ट्रंप ने एच-1बी वीजा पर ₹83 लाख की फीस फिर लागू की, छंटनी करने वाले नियोक्ताओं पर कड़ी जाँच के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 सितंबर 2026 को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर और व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट के ज़रिए कुछ एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए $1,00,000 (लगभग ₹83 लाख) की फीस को नवीनीकृत कर दिया है और अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाले नियोक्ताओं की कड़ी जाँच के निर्देश दिए हैं। यह फीस मूल रूप से 19 सितंबर 2025 को एक अलग घोषणापत्र के ज़रिए पहली बार लागू की गई थी और अब इसे औपचारिक रूप से नवीनीकृत किया गया है।
एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में क्या है
ऑर्डर में स्टेट विभाग, लेबर विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को निर्देश दिया गया है कि एच-1बी आवेदनों की समीक्षा के दौरान वे यह जाँचें कि स्पॉन्सर करने वाले नियोक्ता ने पिछले वर्ष सीधे या परोक्ष रूप से छंटनी की थी या नहीं, या भविष्य में ऐसी कटौती की योजना है या नहीं। यह आवश्यकता लेबर कंडीशन एप्लीकेशन, याचिकाओं, वीजा और अमेरिका में प्रवेश — सभी चरणों पर लागू होगी।
गौरतलब है कि ऑर्डर में केवल छंटनी की घोषणा के आधार पर किसी आवेदन को स्वतः अस्वीकार करने का प्रावधान नहीं है। इसके बजाय, नियोक्ता के रोज़गार संबंधी तौर-तरीकों की व्यापक जाँच का ढाँचा तैयार किया गया है।
$1,00,000 की फीस और उसका असर
व्हाइट हाउस के अनुसार, 2025 के घोषणापत्र के लागू होने के बाद से सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग फर्मों द्वारा जमा किए गए रजिस्ट्रेशन में 92 प्रतिशत की गिरावट आई है और कॉन्सुलर प्रोसेसिंग अनुरोधों में लगभग 97 प्रतिशत की कमी आई है। फैक्ट शीट में बताया गया कि फीस कुछ एच-1बी आवेदनों पर लागू होती है, हालाँकि रिन्यूअल की अवधि या छूट के विवरण का खुलासा नहीं किया गया।
लेबर विभाग के लिए 30 दिन की समयसीमा
ऑर्डर में लेबर सेक्रेटरी को 30 दिनों के भीतर वेज एंड आवर डिवीजन के पूर्व में दाखिल लेबर कंडीशन एप्लीकेशन डेटा की समीक्षा शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इस समीक्षा से यह तय होगा कि स्पॉन्सर करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ आगे कोई प्रवर्तन कार्रवाई आवश्यक है या नहीं।
आवेदनों की प्रोसेसिंग के दौरान कॉमर्स, एजुकेशन विभागों और स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से भी परामर्श लेना अनिवार्य किया गया है, जो वेतन, रोज़गार, शैक्षणिक और आर्थिक आँकड़े उपलब्ध कराएंगे।
प्रशासन के आरोप और पृष्ठभूमि
ट्रंप प्रशासन ने इन कदमों को अमेरिकी कर्मचारियों के कथित विस्थापन और कुछ नियोक्ताओं व आउटसोर्सिंग फर्मों द्वारा कार्यक्रम के दुरुपयोग के जवाब में उठाया है। ऑर्डर में आरोप लगाया गया कि टेक्नोलॉजी नियोक्ताओं ने सामूहिक रूप से लाखों वर्करों के लिए एच-1बी वीजा की माँग की, जबकि 2022 से 2026 के बीच 8 लाख से 13 लाख अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की। यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ नियोक्ताओं ने नौकरी की ज़िम्मेदारियों, कार्य परिस्थितियों या आवेदकों की योग्यताओं के बारे में गलत जानकारी दी। न तो ऑर्डर और न ही फैक्ट शीट में इन आरोपों पर संबंधित नियोक्ताओं या फर्मों की कोई प्रतिक्रिया शामिल थी।
वेतन-आधारित चयन प्रणाली और आगे की राह
फैक्ट शीट के अनुसार, दिसंबर 2025 में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने रैंडम सिलेक्शन (यादृच्छिक चयन) की जगह वेतन-स्तर आधारित वेटेज प्रणाली लागू की थी। वित्तीय वर्ष 2027 में पहली बार इसके इस्तेमाल के बाद एच-1बी रजिस्ट्रेशन में लगभग 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय आईटी उद्योग और भारत से अमेरिका जाने वाले कुशल पेशेवर पहले से ही वीजा नीतियों में बदलाव से प्रभावित हैं। नए उपाय एच-1बी कार्यक्रम पर ट्रंप प्रशासन की नीति को और सख्त बनाने की दिशा में एक और कदम हैं, और इनका असर भारतीय आईटी पेशेवरों व आउटसोर्सिंग क्षेत्र पर व्यापक रूप से पड़ने की संभावना है।