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दिशा सालियान केस: CBI को सौंपा जाएगा पेनड्राइव और डिजिटल साक्ष्य, वकील नीलेश ओझा का दावा

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दिशा सालियान केस: CBI को सौंपा जाएगा पेनड्राइव और डिजिटल साक्ष्य, वकील नीलेश ओझा का दावा

सारांश

दिशा सालियान केस में CBI की एफआईआर के बाद वकील नीलेश ओझा का दावा — पेनड्राइव और डिजिटल साक्ष्य CBI को सौंपे जाएंगे। हाईकोर्ट के 10 बिंदुओं ने पुलिस रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं और आदित्य ठाकरे, सचिन वाझे व परमबीर सिंह के नाम भी इस मामले में उभर रहे हैं।

मुख्य बातें

वकील नीलेश ओझा का दावा: हाईकोर्ट के आदेश से दिशा सालियान केस के 80% पहलू स्पष्ट।
हाईकोर्ट के आदेश में 10 बिंदु जो पुलिस की पूर्व रिपोर्ट पर सवाल उठाते हैं।
एक प्रत्यक्षदर्शी से जुड़ा पेनड्राइव और अन्य डिजिटल साक्ष्य जल्द CBI को सौंपे जाएंगे।
आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों से जुड़े आरोपों की जांच में यह साक्ष्य अहम हो सकते हैं।
सचिन वाझे ने कथित तौर पर परमबीर सिंह के निर्देशों का उल्लेख किया; 25 अगस्त को NIA कोर्ट में इससे जुड़ी बातें सामने आईं।

मुंबई में दिशा सालियान केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एफआईआर दर्ज होने के बाद दिशा के पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने 15 सितंबर 2026 को दावा किया कि हाईकोर्ट के आदेश से ही इस मामले के करीब 80 प्रतिशत पहलू स्पष्ट हो चुके हैं। ओझा के अनुसार, एक प्रत्यक्षदर्शी से जुड़ा पेनड्राइव और अन्य डिजिटल साक्ष्य जल्द ही कवरिंग लेटर के साथ सीबीआई को सौंपे जाएंगे।

हाईकोर्ट के आदेश में उठे 10 बड़े सवाल

वकील नीलेश ओझा ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में कुल 10 बिंदुओं का उल्लेख है, जिनसे पुलिस की पूर्व जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि सतीश सालियान ने अपने बयान में कई महत्वपूर्ण तथ्य विस्तार से बताए हैं, जिनका उल्लेख एफआईआर में भी किया गया है। इसके अतिरिक्त कुछ पूरक सामग्री भी मौजूद है, जिसे जांच एजेंसी को सौंपने की तैयारी चल रही है।

ओझा ने कहा कि यह डिजिटल साक्ष्य आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों से जुड़े आरोपों की जांच में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सीबीआई के पास पहले से ही इस मामले से संबंधित पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।

प्रत्यक्षदर्शी और पुलिस भूमिका पर आरोप

ओझा ने दावा किया कि एक कथित प्रत्यक्षदर्शी ने शुरुआत से ही पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उस प्रत्यक्षदर्शी ने कथित तौर पर यह भी कहा था कि 'प्रभावशाली लोगों के खिलाफ लड़ना मुश्किल होगा।' ओझा ने पूर्व पुलिस अधिकारियों और पुलिस व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों पर भी गंभीर आरोप लगाए, हालांकि उन्होंने जांच प्रभावित होने की आशंका के चलते कई विवरण सार्वजनिक करने से परहेज किया।

ओझा ने दिशा के बचपन के दो मित्रों का भी जिक्र किया और कहा कि सतीश सालियान का उन दोनों से पारिवारिक जुड़ाव रहा है, क्योंकि वे बचपन से दिशा के घर आते-जाते थे।

सचिन वाझे और परमबीर सिंह का संदर्भ

वकील ने बताया कि सचिन वाझे की ओर से पहले भी गवाह बनने का प्रस्ताव आया था। वाझे ने कथित तौर पर दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत मामलों से जुड़ी जानकारी होने का दावा किया था। ओझा के अनुसार, 25 अगस्त को एनआईए कोर्ट में हुई कार्यवाही के दौरान वाझे से संबंधित कुछ तथ्य सामने आए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि वाझे ने पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के कथित निर्देशों का उल्लेख किया था।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत मामले और दिशा सालियान केस को लेकर पहले से ही सार्वजनिक बहस चलती रही है, और सीबीआई की एफआईआर दर्ज होना इस दिशा में एक नया मोड़ माना जा रहा है।

