19 सितंबर 2026
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आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या: परीक्षा में ChatGPT पकड़े जाने के बाद मौत, छह महीने में तीसरी घटना

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आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या: परीक्षा में ChatGPT पकड़े जाने के बाद मौत, छह महीने में तीसरी घटना

सारांश

पिछले छह महीनों में यह तीसरी बार है जब आईआईटी बॉम्बे के पवई परिसर में किसी छात्र ने जान दी है। साहिल वाकोडे का मामला अब सिर्फ एक दुखद मौत नहीं रहा — यह देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में मानसिक दबाव और अनुशासनात्मक भय की गहरी जड़ों पर सवाल उठाता है।

मुख्य बातें

साहिल वाकोडे , आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र, ने 19 सितंबर 2026 को परीक्षा में ChatGPT का उपयोग करते पकड़े जाने के बाद आत्महत्या कर ली।
आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, छात्र के विरुद्ध उस समय तक कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं हुई थी।
यह पवई परिसर में पिछले छह महीनों में आत्महत्या की तीसरी दर्ज घटना है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि वाकोडे को एक वर्ष के निलंबन की धमकी मिली थी, जो संस्थान के बयान से मेल नहीं खाती।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दत्तात्रेय नलावडे ने पुष्टि की कि मौत की जाँच जारी है।
संस्थान ने प्रभावित छात्रों और फैकल्टी को सहायता देने की बात कही है।

आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे ने 19 सितंबर 2026 को परीक्षा के दौरान ChatGPT का उपयोग करते हुए पकड़े जाने के बाद पवई परिसर स्थित अपने हॉस्टल के कमरे में जान दे दी। यह पिछले छह महीनों में इस प्रतिष्ठित संस्थान के परिसर में दर्ज आत्महत्या की तीसरी घटना है। इस दुखद घटना के बाद कैंपस में छात्रों ने प्रशासन के विरुद्ध विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

घटनाक्रम: क्या हुआ उस शाम

संस्थान के अनुसार, परीक्षा के दौरान वाकोडे को मोबाइल फोन पर ChatGPT से प्रश्न का उत्तर खोजते हुए पाया गया। इसके बाद परीक्षा प्रशिक्षक और विभाग के प्रमुख ने उनसे इस विषय पर बातचीत की। आईआईटी बॉम्बे ने स्पष्ट किया कि उस समय तक छात्र के विरुद्ध कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई आरंभ नहीं की गई थी।

संस्थान का कहना है कि फैकल्टी ने वाकोडे को आश्वस्त किया कि इस घटना से उनके करियर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। बातचीत के बाद वाकोडे अपने हॉस्टल के कमरे में लौटे और उसी शाम उन्हें वहाँ मृत पाया गया।

छात्रों के आरोप और विरोध-प्रदर्शन

घटना की जानकारी फैलते ही परिसर में छात्रों का एक बड़ा समूह एकत्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मौत से जुड़ी सभी परिस्थितियों का पूर्ण खुलासा नहीं किया। उनका दावा था कि वाकोडे को परीक्षा-संबंधी घटना के चलते एक वर्ष के निलंबन की धमकी दी गई थी, जिसके तहत उन्हें छात्रावास छोड़कर परिसर के बाहर रहना पड़ता।

एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा, 'हमारे विरोध प्रदर्शन का कारण यह है कि आज हमारे कॉलेज में एक आत्महत्या हुई है। इसीलिए हम विरोध करने और प्रशासन से जवाबदेही, पारदर्शिता और जवाब माँगने के लिए इकट्ठा हुए हैं।' छात्रों ने यह भी कहा कि ऐसे निलंबन के कारण उनके इंजीनियरिंग कोर्स के पूरा होने में सामान्य चार साल से अधिक समय लग सकता था।

संस्थान और पुलिस की प्रतिक्रिया

आईआईटी बॉम्बे ने एक आधिकारिक बयान में वाकोडे की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि संस्थान इस घटना से प्रभावित छात्रों, सहपाठियों, मित्रों तथा फैकल्टी सदस्यों को सहायता प्रदान कर रहा है। संस्थान ने यह भी बताया कि संबंधित अधिकारी मौत की परिस्थितियों की जाँच कर रहे हैं।

विरोध-प्रदर्शन के बाद परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दत्तात्रेय नलावडे ने पुष्टि की कि छात्र की मौत की जाँच जारी है। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी चिंताएँ व्यक्त करने के लिए एकत्र हुए थे और आईआईटी प्रशासन ने स्थिति सुलझाने के लिए उनसे बातचीत की।

व्यापक संदर्भ: बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य चिंताएँ

यह घटना ऐसे समय में आई है जब देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि पवई परिसर में पिछले छह महीनों में यह आत्महत्या की तीसरी घटना है। आलोचकों का कहना है कि उच्च-प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल, अनुशासनात्मक कार्रवाई का भय और छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव इन दुखद घटनाओं के पीछे की प्रमुख वजहें हो सकती हैं।

प्रदर्शनकारियों ने माँग की है कि संस्थान अधिक पारदर्शिता अपनाए और जवाबदेही सुनिश्चित करे। आने वाले दिनों में जाँच के नतीजे और छात्र-प्रशासन संवाद इस मामले की दिशा तय करेंगे।

यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक संकट का सामना कर रहा है, तो राष्ट्रीय हेल्पलाइन iCall: 9152987821 पर सहायता प्राप्त करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सिर्फ काउंसलिंग हेल्पलाइन की घोषणाएँ पर्याप्त नहीं हैं। जब तक अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं में मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन को अनिवार्य नहीं किया जाता, ऐसी खबरें आती रहेंगी।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साहिल वाकोडे कौन थे और क्या हुआ उनके साथ?
साहिल वाकोडे आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष के छात्र थे। 19 सितंबर 2026 को परीक्षा के दौरान ChatGPT का उपयोग करते पकड़े जाने और फैकल्टी से बातचीत के बाद वे अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए।
आईआईटी बॉम्बे ने छात्र के विरुद्ध क्या कार्रवाई की थी?
संस्थान के अनुसार, घटना के समय तक वाकोडे के विरुद्ध कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। परीक्षा प्रशिक्षक और विभाग प्रमुख ने उनसे बातचीत की और आश्वस्त किया कि इससे उनके करियर पर असर नहीं पड़ेगा। हालाँकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा इससे अलग है।
छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन क्यों किया?
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि प्रशासन ने मौत से जुड़ी परिस्थितियों का पूरा खुलासा नहीं किया। उनका दावा था कि वाकोडे को एक वर्ष के निलंबन की धमकी मिली थी, जिससे उन्हें हॉस्टल छोड़ना पड़ता और उनका कोर्स सामान्य अवधि से लंबा हो जाता। छात्रों ने प्रशासन से पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग की।
क्या आईआईटी बॉम्बे में पहले भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं?
हाँ, यह पिछले छह महीनों में पवई परिसर में आत्महत्या की तीसरी दर्ज घटना है। एक प्रदर्शनकारी छात्र ने दावा किया कि इस वर्ष परिसर में कई ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत दबाव को लेकर गंभीर सवाल उठाती हैं।
मामले की जाँच कहाँ तक पहुँची है?
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दत्तात्रेय नलावडे ने पुष्टि की है कि छात्र की मौत की जाँच जारी है। आईआईटी बॉम्बे ने भी कहा है कि संबंधित अधिकारी मौत की परिस्थितियों की जाँच कर रहे हैं और छात्र-प्रशासन बातचीत हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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