मेघालय में छात्रों को ₹400 करोड़ की छात्रवृत्ति, एसएचजी सहायता 28 गुना बढ़कर ₹1,400 करोड़: सीएम संगमा
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 5 नवंबर 2026 को पश्चिम जयंतिया हिल्स के दौरे के दौरान घोषणा की कि राज्य सरकार ने विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के ज़रिए छात्रों को लगभग ₹400 करोड़ सीधे ट्रांसफर किए हैं। साथ ही, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को दी जाने वाली वित्तीय सहायता ₹50 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹1,400 करोड़ हो गई है — यानी करीब 28 गुना की वृद्धि।
तीन-स्तंभ विकास मॉडल
मुख्यमंत्री संगमा ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए सरकार के तीन-स्तंभ विकास मॉडल की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें बुनियादी ढाँचे का निर्माण, नागरिकों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता और राज्य की सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण — ये तीन प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि विकास केवल भौतिक अवसंरचना तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे लोगों के जीवन स्तर में सीधा सुधार होना चाहिए।
किसान और आजीविका सहायता
आजीविका सुधार पर जोर देते हुए संगमा ने बताया कि किसानों को फोकस प्लस और सीएम एश्योर सहित विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से लगभग ₹300 करोड़ प्रदान किए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर-पूर्व के राज्यों में ग्रामीण आजीविका को केंद्रीय योजनाओं और राज्य निधियों के बेहतर समन्वय की ज़रूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
बुनियादी ढाँचे में निवेश
अपने एक दिवसीय दौरे में मुख्यमंत्री ने कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उमुलोंग में एकीकृत अस्पताल की आधारशिला रखी गई, थाडलस्केन सीएंडआरडी ब्लॉक में ब्लॉक एकीकृत विकास परिसर और खलीहतिरची में एक शूटिंग रेंज का उद्घाटन किया गया। इसके अलावा 38.163 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाओं, जोवाई स्थित सरकारी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में एक अतिरिक्त भवन, दो उप-स्वास्थ्य केंद्र और पुनर्निर्मित कियांग नांगबाह स्टेडियम का भी लोकार्पण किया गया।
संगमा ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में खेल क्षेत्र में किए गए कुल सरकारी व्यय का लगभग 70 प्रतिशत भौतिक संपत्तियों के विकास पर खर्च हुआ है। एक एक्वाटिक कॉम्प्लेक्स, सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक और कृत्रिम फुटबॉल मैदान की आधारशिला भी इस दौरे के दौरान रखी गई।
सांस्कृतिक पहचान और समुदाय की भागीदारी
मुख्यमंत्री ने धर्म या भौगोलिक क्षेत्र की परवाह किए बिना मेघालय की विविध सांस्कृतिक परंपराओं और स्थानीय पहचानों की रक्षा के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक प्रमुखों और समुदाय के प्रतिनिधियों को शासन व विकास प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है।
अन्य उपस्थिति और वितरण
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री स्नियावभलांग धर और खेल एवं युवा मामलों की मंत्री वाइलाडमिकी शिला भी उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने स्थानीय उपलब्धि हासिल करने वालों को सम्मानित किया और 181 प्रशिक्षुओं को मातृ एवं शिशु देखभाल किट तथा स्टार्टअप टूलकिट वितरित किए। गौरतलब है कि यह दौरा राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत जनता तक सीधे पहुँचकर योजनाओं का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है।