जांच की पद्धति पर ओझा का सुझाव

ओझा ने जांच के तरीके पर अपनी राय रखते हुए कहा कि यदि वे जांच अधिकारी होते, तो घटनास्थल पर उपस्थित सभी व्यक्तियों और सुरक्षाकर्मियों से अलग-अलग पूछताछ करते। उनके अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुराने बयानों में विरोधाभास मिलने पर संबंधित व्यक्तियों से पूछा जाना चाहिए कि वे गवाह बनकर सच बताना चाहते हैं या आरोपी के रूप में जांच का सामना करना चाहते हैं।

ओझा ने अंत में जोर देते हुए कहा कि उपलब्ध सामग्री तत्काल सीबीआई को सौंपना ज़रूरी है ताकि एजेंसी स्वतंत्र रूप से और बिना किसी दबाव के जांच आगे बढ़ा सके। आने वाले दिनों में सीबीआई की कार्यवाही से ही स्पष्ट होगा कि यह डिजिटल साक्ष्य मामले की दिशा को किस हद तक बदलते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वकील नीलेश ओझा के बयान में जो दावे हैं — आदित्य ठाकरे का नाम, परमबीर सिंह के कथित निर्देश, पुलिस की भूमिका पर सवाल — ये अभी तक एकपक्षीय आरोप हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मुख्यधारा की कवरेज इन दावों को अक्सर बिना पर्याप्त संतुलन के उठाती है। असली परीक्षा यह है कि पेनड्राइव और डिजिटल साक्ष्य न्यायालय में टिकाऊ साबित होते हैं या नहीं — क्योंकि उच्च-प्रोफाइल मामलों में 'सबूत सौंपने' की घोषणाएँ कभी-कभी सुर्खियाँ बनती हैं पर अभियोजन की कसौटी पर खरी नहीं उतरतीं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिशा सालियान केस में CBI की एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिशा सालियान केस में CBI ने एफआईआर दर्ज की, क्योंकि अदालत ने पुलिस की पूर्व जांच रिपोर्ट पर कई सवाल उठाए थे। वकील नीलेश ओझा के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश में 10 ऐसे बिंदु हैं जो मामले की पुनर्जांच की आवश्यकता दर्शाते हैं।
वकील नीलेश ओझा पेनड्राइव में क्या दावा कर रहे हैं?
नीलेश ओझा का कहना है कि एक कथित प्रत्यक्षदर्शी की गवाही से संबंधित पेनड्राइव और अन्य डिजिटल साक्ष्य जल्द ही कवरिंग लेटर के साथ CBI को सौंपे जाएंगे। उनके अनुसार यह सामग्री आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों से जुड़े आरोपों की जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।
सचिन वाझे का इस मामले से क्या संबंध है?
वकील ओझा के अनुसार, सचिन वाझे ने पहले भी गवाह बनने की इच्छा जताई थी और दिशा सालियान तथा सुशांत सिंह राजपूत दोनों मामलों से जुड़ी जानकारी होने का दावा किया था। ओझा ने यह भी कहा कि वाझे ने पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के कथित निर्देशों का उल्लेख किया था।
दिशा सालियान केस में आगे क्या होगा?
वकील नीलेश ओझा का कहना है कि CBI को अब डिजिटल साक्ष्य और बयान सौंपे जाएंगे ताकि एजेंसी स्वतंत्र रूप से जांच कर सके। ओझा ने सुझाव दिया है कि CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुराने बयानों में विरोधाभास उजागर होने पर संबंधित लोगों से पूछताछ की जाए।
दिशा सालियान केस और सुशांत सिंह राजपूत केस का क्या संबंध है?
दिशा सालियान, अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं, और दोनों की मौत 2020 में हुई थी। वकील नीलेश ओझा ने इस मामले में सुशांत केस से जुड़े कुछ पहलुओं का भी जिक्र किया है, और सचिन वाझे ने भी कथित तौर पर दोनों मामलों से जुड़ी जानकारी होने का दावा किया है।
राष्ट्र प्रेस
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