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दिशा सालियान केस: वकील नीलेश ओझा ने FSL रिपोर्ट में विरोधाभास का दावा, CBI जांच तेज

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दिशा सालियान केस: वकील नीलेश ओझा ने FSL रिपोर्ट में विरोधाभास का दावा, CBI जांच तेज

सारांश

दिशा सालियान केस में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद FSL रिपोर्ट मिली तो पोस्टमार्टम रिकॉर्ड और फॉरेंसिक दस्तावेज़ों में कथित विरोधाभास सामने आया। वकील नीलेश ओझा ने CBI जांच की प्रगति और आदित्य ठाकरे की हस्तक्षेप याचिका पर सवाल उठाए। सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

मुख्य बातें

वकील नीलेश ओझा ने दावा किया कि FSL रिपोर्ट और पोस्टमार्टम दस्तावेज़ों में विरोधाभास है — सैंपल का उल्लेख है, लेकिन फॉरेंसिक स्तर पर केवल स्मीयर मिला।
12 जून 2020 , 16 जून और 3 अगस्त के पुलिस पत्रों में फॉरेंसिक सामग्री की जांच का अनुरोध किया गया था।
CBI ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को दस्तावेज़ सौंपने के लिए नोटिस जारी किया; दिल्ली से वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त होगा।
ओझा ने आदित्य ठाकरे की हस्तक्षेप याचिका और CBI जांच के विरोध पर सवाल उठाए — आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं।
सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान मामलों के बीच संबंध की भी जांच की माँग।

मुंबई में दिशा सालियान मामले में सतीश सालियान की ओर से पेश अधिवक्ता नीलेश ओझा ने 4 सितंबर को कई गंभीर दावे सार्वजनिक किए — जिनमें फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) रिपोर्ट में कथित विरोधाभास, फॉरेंसिक रिकॉर्ड से जुड़े सवाल और सीबीआई (CBI) जांच की प्रगति शामिल है। बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद FSL रिपोर्ट उपलब्ध होने पर ये दस्तावेज़ी विसंगतियाँ सामने आई हैं। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

FSL रिपोर्ट में क्या विरोधाभास है

ओझा के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र और पुलिस के कवरिंग लेटर में पोस्टमार्टम के दौरान सैंपल लिए जाने का स्पष्ट उल्लेख है। किंतु फॉरेंसिक स्तर पर बाद में केवल स्मीयर मिलने की बात कही गई — जो कथित तौर पर पहले के दस्तावेज़ों से मेल नहीं खाती। 12 जून 2020 के पुलिस पत्र में पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए सैंपल की जांच का अनुरोध किया गया था। इसके बाद 16 जून और 3 अगस्त के पत्रों में भी संबंधित फॉरेंसिक सामग्री की जांच और रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने की माँग दोहराई गई थी।

CBI जांच की स्थिति

ओझा ने बताया कि उनकी कानूनी टीम CBI कार्यालय पहुँची और अधिकारियों से मुलाकात की। CBI ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को मामले के दस्तावेज़ सौंपने के लिए नोटिस जारी किया है। दिल्ली से एक वरिष्ठ अधिकारी को मामले की जिम्मेदारी दी जा रही है, और उनके नामांकन के बाद आगे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। अब ये दस्तावेज़ CBI को सौंपे जाएंगे और FIR पंजीकरण की प्रक्रिया में भी सहयोग किया जाएगा।

आदित्य ठाकरे पर उठाए सवाल

ओझा ने आदित्य ठाकरे द्वारा मामले पर बात न करने और स्वयं को राजनीतिक रूप से निशाना बनाए जाने के कथित बयान पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, ठाकरे ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर की थी और CBI जांच के विरुद्ध आपत्ति जताई थी। ओझा ने आरोप लगाया कि ठाकरे की ओर से मामले से जुड़े कुछ तथ्यों को लेकर अदालत में दिए गए दावों पर सवाल उठे और बाद में स्पष्टीकरण देना पड़ा। ओझा ने कहा, "यदि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है तो CBI जांच का विरोध करने की जरूरत नहीं थी।" इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सुशांत केस से संबंध और न्याय की माँग

सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह राजपूत की सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख करते हुए ओझा ने कहा कि उन्होंने सत्य और न्याय की बात कही है। ओझा के अनुसार, दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े मामलों के बीच संबंधों को लेकर भी जांच में तथ्य सामने आने चाहिए। उन्होंने इसे आम लोगों और प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच न्याय की लड़ाई बताया और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि CBI जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे अदालती प्रक्रिया का हिस्सा बनाते हैं। असली सवाल यह है कि CBI इन कथित विसंगतियों को स्वतंत्र फॉरेंसिक परीक्षण से जाँचेगी या नहीं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के शोर में तथ्यात्मक जांच की माँग दब न जाए — यही इस मामले की सबसे बड़ी चुनौती है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिशा सालियान केस में FSL रिपोर्ट में क्या विरोधाभास बताया गया है?
वकील नीलेश ओझा के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस पत्रों में सैंपल लिए जाने का उल्लेख है, जबकि फॉरेंसिक स्तर पर बाद में केवल स्मीयर मिलने की बात कही गई। यह कथित विसंगति ही जांच का केंद्रीय बिंदु है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दिशा सालियान मामले में CBI जांच कहाँ तक पहुँची है?
CBI ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को दस्तावेज़ सौंपने के लिए नोटिस जारी किया है और दिल्ली से एक वरिष्ठ अधिकारी को मामले की जिम्मेदारी दी जा रही है। अधिकारी के नामांकन के बाद FIR पंजीकरण सहित आगे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
आदित्य ठाकरे का दिशा सालियान मामले से क्या संबंध बताया गया है?
वकील नीलेश ओझा ने आरोप लगाया कि आदित्य ठाकरे ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर की थी और CBI जांच के विरुद्ध आपत्ति जताई थी। ओझा का तर्क है कि यदि उनका मामले से कोई संबंध नहीं है तो जांच का विरोध क्यों। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत मामलों में क्या संबंध है?
ओझा ने दावा किया कि दोनों मामलों के बीच संबंधों को लेकर जांच में तथ्य सामने आने चाहिए। सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह राजपूत ने भी सोशल मीडिया पर सत्य और न्याय की बात कही है। हालाँकि, दोनों मामलों का सीधा संबंध अभी जांच के दायरे में है।
बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश की इस मामले में क्या भूमिका है?
बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही सतीश सालियान के वकीलों को FSL रिपोर्ट उपलब्ध हुई, जिससे कथित दस्तावेज़ी विसंगतियाँ सामने आईं। इसी आदेश के आधार पर CBI जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और दस्तावेज़ CBI को सौंपे जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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