संयुक्त राष्ट्र ने अंतरिक्ष के सतत विकास हेतु गंभीर कदम उठाने की अपील की
सारांश
Key Takeaways
- संयुक्त राष्ट्र ने मानव अंतरिक्ष गतिविधियों की पर्यावरणीय चुनौतियों पर ध्यान देने की अपील की है।
- अंतरिक्ष स्थिरता के महत्व को रेखांकित किया गया है।
- विभिन्न देशों से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने का अनुरोध किया गया है।
- रॉकेट प्रक्षेपण और कक्षीय मलबे के मुद्दों पर चर्चा की गई है।
बीजिंग, १२ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान दिवस १२ अप्रैल को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अनुरोध किया गया है कि वे मानव अंतरिक्ष गतिविधियों से उत्पन्न हो रही पर्यावरणीय चुनौतियों पर ध्यान दें और अंतरिक्ष के सतत उपयोग को बढ़ावा दें।
बयान में यह उल्लेख किया गया है कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और संयुक्त राष्ट्र बाह्य अंतरिक्ष मामलों का विभाग ने मिलकर अंतरिक्ष गतिविधियों के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का विश्लेषण किया है। रॉकेट के प्रक्षेपण और अंतरिक्ष यान के वातावरण में पुनः प्रवेश से वायुमंडलीय रसायनों पर प्रभाव पड़ सकता है और यह ओजोन परत को भी नुकसान पहुँचा सकता है। कक्षीय मलबे का संचय टकराव के जोखिम को बढ़ा सकता है, जिससे उपग्रहों की संचालन सुरक्षा और भविष्य की अंतरिक्ष गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। बड़े पैमाने पर उपग्रह समूह और कक्षीय मलबा खगोलीय प्रक्षेपणों में भी बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।
इस बयान में अंतरिक्ष स्थिरता के महत्व पर जोर दिया गया है। विभिन्न देशों से अनुरोध किया गया है कि वे वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करें, निगरानी और डेटा साझाकरण में सुधार करें, अंतरिक्ष यान के डिज़ाइन को अनुकूलित करें और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दें ताकि अंतरिक्ष अन्वेषण के पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सके।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)