15 सितंबर 2026
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डूसू चुनाव 2026: अभाविप ने किया 4-0 जीत का दावा, यश डबास समेत पूरा पैनल मैदान में

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डूसू चुनाव 2026: अभाविप ने किया 4-0 जीत का दावा, यश डबास समेत पूरा पैनल मैदान में

सारांश

डूसू चुनाव 2026 में अभाविप ने 4-0 जीत का दावा किया है। 2010 से 13 चुनावों में 9 बार अध्यक्ष पद जीत चुका यह संगठन इस बार भी यश डबास की अगुवाई में पूरे पैनल के साथ मैदान में है — और एनएसयूआई पर वंशवाद व आंतरिक कलह के आरोप लगा रहा है।

मुख्य बातें

अभाविप ने डूसू चुनाव 2026 में 4-0 जीत का दावा किया है।
अध्यक्ष पद पर यश डबास , उपाध्यक्ष पद पर ईशू मौर्य , सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह उम्मीदवार हैं।
2010 से अब तक हुए 13 चुनावों में अभाविप ने 9 बार अध्यक्ष पद जीता है।
ग्रेट डूसू इंटर्नशिप से लगभग 7,000 और लॉ इंटर्नशिप से लगभग 1,000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण मिला।
अभाविप के दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने एनएसयूआई पर वंशवाद और आंतरिक कलह के आरोप लगाए।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का चुनावी अभियान 15 सितंबर 2026 को तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। संगठन के प्रत्याशी और कार्यकर्ता विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं पर चर्चा कर रहे हैं। अभाविप ने दावा किया है कि उसका पूरा पैनल 4-0 की निर्णायक जीत की ओर बढ़ रहा है।

अभाविप का पैनल और मतदान क्रमांक

अभाविप ने इस बार चारों प्रमुख पदों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। अध्यक्ष पद के लिए यश डबास, उपाध्यक्ष पद के लिए ईशू मौर्य, सचिव पद के लिए रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद के लिए लक्ष्यराज सिंह मैदान में हैं। संगठन का पूरा पैनल मतदान क्रमांक 7-3-3-3 पर चुनाव लड़ रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब डूसू चुनावों में छात्र राजनीति की प्रतिद्वंद्विता अपने चरम पर है और दोनों प्रमुख संगठन — अभाविप तथा राष्ट्रीय छात्र संघ भारत (एनएसयूआई) — एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

अभाविप का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

गौरतलब है कि डूसू चुनाव वर्ष 1954 से आयोजित होते रहे हैं, जबकि अभाविप ने 1971 से इनमें भाग लेना शुरू किया। 1973 में पहली प्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया में अभाविप ने चारों पदों पर जीत हासिल की थी।

इसके बाद से संगठन ने अनेक चुनावों में बहुमत हासिल किया है। वर्ष 2010 से अब तक हुए 13 चुनावों में अभाविप ने 9 बार अध्यक्ष पद पर विजय प्राप्त की है — एक रिकॉर्ड जिसे संगठन अपनी ज़मीनी उपस्थिति का प्रमाण बताता है।

विद्यार्थियों के लिए किए गए कार्य

वर्ष 1949 से सक्रिय अभाविप ने दिल्ली विश्वविद्यालय में कई छात्र-हितैषी पहलों का श्रेय लिया है। इनमें स्नातकोत्तर सीटों में लगभग दोगुनी वृद्धि, यू-स्पेशल बस सेवा, केंद्रीकृत हॉस्टल आवंटन प्रक्रिया, पिंक बूथ की स्थापना और वामिका वैन की शुरुआत शामिल है।

इसके अतिरिक्त, ग्रेट डूसू इंटर्नशिप के माध्यम से लगभग 7,000 और लॉ इंटर्नशिप के माध्यम से लगभग 1,000 विद्यार्थियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

अभाविप की एनएसयूआई पर तीखी प्रतिक्रिया

अभाविप के दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि 'अभाविप हमेशा से विद्यार्थियों की पहली पसंद रही है। विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए अभाविप ने सदैव ज़मीन पर काम किया है और विद्यार्थी इससे भली-भांति परिचित हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि एनएसयूआई 'झूठ और भ्रम' का सहारा ले रही है।

शर्मा ने यह भी कहा कि कांग्रेस-एनएसयूआई में इस वर्ष 'वंशवाद और अवसरवाद' साफ दिखाई दे रहा है, क्योंकि एक प्रमुख कांग्रेस नेता के परिजन को टिकट दिया गया, जिसके बाद असंतुष्ट दावेदार बागी होकर मैदान में उतर गए हैं। एनएसयूआई ने इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आगे क्या होगा

डूसू चुनाव के नतीजे दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की दशा और दिशा तय करेंगे। अभाविप का 4-0 का दावा महज़ आत्मविश्वास है या ज़मीनी हकीकत — यह मतदाता विद्यार्थियों के वोट से स्पष्ट होगा। चुनावी नतीजे राष्ट्रीय छात्र संगठनों की राजनीतिक ताकत को भी आँकने का अवसर देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली कसौटी मतदान के दिन होती है। एनएसयूआई पर लगाए गए वंशवाद के आरोप प्रभावशाली राजनीतिक रेटरिक हैं, किंतु यह सत्यापित करना ज़रूरी है कि संगठन की अपनी आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ कितनी पारदर्शी हैं। विद्यार्थियों की असली ज़रूरतें — रोज़गार, आवास, सुरक्षा — किसी भी संगठन के चुनावी दावों से बड़ी हैं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डूसू चुनाव 2026 में अभाविप के उम्मीदवार कौन हैं?
अभाविप ने चारों प्रमुख पदों पर उम्मीदवार उतारे हैं — अध्यक्ष पद पर यश डबास, उपाध्यक्ष पद पर ईशू मौर्य, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह। पूरा पैनल मतदान क्रमांक 7-3-3-3 पर चुनाव लड़ रहा है।
डूसू चुनावों में अभाविप का अब तक का रिकॉर्ड कैसा रहा है?
अभाविप ने 1971 से डूसू चुनावों में भाग लेना शुरू किया और 1973 में पहली प्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया में चारों पद जीते थे। 2010 से अब तक हुए 13 चुनावों में अभाविप ने 9 बार अध्यक्ष पद पर विजय प्राप्त की है।
अभाविप ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए क्या काम किए हैं?
अभाविप के अनुसार, संगठन ने पीजी सीटों में लगभग दोगुनी वृद्धि, यू-स्पेशल बस सेवा, केंद्रीकृत हॉस्टल आवंटन, पिंक बूथ और वामिका वैन जैसी सुविधाएँ दिलवाई हैं। ग्रेट डूसू इंटर्नशिप से लगभग 7,000 और लॉ इंटर्नशिप से लगभग 1,000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण मिला है।
अभाविप ने एनएसयूआई पर क्या आरोप लगाए हैं?
अभाविप के दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि एनएसयूआई इस बार भी 'झूठ और भ्रम' का सहारा ले रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक प्रमुख कांग्रेस नेता के परिजन को टिकट दिया गया, जिससे संगठन में वंशवाद और आंतरिक कलह ज़ाहिर होती है।
डूसू चुनाव कब से आयोजित हो रहे हैं?
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के चुनाव वर्ष 1954 से आयोजित होते आ रहे हैं। अभाविप ने 1971 से इन चुनावों में सक्रिय भागीदारी शुरू की, जबकि संगठन की स्थापना 1949 में हुई थी।
राष्ट्र प्रेस
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