19 सितंबर 2026
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कानपुर: ग्राम बरी में केडीए का बुलडोजर, 500 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर कथित कब्जे से मुक्त

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कानपुर: ग्राम बरी में केडीए का बुलडोजर, 500 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर कथित कब्जे से मुक्त

सारांश

कानपुर विकास प्राधिकरण ने ग्राम बरी में आराजी संख्या 314 की करीब 500 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के खिलाफ बुलडोजर चलाया। उच्च न्यायालय में याचिका खारिज होने के बाद भी निर्माण न हटाए जाने पर केडीए ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करके यह कार्रवाई की।

मुख्य बातें

केडीए ने 19 सितंबर 2026 को ग्राम बरी, कानपुर में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की।
करीब 500 वर्गमीटर आराजी संख्या 314 की भूमि पर बनी बाउंड्री वॉल और कमरे ध्वस्त किए गए।
कार्रवाई से पहले उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 26(क)(4) के तहत नोटिस जारी हुआ था।
संबंधित पक्ष की उच्च न्यायालय में दाखिल रिट याचिका खारिज कर दी गई थी।
ध्वस्तीकरण के दौरान पीएसी, महिला पुलिस और एसीपी स्तर के अधिकारी मौके पर तैनात रहे।
ओएसडी शत शुक्ला ने स्पष्ट किया कि केवल वही हिस्सा हटाया गया जिसे केडीए सरकारी जमीन पर कब्जा मानता है।

कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने 19 सितंबर 2026 को ग्राम बरी की आराजी संख्या 314 पर स्थित करीब 500 वर्गमीटर सरकारी भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की। प्राधिकरण के अनुसार, इस भूमि पर बाउंड्री वॉल और कमरों का निर्माण कर कथित तौर पर कब्जा किया गया था, जिसे ध्वस्तीकरण अभियान के तहत हटा दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

सुबह केडीए की टीम पुलिस बल, पीएसी और महिला पुलिस के साथ मौके पर पहुँची और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। बुलडोजर से सबसे पहले बाउंड्री वॉल को गिराया गया, इसके बाद उसके भीतर के निर्माण को भी ढहा दिया गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसीपी स्तर के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

कानूनी प्रक्रिया और नोटिस

केडीए के जोन-3 स्थित भूमि बैंक अनुभाग ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 26(क)(4) के तहत नोटिस जारी किया था। नोटिस में संबंधित मुस्लिम कब्रिस्तान कमेटी के प्रबंधक से जमीन और निर्माण के संदर्भ में जवाब माँगा गया था। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया था कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि संबंधित पक्ष ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद भी जब कथित अतिक्रमण स्वयं नहीं हटाया गया, तो केडीए ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया।

प्राधिकरण का पक्ष

केडीए के ओएसडी शत शुक्ला ने बताया कि संबंधित कब्रिस्तान का एक बड़ा हिस्सा सरकारी जमीन पर कथित कब्जा कर बनाया गया था। उन्होंने कहा, 'कार्रवाई से पहले कानून के तहत उचित प्रक्रिया का पालन किया गया और संबंधित लोगों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया।' शुक्ला के अनुसार, कार्रवाई में केवल उसी हिस्से को हटाया गया है, जिसे केडीए सरकारी जमीन पर कथित कब्जा मानता है।

आम जनता और स्थानीय प्रशासन पर असर

कार्रवाई पूरी होने के बाद प्राधिकरण ने करीब 500 वर्गमीटर भूमि को कथित कब्जे से मुक्त कराने का दावा किया है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण हटाने की मुहिम तेज़ हुई है। इस प्रकार की कार्रवाइयाँ स्थानीय स्तर पर विवाद और कानूनी चुनौतियों को भी जन्म देती हैं, जैसा इस मामले में उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल होने से स्पष्ट है।

क्या होगा आगे

केडीए के अनुसार मुक्त कराई गई भूमि अब प्राधिकरण के स्वामित्व में रहेगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित पक्ष इस ध्वस्तीकरण को उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में फिर से चुनौती देगा या नहीं। इस मामले का अगला घटनाक्रम यह तय करेगा कि सरकारी भूमि प्रबंधन को लेकर केडीए की आगामी कार्रवाइयाँ किस दिशा में जाएँगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका संदर्भ व्यापक है — उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण हटाने की मुहिम अब एक स्थापित नीतिगत पैटर्न बन चुकी है। ध्यान देने योग्य यह है कि संबंधित पक्ष ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और याचिका खारिज होने के बाद भी निर्माण नहीं हटाया — जो प्रशासनिक नोटिस और न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। केडीए के ओएसडी का यह दावा कि 'उचित प्रक्रिया' का पालन हुआ, सकारात्मक संकेत है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि मुक्त कराई गई जमीन का आगे क्या उपयोग होगा — पारदर्शिता की दृष्टि से यह जवाबदेही का असली बिंदु है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केडीए ने कानपुर के ग्राम बरी में क्या कार्रवाई की?
केडीए ने 19 सितंबर 2026 को ग्राम बरी की आराजी संख्या 314 में करीब 500 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर चलाया। बाउंड्री वॉल और उसके भीतर बने कमरों को ध्वस्त कर दिया गया।
इस ध्वस्तीकरण के लिए केडीए ने कौन-सा कानूनी आधार इस्तेमाल किया?
केडीए के जोन-3 के भूमि बैंक अनुभाग ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 26(क)(4) के तहत नोटिस जारी किया था। संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देने के बाद ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया।
क्या संबंधित पक्ष ने अदालत में चुनौती दी थी?
हाँ, संबंधित पक्ष ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद भी निर्माण न हटाए जाने पर केडीए ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
कब्रिस्तान कमेटी की भूमिका इस मामले में क्या थी?
केडीए के अनुसार, संबंधित मुस्लिम कब्रिस्तान कमेटी के प्रबंधक को नोटिस जारी कर जमीन और निर्माण के बारे में जवाब माँगा गया था। ओएसडी शत शुक्ला ने स्पष्ट किया कि केवल वही हिस्सा हटाया गया जिसे केडीए सरकारी जमीन पर कथित कब्जा मानता है।
ध्वस्तीकरण के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम थे?
कार्रवाई के दौरान पुलिस बल, पीएसी और महिला पुलिस बल की तैनाती की गई थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसीपी स्तर के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
राष्ट्र प्रेस
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