दिल्ली गैंगरेप-हत्या: NCW ने 16 वर्षीय पीड़िता के मामले में पुलिस कमिश्नर को लिखा पत्र, 7 दिनों में रिपोर्ट माँगी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने आउटर नॉर्थ दिल्ली में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित गैंगरेप और हत्या के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर को औपचारिक पत्र लिखा है। NCW चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने इस पत्र में समयबद्ध एवं विस्तृत जाँच, सख्त कानूनी कार्रवाई और सभी फोरेंसिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की माँग की है। यह मामला 13 सितंबर 2026 को उत्तरी दिल्ली के स्वरूप नगर क्षेत्र में सामने आया, जब कुशक रोड पर स्थित एक खुले खेत में एक क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।
मामले का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार 13 सितंबर को स्वरूप नगर के जयपाल राणा के खेत के पास सड़ी-गली अवस्था में एक शव मिला था। शव की दुर्दशा इतनी भयावह थी कि पुलिस शुरू में लिंग की पहचान तक नहीं कर पाई। जाँच में आगे खुलासा हुआ कि पीड़िता के साथ गैंगरेप के बाद चाकू से गोदकर हत्या की गई और शव को खुले मैदान में फेंक दिया गया। आवारा कुत्तों ने शव के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त कर दिए थे और पीड़िता का एक हाथ शरीर से अलग पाया गया।
पुलिस की जाँच में यह भी सामने आया कि पीड़िता अपने आरोपियों को जानती थी और वारदात के दौरान उनके साथ एक टेंपो में सफर कर रही थी। पुलिस के अनुसार सफर के दौरान सभी ने शराब पी और फिर लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इस वारदात को कथित तौर पर 4 लोगों ने अंजाम दिया, जिनमें से 3 नाबालिग थे। पुलिस ने यह भी बताया कि लड़की के परिवार ने उसकी गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी।
NCW की माँगें और कानूनी प्रावधान
NCW चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने पुलिस कमिश्नर से पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत उचित और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। इसके अतिरिक्त, आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि जहाँ कानूनी रूप से लागू हो, वहाँ 16 से 18 वर्ष के आरोपियों के विरुद्ध जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 15 के अंतर्गत प्रारंभिक जाँच शुरू की जाए।
गौरतलब है कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 15 के तहत किसी हत्या या गंभीर अपराध में संलिप्त 16 से 18 वर्ष के किशोरों को बालिग की तरह सुनवाई के लिए भेजा जा सकता है। यह प्रावधान 2012 के निर्भया कांड के बाद 2015 में कानून में किए गए संशोधन का परिणाम है।
पीड़ित परिवार के लिए राहत की माँग
आयोग ने पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग) और मुआवजा उपलब्ध कराने की भी माँग की है। इसके साथ ही आयोग ने दिल्ली पुलिस से सात दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
व्यापक संदर्भ और चिंताएँ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई है। आलोचकों का कहना है कि नाबालिगों के विरुद्ध यौन हिंसा के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की व्यवस्था अभी भी कमज़ोर है। यह मामला NCW की उस प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें आयोग गंभीर यौन अपराधों में पुलिस जाँच की सक्रिय निगरानी करता है।
आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि दिल्ली पुलिस NCW को निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट सौंपती है या नहीं, और किशोर आरोपियों के विरुद्ध जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड धारा 15 की प्रक्रिया को लागू करता है या नहीं।