पश्चिम बंगाल में डेंगू के 500 से अधिक नए मामले सात दिनों में, मुर्शिदाबाद में 96 केस
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में डेंगू का प्रकोप तेज़ी से बढ़ रहा है — स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात दिनों में राज्य में 500 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे इस वर्ष कुल संक्रमितों की संख्या 4,500 के पार पहुँच गई है। सबसे अधिक प्रभावित जिला मुर्शिदाबाद है, जहाँ से अकेले पिछले सात दिनों में 96 नए मामले सामने आए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, 2 सितंबर 2026 को राज्य सरकार ने डेंगू की निगरानी और रोकथाम के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया था। इसके तहत घर-घर जाकर निगरानी करने और डेंगू के लक्षण वाले लोगों की तत्काल रक्त जाँच कराने का व्यापक अभियान शुरू किया गया।
इस अभियान के परिणामस्वरूप ही अगले सात दिनों में 500 से अधिक नए मामले सामने आए। अधिकारियों का कहना है कि यह वृद्धि आंशिक रूप से बेहतर निगरानी और पारदर्शी रिपोर्टिंग का नतीजा है।
जिलेवार स्थिति
मुर्शिदाबाद इस वर्ष सबसे अधिक प्रभावित जिला बना हुआ है। कुल 4,500 संक्रमितों में से 870 मामले अकेले इसी जिले से हैं, जबकि पिछले सात दिनों के 500 नए मामलों में से 96 मुर्शिदाबाद से दर्ज हुए हैं।
दूसरे स्थान पर कोलकाता है, जहाँ इस वर्ष अब तक 402 लोग संक्रमित हो चुके हैं और पिछले सात दिनों में 62 नए मामले सामने आए हैं।
अप्रैल से अब तक का रुझान
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल तक राज्य में कुल 770 लोग डेंगू से संक्रमित थे। यह संख्या 31 जुलाई तक बढ़कर 1,946 और 31 अगस्त तक 3,966 हो गई। 7 सितंबर तक यह आँकड़ा 4,500 से अधिक हो चुका है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मॉनसून की भारी बारिश जारी है, जो एडीज़ मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ने इस वर्ष की शुरुआत में नागरिकों से अपील की थी कि वे डेंगू की स्थिति को लेकर घबराएँ नहीं। उन्होंने कहा था कि स्थिति गंभीर है, लेकिन बेहद चिंताजनक नहीं, और मौजूदा मॉनसून के दौरान दर्ज मामले पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कम हैं।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस वर्ष के आँकड़े पूरी तरह पारदर्शी हैं — संक्रमितों की संख्या कम बताने या मामलों को 'अज्ञात बुखार' के रूप में दर्ज करने जैसी कोई प्रवृत्ति नहीं है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि घर-घर निगरानी अभियान और SOP का सख्त पालन डेंगू के प्रसार को नियंत्रित करने में सहायक होगा। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे घरों में पानी जमा न होने दें और बुखार के लक्षण दिखने पर तत्काल रक्त जाँच कराएँ।
आने वाले हफ्तों में मॉनसून की स्थिति और निगरानी अभियान की प्रभावशीलता यह तय करेगी कि क्या यह वृद्धि नियंत्रण में आती है या नहीं।