क्या 20 अमेरिकी राज्यों ने एच-1बी वीजा फीस को लेकर ट्रंप पर मुकदमा दायर किया?

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क्या 20 अमेरिकी राज्यों ने एच-1बी वीजा फीस को लेकर ट्रंप पर मुकदमा दायर किया?

सारांश

20 अमेरिकी राज्यों ने एच-1बी वीजा शुल्क को लेकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। क्या यह शुल्क अवैध है? जानिए इसके पीछे की कहानी और क्या इससे सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ेगा।

Key Takeaways

  • 20 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।
  • एच-1बी वीजा फीस 1 लाख डॉलर तक पहुंच गई है।
  • कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल ने इस मामले का नेतृत्व किया।
  • यह नीति अवैध और अनुचित बताई गई है।
  • नियोक्ताओं को 960 से 7,595 डॉलर तक का शुल्क देना पड़ता है।

वाशिंगटन, 13 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के 20 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का आरोप है कि एच-1बी वीजा के नए आवेदनों पर 1 लाख अमेरिकी डॉलर की भारी शुल्क लगाना अवैध है और इससे आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

यह मुकदमा डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा लागू की गई एक नीति को लक्ष्य बनाता है, जिसमें एच-1बी वीजा के तहत विदेशी कुशल कर्मचारियों को रखने के लिए नियोक्ताओं पर अचानक बहुत अधिक शुल्क लगाया गया। इस वीजा का उपयोग अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बॉन्टा इस मामले का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके कार्यालय का कहना है कि प्रशासन को इतनी बड़ी शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। बॉन्टा ने कहा कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते कैलिफोर्निया जानता है कि जब कुशल लोग दुनिया भर से यहाँ काम करने आते हैं, तो राज्य आगे बढ़ता है।

बॉन्टा ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा निर्धारित यह 1 लाख डॉलर की एच-1बी फीस न केवल अनुचित है, बल्कि अवैध भी है। इससे स्कूलों, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाएँ देने वाले संस्थानों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और कर्मचारियों की कमी और भी बढ़ जाएगी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने 19 सितंबर, 2025 को इस शुल्क का आदेश दिया था। 21 सितंबर के बाद दायर किए गए एच-1बी आवेदनों पर इसे लागू किया गया। होमलैंड सिक्योरिटी के सचिव को यह तय करने का अधिकार दिया गया कि कौन से आवेदन इस शुल्क के दायरे में आएंगे या छूट के लिए योग्य होंगे।

राज्यों का कहना है कि यह नीति प्रशासनिक प्रक्रिया, कानून और अमेरिकी संविधान का उल्लंघन करती है, क्योंकि बिना तय प्रक्रिया अपनाए नियम बनाए गए हैं और कांग्रेस की सीमाओं से बाहर जाकर निर्णय लिया गया है। अब तक एच-1बी से जुड़ी फीस केवल संचालन के खर्च तक सीमित रहती थी।

फिलहाल, नियोक्ता एच-1बी वीजा के लिए विभिन्न शुल्क मिलाकर लगभग 960 से 7,595 डॉलर तक देते हैं। संघीय कानून के अनुसार उन्हें यह भी प्रमाण देना होता है कि विदेशी कर्मचारी रखने से अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी या काम की स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कांग्रेस ने अधिकांश निजी क्षेत्र के एच-1बी वीजा की संख्या सालाना 65,000 तक सीमित रखी है, जबकि उच्च डिग्री वालों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा होते हैं। स्कूल, विश्वविद्यालय और अस्पताल जैसे सरकारी और गैर-लाभकारी संस्थानों को इस सीमा से छूट मिली हुई है।

अटॉर्नी जनरल का कहना है कि नई फीस से शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी बढ़ जाएगी। यह मुकदमा बॉन्टा और मैसाचुसेट्स के अटॉर्नी जनरल एंड्रिया जॉय कैंपबेल ने दायर किया था, जिसमें एरिज़ोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनोइस, मैरीलैंड, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवाडा, नॉर्थ कैरोलिना, न्यू जर्सी, न्यू यॉर्क, ओरेगन, रोड आइलैंड, वर्मोंट, वाशिंगटन और विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल भी शामिल हुए।

एच-1बी वीजा कार्यक्रम विदेशी कुशल पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है। इसके तहत बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर अमेरिका में तकनीक, स्वास्थ्य और शोध के क्षेत्र में कार्यरत हैं।

Point of View

NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

एच-1बी वीजा क्या है?
एच-1बी वीजा अमेरिका में विदेशी कुशल कर्मचारियों को काम करने की अनुमति देता है।
ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा फीस क्यों बढ़ाई?
राष्ट्रपति ट्रंप ने एच-1बी वीजा के नए आवेदनों पर उच्च शुल्क लगाने का आदेश दिया है, जिसे राज्यों ने चुनौती दी है।
इस मुकदमे का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुकदमे का उद्देश्य उच्च शुल्क को अवैध घोषित करना और सार्वजनिक सेवाओं पर इसके नकारात्मक प्रभावों को रोकना है।
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