दिशा सालियान केस में CBI जांच पर BJP विधायक स्नेहा दुबे पंडित बोलीं — 'न्याय मिलेगा, दबाव नहीं चलेगा'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में दिशा सालियान केस की CBI जांच के आदेश के बाद सियासी हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। वसई-विरार से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने 3 सितंबर 2026 को पालघर में कहा कि अदालत का यह फैसला दिशा सालियान को न्याय दिलाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है और उन्हें भारतीय न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।
विधायक का बयान: 'कानून का राज चलता है'
स्नेहा दुबे पंडित ने कहा, 'महाराष्ट्र में हो या हमारे देश में, कानून का राज चलता है और मुझे हमारी न्यायिक व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। अगर कोर्ट ने सीबीआई की जांच के आदेश दिए हैं तो मुझे ऐसा लगता है एक महिला के लिए, एक लड़की के लिए, ये बहुत ही एक सकारात्मक निर्णय है।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'दिशा सालियान के परिजन न्याय की प्रतीक्षा में हैं — उनको न्याय मिलेगा। भले आरोपी कोई भी हो, किसी भी दबाव में न आते हुए सीबीआई जांच करेगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस जारी है।
मामले की पृष्ठभूमि
दिशा सालियान की मृत्यु का मामला वर्षों से विवादों में रहा है। अदालत द्वारा CBI जांच के आदेश दिए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। पीड़ित परिवार लंबे समय से निष्पक्ष जांच की माँग करता रहा है।
राम मंदिर ट्रस्ट नियुक्ति पर विधायक की प्रतिक्रिया
इसी बातचीत में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ के रूप में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद हारिस बीरन के बयान पर भी स्नेहा दुबे पंडित ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा, 'वह रिटायर्ड हैं। अगर वो सरकारी कर्मचारी होकर उनकी नियुक्ति की जाती तो उनका यह बयान जायज होता।' विधायक ने इस नियुक्ति को सकारात्मक बताते हुए कहा कि गोविंदगिरि महाराज की नियुक्ति भी हुई है और वे इसे पूरी तरह सकारात्मक दृष्टि से देखती हैं।
आगे क्या होगा
CBI जांच के आदेश के बाद अब सबकी नज़रें जाँच एजेंसी की कार्यवाही पर टिकी हैं। दिशा सालियान के परिजनों और न्याय की माँग करने वाले पक्षों को उम्मीद है कि निष्पक्ष जाँच से मामले में स्पष्टता आएगी। महाराष्ट्र की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में भी केंद्रीय मुद्दा बना रहने की संभावना है।