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डूसू चुनाव 2026: वोटों की गिनती जारी, 40.46% रिकॉर्ड मतदान; ABVP ने कई कॉलेजों में जीत दर्ज की

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डूसू चुनाव 2026: वोटों की गिनती जारी, 40.46% रिकॉर्ड मतदान; ABVP ने कई कॉलेजों में जीत दर्ज की

सारांश

डूसू 2026 में तीन साल का सबसे अधिक मतदान — 40.46% — दर्ज हुआ और ABVP ने अंतिम नतीजों से पहले ही कई कॉलेजों पर कब्ज़ा जमा लिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने जीत के जुलूस पर पाबंदी लगाई है, जो खुद बताता है कि दाँव कितने ऊँचे हैं।

मुख्य बातें

डूसू चुनाव 2026 की मतगणना 19 सितंबर को कड़ी सुरक्षा के बीच जारी; नतीजे आज घोषित होंगे।
मतदान प्रतिशत 40.46% — पिछले तीन वर्षों में सर्वाधिक; पिछले वर्ष यह 39.5% था।
ABVP ने अदिति महाविद्यालय, श्री अरबिंदो कॉलेज, डॉ.
अंबेडकर कॉलेज, भारती कॉलेज, शिवाजी कॉलेज और रामजस कॉलेज में जीत दर्ज की।
ABVP के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डबास ; NSUI के विजय शंकर मीणा से मुकाबला।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने नतीजों के बाद जीत के जुलूस पर रोक लगाई; दिल्ली पुलिस को सख्त निर्देश।
कुल 91 कॉलेजों में से केवल 52 डूसू चुनाव प्रक्रिया में भाग लेते हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (डूसू) के चुनाव परिणामों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है — 19 सितंबर 2026 को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना प्रक्रिया चल रही है और नतीजे आज शाम तक घोषित होने की उम्मीद है। दिल्ली विश्वविद्यालय के 52 पोलिंग सेंटरों पर शुक्रवार को हुई वोटिंग में 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले तीन वर्षों में सर्वाधिक है।

मुख्य उम्मीदवार और दलीय समीकरण

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अध्यक्ष पद के लिए यश डबास और उपाध्यक्ष पद के लिए इशू मौर्य को मैदान में उतारा है। वहीं, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की ओर से अध्यक्ष पद का दारोमदार विजय शंकर मीणा पर है और उपाध्यक्ष पद के लिए वीर छत्रथ को उम्मीदवार बनाया गया है। मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों संगठनों के बीच है।

गौरतलब है कि डूसू चुनाव भारतीय छात्र राजनीति का एक अहम पड़ाव माना जाता है, क्योंकि यहाँ से उभरे नेता अक्सर राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पहचान बनाते हैं। ABVP और NSUI क्रमशः भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के छात्र संगठन माने जाते हैं, जिससे इन चुनावों का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।

रिकॉर्ड मतदान और दो-चरणीय प्रक्रिया

मतदान प्रतिशत के लिहाज़ से यह चुनाव उल्लेखनीय रहा। 40.46% का आँकड़ा पिछले वर्ष के 39.5% से अधिक है और तीन वर्षों में सर्वोच्च। छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वोटिंग दो चरणों में आयोजित की गई।

पहला चरण सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चला, जबकि शाम की कक्षाओं में जाने वाले विद्यार्थियों के लिए दूसरा चरण दोपहर 3 बजे से शाम 7:30 बजे तक आयोजित किया गया। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए की गई थी कि पढ़ाई का कार्यक्रम और मतदान का अवसर — दोनों एक साथ चल सकें।

ABVP की कॉलेज-स्तरीय जीत

विश्वविद्यालय-स्तरीय नतीजों की प्रतीक्षा के बीच, ABVP ने अनेक कॉलेजों में अपना दबदबा स्थापित कर लिया है। अदिति महाविद्यालय, श्री अरबिंदो कॉलेज (मॉर्निंग), डॉ. बी.आर. अंबेडकर कॉलेज, भारती कॉलेज और शिवाजी कॉलेज में सभी प्रमुख पद ABVP के खाते में गए हैं।

