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तमिलनाडु में डेंगू का प्रकोप: 15 सितंबर तक 16,577 मामले, 9 मौतें; चेन्नई सबसे ज़्यादा प्रभावित

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तमिलनाडु में डेंगू का प्रकोप: 15 सितंबर तक 16,577 मामले, 9 मौतें; चेन्नई सबसे ज़्यादा प्रभावित

सारांश

मानसून के साथ तमिलनाडु में डेंगू का प्रकोप तेज़ — 15 सितंबर तक 16,577 मामले और 9 मौतें, चेन्नई सबसे बुरी तरह प्रभावित। सरकार ने 25,000 कर्मचारी तैनात किए। इसी बीच डॉ. रेड्डीज लैब अगले साल भारत का पहला डेंगू टीका 'क्यूडेंगा' लाने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

15 सितंबर 2026 तक तमिलनाडु में डेंगू के 16,577 मामले दर्ज, 9 लोगों की मौत।
परीक्षण किए गए 1,320 लोगों में से 244 में डेंगू की पुष्टि; रोज़ाना औसतन 200 नए मामले।
चेन्नई सबसे प्रभावित ज़िला — एक दिन में 156 भर्ती, 87 में डेंगू की पुष्टि।
सरकार ने तमिलनाडु में 25,000 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी तैनात किए।
अन्ना विश्वविद्यालय छात्र हरीश कुमार की मौत स्क्रब टाइफस से हुई, डेंगू से नहीं — स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया।
रेड्डीज लैबोरेटरीज और ताकेडा फार्मास्युटिकल मिलकर 2027 की पहली छमाही में भारत का पहला डेंगू टीका 'क्यूडेंगा' लॉन्च करने की तैयारी में।

मानसून की दस्तक के साथ तमिलनाडु में डेंगू बुखार तेज़ी से पाँव पसार रहा है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आँकड़ों के अनुसार, राज्यभर में परीक्षण किए गए 1,320 लोगों में से 244 में डेंगू की पुष्टि हुई है, और रोज़ाना औसतन 200 नए मामले दर्ज हो रहे हैं। 15 सितंबर 2026 तक कुल 16,577 मामले सामने आ चुके हैं और 9 लोगों की मौत हो चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम

चेन्नई सबसे अधिक प्रभावित ज़िला बना हुआ है। एक ही दिन में बुखार से पीड़ित 156 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 87 में डेंगू की पुष्टि हुई। इसके अलावा चेंगलपट्टू, कोयंबटूर, तिरुवनमलाई, कृष्णागिरी, सलेम, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम, तंजावुर और विलुपुरम में भी मामलों की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।

सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने मच्छर नियंत्रण और रोग निगरानी अभियानों को युद्धस्तर पर तेज़ कर दिया है। तमिलनाडु भर में 25,000 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया गया है, जो संवेदनशील इलाकों में संक्रमण के स्रोत नष्ट करने, स्वच्छता अभियान चलाने और बुखार के मामलों की निगरानी करने में जुटे हैं। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निवारक उपाय मज़बूत करने और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री अरुण राज ने चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पिछले सात दिनों में मामलों में मामूली वृद्धि देखी गई है, लेकिन उन्होंने नागरिकों से घबराहट न करने का आग्रह किया। लोगों को सलाह दी गई है कि वे घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें और लगातार बुखार रहने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

नाम तमिलर काची के मुख्य समन्वयक सीमान ने इस वृद्धि के लिए टीवीके सरकार की कथित लापरवाही को ज़िम्मेदार ठहराया है। उन्होंने माँग की है कि जहाँ बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं, वहाँ युद्धस्तर पर नीलावेम्बु काढ़ा और कबासुरा कुडीनीर का वितरण किया जाए।

