ में है।

मुख्य बातें

आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे (यवतमाल, महाराष्ट्र) की शुक्रवार शाम पवई परिसर में मृत्यु हुई।
मुंबई पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है; अब तक किसी के विरुद्ध आपराधिक मामला नहीं।
परिवार के सदस्य पवई पुलिस थाने पहुंचे, बयान दर्ज किए जा रहे हैं; शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
आईआईटी बॉम्बे के अनुसार छात्र के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू नहीं की गई थी और उसे करियर पर असर न पड़ने का आश्वासन दिया गया था।
छात्रों का आरोप है कि वाकोडे को एक वर्ष के निलंबन की धमकी दी गई थी — संस्थान ने इससे इनकार किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार-छात्रों के बयानों के बाद पुलिस आगे की कार्यवाही तय करेगी।

आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की शुक्रवार शाम को पवई परिसर में मृत्यु के बाद मुंबई पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है। कथित तौर पर परीक्षा के दौरान ChatGPT का उपयोग करते हुए पकड़े जाने के बाद वाकोडे ने आत्महत्या की, हालाँकि जाँच अभी जारी है।

पुलिस जाँच और परिवार का बयान

अधिकारियों ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को बताया कि महाराष्ट्र के यवतमाल ज़िले के रहने वाले मृतक के परिवार के सदस्य पवई पुलिस थाने पहुँचे, जहाँ उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अब तक किसी के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ है — केवल ADR ही दर्ज की गई है।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि परिवार के बयानों और परिसर में छात्रों के बयानों के आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी। वाकोडे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

घटनाक्रम: परीक्षा में नकल से मृत्यु तक

आईआईटी बॉम्बे ने आधिकारिक बयान में कहा कि वाकोडे परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन पर ChatGPT से प्रश्न का उत्तर खोजते हुए पकड़े गए थे। इसके बाद परीक्षा प्रशिक्षक और विभाग प्रमुख ने छात्र से बातचीत कर उसे आश्वस्त किया कि इस घटना से उसके करियर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

संस्थान के अनुसार, छात्र के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू नहीं की गई थी। बातचीत के बाद वाकोडे अपने हॉस्टल के कमरे में लौटा और उसी शाम वह वहाँ मृत पाया गया।

छात्रों का विरोध और प्रशासन पर आरोप

मृत्यु की खबर फैलते ही परिसर में छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने घटना से जुड़ी समस्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की। उनका कथित तौर पर दावा है कि वाकोडे को एक वर्ष के निलंबन की धमकी दी गई थी, जिसके तहत उसे छात्रावास छोड़कर परिसर के बाहर रहना पड़ सकता था।

हालाँकि संस्थान ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा है कि छात्र के विरुद्ध कोई औपचारिक कार्यवाही नहीं की गई थी। दोनों पक्षों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास है, जिसकी जाँच पुलिस कर रही है।

व्यापक परिप्रेक्ष्य: प्रीमियम संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य का संकट

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य-संबंधी चुनौतियाँ लगातार चर्चा में हैं। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में विभिन्न आईआईटी परिसरों से इस प्रकार की घटनाओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है, जिसने परामर्श सेवाओं और अकादमिक दबाव को लेकर राष्ट्रीय बहस को और तेज़ किया है।

आगे क्या होगा

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि परिवार और छात्रों के बयान दर्ज होने के पश्चात्, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद, यह तय किया जाएगा कि किसी के विरुद्ध मामला दर्ज किया जाए अथवा नहीं। जाँच के नतीजे आईआईटी बॉम्बे की अकादमिक अनुशासन नीति और छात्र परामर्श व्यवस्था पर भी नई रोशनी डाल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

निलंबन की धमकी दी गई या नहीं — वह बताता है कि 'आधिकारिक संवाद' और 'छात्र द्वारा महसूस किया गया दबाव' के बीच खाई कितनी गहरी हो सकती है। यह घटना इस व्यापक सत्य को एक बार फिर उजागर करती है कि देश के प्रीमियम तकनीकी संस्थानों में अकादमिक दबाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र अभी भी संस्थागत रूप से कमज़ोर हैं।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत कैसे हुई?
साहिल वाकोडे, जो आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष के छात्र थे, शुक्रवार शाम पवई परिसर में अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए। कथित तौर पर परीक्षा के दौरान ChatGPT का उपयोग करते हुए पकड़े जाने के बाद उन्होंने आत्महत्या की — जाँच जारी है।
पुलिस ने एडीआर (ADR) क्यों दर्ज किया, एफआईआर क्यों नहीं?
एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) प्रारंभिक जाँच का हिस्सा है, जो किसी भी अस्वाभाविक मृत्यु पर दर्ज की जाती है। पुलिस परिवार और छात्रों के बयान तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर तय करेगी कि किसी के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया जाए या नहीं।
आईआईटी बॉम्बे के प्रशासन ने घटना के बाद क्या कदम उठाए थे?
संस्थान के अनुसार, परीक्षा प्रशिक्षक और विभाग प्रमुख ने वाकोडे से बातचीत कर उसे आश्वस्त किया कि इस घटना का उसके करियर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा और कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की गई थी। इसके बावजूद उसी शाम वाकोडे अपने कमरे में मृत पाया गया।
छात्रों ने प्रदर्शन क्यों किया और उनके आरोप क्या हैं?
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने मृत्यु से जुड़ी सभी जानकारी सार्वजनिक नहीं की और वाकोडे को एक वर्ष के निलंबन की धमकी दी गई थी, जिसके तहत उसे छात्रावास छोड़ना पड़ सकता था। संस्थान ने इन आरोपों से इनकार किया है।
इस मामले में आगे की जाँच कैसे होगी?
पवई पुलिस परिवार के सदस्यों और परिसर के छात्रों के बयान दर्ज करने के साथ-साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है। इन सभी के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया जाए अथवा नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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