पश्चिम बंगाल में डेंगू का प्रकोप: 11 सितंबर तक 5,002 संक्रमित, मुर्शिदाबाद सबसे अधिक प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में डेंगू का प्रकोप तेज़ी से बढ़ रहा है और 11 सितंबर 2026 तक राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 5,002 तक पहुँच गई है। राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा रविवार, 13 सितंबर को जारी ताज़ा बुलेटिन में यह आँकड़ा सामने आया है, जो इस मौसम में डेंगू संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है।
संक्रमण की रफ़्तार: अगस्त से सितंबर तक दोगुना उछाल
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगस्त 2026 में इसी तारीख तक राज्य में डेंगू प्रभावितों की कुल संख्या 2,500 से कम थी। यानी महज़ एक महीने में मामले लगभग दोगुने हो गए — यह वृद्धि दर स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बताई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के अंतिम चरण में जलजमाव और नमी के कारण मच्छरों के प्रजनन की स्थितियाँ अनुकूल रहती हैं।
सबसे अधिक प्रभावित जिले
विभाग द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, राज्य में सर्वाधिक 1,072 मामले मुर्शिदाबाद जिले से दर्ज किए गए हैं। इसके बाद कोलकाता में 500 और उत्तर 24 परगना में 450 मामले सामने आए हैं। गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से इन्हीं तीन जिलों में डेंगू का बोझ सबसे अधिक रहा है, जो दर्शाता है कि यहाँ वेक्टर नियंत्रण और स्वच्छता अभियान में दीर्घकालिक चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
एसओपी और निगरानी अभियान
2 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में डेंगू की निगरानी और रोकथाम के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की थी। इस एसओपी में मुख्य ज़ोर घर-घर जाकर निगरानी और डेंगू के लक्षणों वाले व्यक्तियों की तत्काल रक्त जाँच पर था। अधिकारी का कहना है कि नए मामलों में अचानक वृद्धि यह भी दर्शाती है कि एसओपी दिशानिर्देशों का परिश्रमपूर्वक पालन हुआ है — अर्थात अधिक सक्रिय निगरानी के कारण पहले की तुलना में अधिक मामले सामने आ रहे हैं।
अधिकारी ने यह भी कहा कि इस वर्ष डेंगू को अज्ञात बुखार के रूप में दर्ज कर मामलों की संख्या कम बताने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगा है, जो पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर देखी गई थी।
जिला स्तर पर व्यापक जाँच अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 15 अक्टूबर 2026 तक डेंगू के लक्षण वाले लोगों की जाँच के लिए व्यापक अभियान चलाएँ। जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि प्रतिदिन कितने लोग बुखार से पीड़ित पाए गए और कितने लोगों का डेंगू परीक्षण हुआ — इसकी नियमित रिपोर्ट विभाग को भेजी जाए।
आगे क्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अक्टूबर तक मानसून की वापसी के साथ मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप और बढ़ सकता है। राज्य सरकार की नज़र अब 15 अक्टूबर की समयसीमा पर है, जिसके बाद जाँच अभियान के परिणामों की समीक्षा की जाएगी। यदि मामले इसी गति से बढ़ते रहे, तो विशेषज्ञ अतिरिक्त स्वास्थ्य संसाधनों की तैनाती की ज़रूरत से इनकार नहीं करते।