विश्वविद्यालय परिसर में चिंता

अन्ना विश्वविद्यालय के छात्र हरीश कुमार का गुरुवार को लगातार बुखार से पीड़ित रहने के बाद निधन हो गया। उनसे मात्र चार दिन पहले मृदुला और जयश्री की भी मृत्यु हो चुकी थी, जिससे परिसर में चिंता का माहौल गहरा गया। हालाँकि जन स्वास्थ्य निदेशालय ने स्पष्ट किया कि हरीश कुमार को डेंगू नहीं था — उनकी मृत्यु स्क्रब टाइफस से हुई थी।

क्या होगा आगे

इस प्रकोप के बीच एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया है। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, जापान की ताकेडा फार्मास्युटिकल के सहयोग से भारत में क्यूडेंगा नामक डेंगू वैक्सीन को अगले साल की पहली छमाही में लॉन्च करने की तैयारी में है। इसे भारत का पहला डेंगू टीका बताया जा रहा है। यह टीका 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए है और तीन महीने के अंतराल पर दो खुराक में दिया जाएगा, जो डेंगू वायरस के चारों प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। यह टीका दीर्घकालीन डेंगू नियंत्रण की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

577 मामलों का यह आँकड़ा चेतावनी देता है कि मानसूनी बीमारियों के प्रति हमारी तैयारी अभी भी प्रतिक्रियात्मक है, निवारक नहीं। 25,000 कर्मचारियों की तैनाती प्रभावशाली लगती है, लेकिन असली सवाल यह है कि शहरी जल-जमाव और स्वच्छता की संरचनागत खामियाँ — जो हर मानसून में यही परिदृश्य दोहराती हैं — क्यों बरकरार हैं। अन्ना विश्वविद्यालय में हुई मौतों से स्क्रब टाइफस का सामने आना यह भी बताता है कि डेंगू की आड़ में दूसरी वेक्टर-जनित बीमारियाँ नज़रअंदाज़ हो सकती हैं। 'क्यूडेंगा' टीके की संभावित उपलब्धता उम्मीद की किरण है, लेकिन वैक्सीन की पहुँच और सरकारी खरीद की नीति अभी तय नहीं है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में डेंगू की स्थिति अभी क्या है?
15 सितंबर 2026 तक तमिलनाडु में डेंगू के 16,577 मामले दर्ज हो चुके हैं और 9 लोगों की मौत हो चुकी है। रोज़ाना औसतन 200 नए मामले सामने आ रहे हैं और चेन्नई सबसे अधिक प्रभावित ज़िला है।
तमिलनाडु सरकार डेंगू रोकने के लिए क्या कर रही है?
राज्य सरकार ने 25,000 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया है जो मच्छर नियंत्रण, स्वच्छता अभियान और बुखार की निगरानी में लगे हैं। स्वास्थ्य मंत्री अरुण राज ने लोगों को घबराने से बचने और घरों में पानी जमा न होने देने की अपील की है।
अन्ना विश्वविद्यालय के छात्र हरीश कुमार की मौत डेंगू से हुई थी?
नहीं। जन स्वास्थ्य निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि हरीश कुमार की मौत डेंगू से नहीं, बल्कि स्क्रब टाइफस से हुई। हालाँकि उनसे चार दिन पहले मृदुला और जयश्री की मौत ने परिसर में चिंता का माहौल बना दिया है।
भारत में डेंगू वैक्सीन 'क्यूडेंगा' कब आएगी?
डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, जापान की ताकेडा फार्मास्युटिकल के साथ मिलकर 2027 की पहली छमाही में 'क्यूडेंगा' नामक डेंगू टीका भारत में लॉन्च करने की तैयारी में है। यह टीका 4 से 60 वर्ष के लोगों के लिए है और तीन महीने के अंतराल पर दो खुराक में दिया जाएगा।
डेंगू से बचाव के लिए आम लोग क्या करें?
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही मच्छरों का प्रजनन स्थल बनता है। लगातार बुखार रहने पर बिना देरी किए नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाँच कराएँ।
राष्ट्र प्रेस
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