मरुस्थलीकरण पर कॉप-17 सम्मेलन उलानबातर में शुरू, भूमि पुनर्स्थापन पर होगा मंथन
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम संधि (UNCCD) के पक्षकारों का 17वां सम्मेलन (कॉप-17) 18 अगस्त 2026 को मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में औपचारिक रूप से आरंभ हुआ। दो सप्ताह तक चलने वाले इस वैश्विक मंच का केंद्रीय विषय है — 'भूमि का पुनर्स्थापन, आशा की नई किरण'। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया के बड़े हिस्से में भूमि क्षरण, सूखा और घास के मैदानों का विनाश एक गंभीर संकट का रूप ले चुका है।
सम्मेलन का एजेंडा और मुख्य विषय
कॉप-17 में भूमि क्षरण का पुनर्स्थापन, सतत भूमि प्रबंधन, सूखा प्रतिरोधक क्षमता निर्माण और घास के मैदानों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर दिया जाएगा।
UNCCD कार्यकारी सचिव का संदेश
UNCCD सचिवालय की कार्यकारी सचिव यास्मीन फौद ने कहा कि भूमि क्षरण और सूखा अब केवल दूरदराज की पर्यावरणीय चुनौतियाँ नहीं रहीं — ये खाद्य सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक संतुलन को सीधे प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'स्वस्थ भूमि एक स्वस्थ खाद्य प्रणाली, एक लचीली अर्थव्यवस्था और एक स्थिर समाज की नींव है; इसलिए, कॉप-17 को इसके कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब बहुपक्षवाद स्वयं चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब यह सम्मेलन यह साबित करने का अवसर है कि देश मिलकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम कर सकते हैं।
चीन की भागीदारी और प्रस्ताव
चीन सरकार का प्रतिनिधिमंडल इस सम्मेलन में वित्त पोषण, सूखा राहत और घास के मैदानों पर आयोजित उच्च स्तरीय संवादों में सक्रिय भूमिका निभाएगा। चीन ने अंतर्राष्ट्रीय घास के मैदान दिवस की स्थापना का प्रस्ताव रखा है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय घास के मैदान और चरवाहा वर्ष के दीर्घकालिक परिणामों से जोड़ा जाएगा। इस पहल से घास के मैदानों के संरक्षण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
2030 सतत विकास एजेंडा से जुड़ाव
कॉप-17 के निर्णय सीधे संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास एजेंडा के क्रियान्वयन से जुड़े हैं। भूमि पुनर्स्थापन के लक्ष्य — विशेष रूप से SDG-15 (भूमि पर जीवन) — की समयसीमा नज़दीक आने के साथ, इस सम्मेलन में लिए गए फैसले वैश्विक पर्यावरण नीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर हर वर्ष लाखों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि मरुस्थलीकरण की भेंट चढ़ रही है, जो अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के करोड़ों लोगों की आजीविका को खतरे में डाल रही है। आने वाले दो सप्ताहों में उलानबातर से जो संकल्प उभरेंगे, वे इस संकट से निपटने की वैश्विक इच्छाशक्ति की असली परीक्षा होंगे।