रामजस कॉलेज में ABVP उम्मीदवार अध्यक्ष, सचिव, सेंट्रल काउंसलर और इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी — सभी पदों पर विजयी रहे। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों संगठन विश्वविद्यालय-स्तरीय मुख्य पदों के लिए कड़ी टक्कर में हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट का निर्देश और सुरक्षा इंतज़ाम

दिल्ली उच्च न्यायालय ने डूसू चुनाव परिणामों के बाद जीत के जुलूस निकालने पर पाबंदी लगा दी है। दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि नतीजों की घोषणा के बाद सड़कों, छात्रावासों और कॉलेज परिसरों में किसी भी प्रकार के जुलूस न निकलने पाएँ।

मतगणना केंद्र पर पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाए रखना प्राथमिकता है।

डूसू चुनाव की संरचना: कौन हिस्सा लेता है, कौन नहीं

दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ और साउथ कैंपस में कुल 91 कॉलेज हैं, लेकिन डूसू चुनाव प्रक्रिया में केवल 52 कॉलेज और संकाय सीधे भाग लेते हैं। सेंट स्टीफंस कॉलेज, लेडी श्रीराम कॉलेज और जीसस एंड मैरी कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान इस प्रक्रिया से बाहर हैं।

अंतिम नतीजे आने के साथ ही स्पष्ट हो जाएगा कि ABVP अपना दबदबा बरकरार रखती है या NSUI कोई बड़ा उलटफेर करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा यह है कि क्या इस भागीदारी का अनुवाद छात्र हितों की वास्तविक नीति में होता है या यह केवल राष्ट्रीय दलों की प्रॉक्सी लड़ाई बनी रहती है। दिल्ली हाई कोर्ट का जुलूस-निषेध आदेश खुद यह बताता है कि पिछले चुनावों में उत्सव अक्सर हिंसा में बदलते रहे हैं — यह एक संरचनागत समस्या है जिसे केवल पुलिस बंदोबस्त से नहीं सुलझाया जा सकता। सेंट स्टीफंस और लेडी श्रीराम जैसे प्रतिष्ठित कॉलेजों का डूसू से बाहर रहना भी एक अनुत्तरित सवाल है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डूसू चुनाव 2026 के नतीजे कब आएंगे?
19 सितंबर 2026 को मतगणना पूरी होने के बाद आज ही नतीजे घोषित किए जाएंगे। मतगणना कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में जारी है।
डूसू अध्यक्ष पद के लिए मुख्य उम्मीदवार कौन हैं?
ABVP ने यश डबास को और NSUI ने विजय शंकर मीणा को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया है। उपाध्यक्ष पद के लिए ABVP की ओर से इशू मौर्य और NSUI की ओर से वीर छत्रथ मैदान में हैं।
इस बार डूसू में मतदान प्रतिशत कितना रहा?
शुक्रवार को हुई वोटिंग में 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले तीन वर्षों में सर्वाधिक है। पिछले वर्ष यह आँकड़ा 39.5 प्रतिशत था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने डूसू नतीजों को लेकर क्या आदेश दिया है?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने नतीजों की घोषणा के बाद जीत के जुलूस निकालने पर पाबंदी लगाई है। दिल्ली पुलिस को निर्देश है कि सड़कों, छात्रावासों और कॉलेज परिसरों में कोई जुलूस न निकलने पाए।
क्या दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेज डूसू चुनाव में हिस्सा लेते हैं?
नहीं। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुल 91 कॉलेजों में से केवल 52 कॉलेज और संकाय डूसू चुनाव प्रक्रिया में सीधे भाग लेते हैं। सेंट स्टीफंस कॉलेज, लेडी श्रीराम कॉलेज और जीसस एंड मैरी कॉलेज समेत कई प्रतिष्ठित संस्थान इससे बाहर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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