बांग्लादेश में खसरे से 652 बच्चों की मौत, डेंगू के 135 नए मामले — दोहरे संकट से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश इस समय एक साथ दो गंभीर संक्रामक बीमारियों के दोहरे संकट से जूझ रहा है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आंकड़ों के अनुसार, 14 जून 2025 तक खसरे या उससे मिलते-जुलते लक्षणों के कारण 652 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि पिछले 24 घंटों में डेंगू के 135 नए मामले सामने आए हैं। यह स्थिति देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर अभूतपूर्व दबाव बना रही है।
डेंगू की स्थिति: क्षेत्रवार आंकड़े
अंग्रेजी दैनिक ढाका ट्रिब्यून ने DGHS के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि पिछले 24 घंटों में दर्ज 135 नए डेंगू मामलों में बरिशाल डिवीजन सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहाँ 37 मरीज पाए गए। इसके अलावा खुलना में 35, ढाका साउथ सिटी कॉर्पोरेशन में 15, ढाका डिवीजन में 14, चट्टोग्राम में 10, राजशाही में 11, मयमनसिंह में 8, सिलहट में 3 और ढाका नॉर्थ सिटी कॉर्पोरेशन में 2 मामले दर्ज हुए।
इस वर्ष अब तक डेंगू से 6 लोगों की मौत हो चुकी है और 4,201 लोग संक्रमित हुए हैं। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले वर्ष 413 मौतें और 1,02,861 संक्रमण दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में 575 मौतें और 1,01,214 संक्रमण सामने आए थे। आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अभी तक मृत्यु संख्या कम है, लेकिन मानसून के मौसम में तेज़ी आने की आशंका विशेषज्ञों को चिंतित कर रही है।
खसरे का प्रकोप: 652 मौतें, 85,951 संदिग्ध मामले
बांग्लादेशी समाचार एजेंसी यूएनबी के अनुसार, पिछले 24 घंटों (शनिवार से रविवार सुबह 8 बजे तक) में 4 और बच्चों की मौत दर्ज की गई, जिससे खसरे से जुड़ी कुल संदिग्ध और पुष्टि की गई मौतों की संख्या 652 तक पहुँच गई है। DGHS के आंकड़ों के अनुसार इनमें 560 संदिग्ध और 92 पुष्टि की गई मौतें शामिल हैं।
उसी 24 घंटे की अवधि में 1,052 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 85,951 हो गई। इसके साथ ही 75 नए पुष्टि मामलों के जुड़ने से कुल पुष्टि संख्या 10,323 तक पहुँच गई है। 15 मार्च से अब तक 70,579 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए हैं, जिनमें से 66,841 ठीक होकर घर लौट चुके हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रही है। एक साथ दो महामारियों — खसरा और डेंगू — के सक्रिय होने से अस्पतालों में बेड, दवाइयों और स्वास्थ्यकर्मियों पर दोहरा बोझ पड़ रहा है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में डेंगू का मौसम आमतौर पर जून से अक्टूबर तक रहता है, और मानसून की शुरुआत के साथ मामलों में और तेज़ी आने की आशंका बनी हुई है।
आगे क्या
स्वास्थ्य अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्कता बरतने और खसरे के टीकाकरण अभियान में भाग लेने की अपील की है। डेंगू के मामले में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने के लिए स्थानीय निकायों को सक्रिय किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों में प्रभावी हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।