19 सितंबर 2026
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बद्रीनाथ में देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2026 शुरू, गढ़वाली लोकनृत्य से सेना की प्रदर्शनी तक दो दिन का उत्सव

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बद्रीनाथ में देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2026 शुरू, गढ़वाली लोकनृत्य से सेना की प्रदर्शनी तक दो दिन का उत्सव

सारांश

बद्रीनाथ का टूरिस्ट अराइवल प्लाजा इस सप्ताहांत सिर्फ तीर्थस्थल नहीं — एक सांस्कृतिक मंच बन गया है। भारतीय सेना और चमोली प्रशासन का यह संयुक्त आयोजन गढ़वाली लोकनृत्य से लेकर सेना की प्रदर्शनी तक, वाइब्रेंट विलेज की भावना को सीमांत क्षेत्र में ज़मीन पर उतारने की कोशिश है।

मुख्य बातें

बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में 19-20 सितंबर 2026 को दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 का आयोजन।
महोत्सव भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली द्वारा ऑपरेशन सद्भावना के तहत संयुक्त रूप से आयोजित।
थीम 'हमारी विरासत, हमारा भविष्य' ; गढ़वाली लोकनृत्य, लोकसंगीत, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजन प्रमुख आकर्षण।
भारतीय सेना की विशेष प्रदर्शनी में राष्ट्र निर्माण, सीमा सुरक्षा और आपदा राहत में सेना की भूमिका प्रदर्शित होगी।
महिला स्वयं सहायता समूहों , किसानों और युवा उद्यमियों के लिए स्टॉल; स्थानीय रोज़गार और स्वरोज़गार को बढ़ावा देना लक्ष्य।
आयोजन को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की भावना से जोड़ा गया है।

बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में 19 सितंबर 2026 से दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 का आगाज़ हो गया है। भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित यह महोत्सव 20 सितंबर तक चलेगा और उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, सीमांत क्षेत्रों की जीवनशैली तथा पारंपरिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगा।

महोत्सव की थीम और उद्देश्य

इस वर्ष महोत्सव की थीम 'हमारी विरासत, हमारा भविष्य' रखी गई है। आयोजकों के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत एवं लोक परंपराओं का संरक्षण करना और सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना है। साथ ही स्थानीय कला और संस्कृति को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने का लक्ष्य भी इस आयोजन के केंद्र में है।

गौरतलब है कि यह आयोजन केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की भावना से जोड़ा गया है, जिसके तहत सीमांत क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देने की पहल की जा रही है। बद्रीनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थल पर इसका आयोजन देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों तक इस संदेश को पहुँचाने का एक सुनियोजित प्रयास है।

मुख्य सांस्कृतिक आकर्षण

महोत्सव में गढ़वाली लोकनृत्य, लोकसंगीत और विद्यालयों व महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा स्थानीय हस्तशिल्प, हथकरघा, जैविक उत्पाद और पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

सीमांत गाँवों की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक महत्व को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि बद्रीनाथ दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्रों की जीवनशैली से भी परिचित हो सकें।

भारतीय सेना की विशेष प्रदर्शनी

महोत्सव में भारतीय सेना की ओर से एक विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, सीमाओं की सुरक्षा और आपदा राहत कार्यों में सेना की भूमिका को रेखांकित किया जाएगा। साथ ही समाज के प्रति सेना की प्रतिबद्धता और सीमांत क्षेत्रों के साथ उसके गहरे जुड़ाव को भी प्रदर्शनी में सामने रखा जाएगा।

स्थानीय उद्यमियों और महिला समूहों को मंच

आयोजन स्थल पर महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, किसानों और युवा उद्यमियों के लिए विभिन्न स्टॉल स्थापित किए जाएंगे। इन स्टॉलों पर स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजन प्रदर्शित होंगे। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बाज़ार उपलब्ध कराना और महिला समूहों व युवाओं की आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देना है।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार लगातार सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन-आधारित रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसर विकसित करने पर ज़ोर दे रही है। आयोजकों का मानना है कि बद्रीनाथ में आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की बड़ी संख्या स्थानीय उत्पादों के लिए एक स्वाभाविक बाज़ार प्रदान करती है।

व्यवस्थाएँ और सहभागिता की अपील

प्रशासन की ओर से आगंतुकों की सुविधा के लिए सुरक्षा, चिकित्सा, पार्किंग, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की गई है। भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली ने श्रद्धालुओं, पर्यटकों, स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों, कलाकारों और मीडिया प्रतिनिधियों से महोत्सव में बढ़-चढ़कर सहभागिता की अपील की है।

यह महोत्सव बद्रीनाथ की तीर्थयात्रा परंपरा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक जड़ों के बीच एक सेतु बनाने का प्रयास है — और आने वाले वर्षों में इसे एक नियमित आयोजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम को ज़मीनी वास्तविकता में बदलने की एक व्यावहारिक कोशिश है। असली परीक्षा यह है कि क्या स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों को मिला यह मंच दो दिन के उत्साह से आगे टिकाऊ बाज़ार संपर्क में तब्दील होता है। सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन-आधारित आजीविका के लिए एकमुश्त आयोजन काफी नहीं — इसके लिए नियमित मंच और आपूर्ति शृंखला समर्थन ज़रूरी है, जिसका रोडमैप अभी स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2026 कहाँ और कब हो रहा है?
यह महोत्सव बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में 19 और 20 सितंबर 2026 को आयोजित हो रहा है। यह दो दिवसीय कार्यक्रम है जिसमें श्रद्धालु और पर्यटक दोनों भाग ले सकते हैं।
देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन कौन कर रहा है?
यह महोत्सव भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसे वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की भावना से भी जोड़ा गया है।
महोत्सव में क्या-क्या देखने को मिलेगा?
महोत्सव में गढ़वाली लोकनृत्य, लोकसंगीत, छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, स्थानीय हस्तशिल्प, हथकरघा, जैविक उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन प्रमुख आकर्षण हैं। इसके साथ भारतीय सेना की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी जिसमें राष्ट्र निर्माण और सीमा सुरक्षा में सेना की भूमिका दर्शाई जाएगी।
महोत्सव से स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा?
महोत्सव में महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, किसानों और युवा उद्यमियों के लिए विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। इससे उन्हें अपने उत्पादों के लिए बाज़ार मिलेगा और रोज़गार व स्वरोज़गार के अवसर विकसित होंगे।
देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव की थीम क्या है?
इस वर्ष के महोत्सव की थीम 'हमारी विरासत, हमारा भविष्य' रखी गई है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को संरक्षित करते हुए सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
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