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विश्व ओजोन दिवस 16 सितंबर: मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल से जागरूकता तक, ओजोन परत क्यों है पृथ्वी की जीवनरेखा

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विश्व ओजोन दिवस 16 सितंबर: मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल से जागरूकता तक, ओजोन परत क्यों है पृथ्वी की जीवनरेखा

सारांश

16 सितंबर को विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस है — 1987 की ऐतिहासिक मॉन्ट्रियल संधि की याद में। CFC जैसी गैसें ओजोन छिद्र बढ़ा रही हैं, जिससे त्वचा रोग और पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा है। वैज्ञानिकों के अनुसार सुधार हो रहा है, पर पूर्ण पुनर्स्थापना में दशक लगेंगे।

मुख्य बातें

विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस प्रत्येक वर्ष 16 सितंबर को मनाया जाता है; पहली बार 1995 में मनाया गया।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर 16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षर हुए — ओजोन-क्षतिकारक रसायनों को चरणबद्ध समाप्त करने की वैश्विक संधि।
ओजोन परत पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर ऊपर स्ट्रैटोस्फियर में है और हानिकारक UV किरणें रोकती है।
CFC, HFC, CO₂, CO और NO₂ जैसी गैसें ओजोन परत में छिद्र के लिए ज़िम्मेदार हैं।
इस दिवस का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और ओजोन परत के बचाव के उपाय खोजना है।

विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस प्रत्येक वर्ष 16 सितंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य ओजोन परत के क्षरण के प्रति वैश्विक जनमानस में जागरूकता फैलाना और सुरक्षात्मक उपायों को प्रोत्साहित करना है। इस दिन की नींव 16 सितंबर 1987 को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर होने की ऐतिहासिक घटना पर रखी गई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने दिसंबर 1994 में एक प्रस्ताव के ज़रिए इस दिवस को आधिकारिक मान्यता दी और पहली बार यह दिवस 16 सितंबर 1995 को मनाया गया।

ओजोन परत क्या है और क्यों है अनिवार्य

ओजोन ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनी एक गैस है, जो वायुमंडल में अत्यंत सीमित मात्रा में पाई जाती है। पृथ्वी की सतह से लगभग 10 से 50 किलोमीटर की ऊँचाई पर समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) में यह एक सुरक्षात्मक आवरण बनाती है। यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों को पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से पहले ही अवशोषित कर लेती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि स्ट्रैटोस्फियर में यह परत न होती, तो पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता। यह परत न केवल मनुष्यों, बल्कि पौधों, फसलों और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र की भी रक्षा करती है।

मुख्य खतरे: कौन-सी गैसें बन रही हैं दुश्मन

1970 के दशक में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि मानवीय गतिविधियों से उत्सर्जित कुछ हानिकारक रसायन ओजोन परत में छिद्र उत्पन्न कर रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं — क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC), हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO₂)

ये गैसें मुख्यतः वाहनों, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और औद्योगिक मशीनों से निकलती हैं। ओजोन परत के क्षरण के कारण त्वचा संबंधी बीमारियों, मोतियाबिंद के मामलों में वृद्धि तथा कृषि एवं जैव विविधता पर प्रतिकूल असर की आशंका व्यक्त की जाती है।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय संधि

इन खतरों को देखते हुए 16 सितंबर 1987 को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए — जो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अब तक की सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय संधियों में से एक मानी जाती है। इस संधि का मूल उद्देश्य ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले रासायनिक पदार्थों के उत्पादन और उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना था। गौरतलब है कि इस संधि को लगभग सर्वसम्मति से वैश्विक समर्थन प्राप्त हुआ, जो पर्यावरण कूटनीति के इतिहास में विरल है।

यह ऐसे समय में आया था जब वैज्ञानिक समुदाय में ओजोन क्षरण को लेकर गहरी चिंता व्याप्त थी और इस पर तत्काल वैश्विक कार्रवाई की माँग उठ रही थी।

विश्व ओजोन दिवस का उद्देश्य और महत्व

UNGA द्वारा दिसंबर 1994 में पारित प्रस्ताव के अनुसार हर वर्ष 16 सितंबर को विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य आम नागरिकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत को ओजोन परत के महत्व से अवगत कराना तथा हानिकारक उत्सर्जन घटाने के लिए प्रेरित करना है।

पृथ्वी ब्रह्मांड का एकमात्र ज्ञात ग्रह है जहाँ जीवन है — और इसमें ओजोन परत की भूमिका अपरिहार्य है। इस दिवस का उद्देश्य यही याद दिलाना है कि इस परत की सुरक्षा हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है।

आगे की राह

वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के सफल क्रियान्वयन के कारण ओजोन परत में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, हालाँकि पूर्ण पुनर्स्थापना में अभी दशकों का समय लग सकता है। CFC और अन्य हानिकारक रसायनों के विकल्प तलाशना, ऊर्जा-दक्ष उपकरणों का उपयोग और जन-जागरूकता अभियान इस लड़ाई के प्रमुख हथियार बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो CFC की जगह लाए गए, स्वयं शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं। 2016 का किगाली संशोधन इसी खामी को दूर करने का प्रयास है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह चुनौती दोहरी है — बढ़ती आबादी की ऊर्जा जरूरतें और पर्यावरणीय जिम्मेदारी, दोनों एक साथ साधनी हैं। जागरूकता दिवस तभी सार्थक होते हैं जब वे नागरिक आदतों में बदलाव लाएँ, सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित न रहें।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस हर वर्ष 16 सितंबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 1994 में यह घोषणा की थी और पहली बार यह दिवस 16 सितंबर 1995 को मनाया गया। इसका मकसद ओजोन परत के क्षरण के प्रति जागरूकता फैलाना और सुरक्षात्मक उपायों को बढ़ावा देना है।
ओजोन परत क्या है और यह पृथ्वी के लिए क्यों ज़रूरी है?
ओजोन ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनी गैस है, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 10 से 50 किलोमीटर ऊपर स्ट्रैटोस्फियर में एक सुरक्षात्मक परत बनाती है। यह सूर्य की हानिकारक UV किरणों को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकती है और इंसानों, पौधों व जीवों की रक्षा करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल क्या है?
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले रसायनों — विशेषकर CFC और HFC — के उत्पादन और उपयोग को चरणबद्ध रूप से समाप्त करना है। इसे पर्यावरण संरक्षण की सबसे सफल वैश्विक संधियों में गिना जाता है।
ओजोन परत को किन गैसों से सबसे अधिक खतरा है?
ओजोन परत को मुख्य रूप से क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC), हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO₂) से खतरा है। ये गैसें वाहनों, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और औद्योगिक उपकरणों से उत्सर्जित होती हैं। इनसे त्वचा रोग, मोतियाबिंद और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचने की आशंका है।
ओजोन परत की सुरक्षा के लिए आम नागरिक क्या कर सकते हैं?
आम नागरिक ऊर्जा-दक्ष उपकरण अपनाकर, CFC-मुक्त उत्पाद चुनकर और वाहनों का उपयोग कम करके ओजोन संरक्षण में योगदान दे सकते हैं। इसके अलावा रेफ्रिजरेटर और एसी की समय पर सर्विसिंग कराने से हानिकारक गैसों का रिसाव रोका जा सकता है। जागरूकता फैलाना और सरकारी पर्यावरण नीतियों का समर्थन करना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
राष्ट्र प्रेस
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