14 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मेघालय में DMF ने 10 साल में ₹181 करोड़ जुटाए, CM कॉनराड संगमा ने टिकाऊ खनन का आह्वान किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मेघालय में DMF ने 10 साल में ₹181 करोड़ जुटाए, CM कॉनराड संगमा ने टिकाऊ खनन का आह्वान किया

सारांश

मेघालय में DMF के 10 साल पूरे हुए — ₹181 करोड़ जुटाए, 923 परियोजनाएँ मंजूर। CM कॉनराड संगमा ने रैट-होल माइनिंग की विरासत से आगे बढ़कर वैज्ञानिक और टिकाऊ खनन की ओर बढ़ने का आह्वान किया। असली सवाल यह है कि शेष 381 परियोजनाएँ कब पूरी होंगी।

मुख्य बातें

मेघालय के CM कॉनराड संगमा ने 14 अक्टूबर 2026 को शिलांग में DMF की दशाब्दी पर वैज्ञानिक खनन का आह्वान किया।
जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) ने 10 वर्षों में ₹181 करोड़ जुटाए और 923 परियोजनाएँ स्वीकृत कीं।
इनमें से 542 परियोजनाएँ पूर्ण; शेष 381 अभी प्रगति पर।
पूर्ण परियोजनाओं में स्कूली कक्षाएँ, स्वास्थ्य सुविधाएँ, पेयजल नेटवर्क और पैदल पुल शामिल।
संगमा ने पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उद्यमों में निवेश को दीर्घकालिक विकल्प बताया।
ज़िला प्रशासनों को DMF निधि के प्रभावी उपयोग और समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 14 अक्टूबर 2026 को शिलांग में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) के संचालन के एक दशक पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में वैज्ञानिक और टिकाऊ खनन की ओर त्वरित बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य की खनिज संपदा का लाभ समुदायों तक दीर्घकालिक रूप से पहुँचना चाहिए, न कि केवल अल्पकालिक राजस्व के रूप में।

DMF का दशक: आँकड़ों में उपलब्धि

मुख्यमंत्री संगमा ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में DMF ने मेघालय में ₹181 करोड़ की निधि जुटाई है और 923 परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इनमें से 542 परियोजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं। पूर्ण परियोजनाओं में स्कूली कक्षाओं का निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, पेयजल आपूर्ति नेटवर्क और मानसून-प्रतिरोधी पैदल पुल शामिल हैं।

गौरतलब है कि DMF की स्थापना 2015 में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम के तहत की गई थी, जिसका उद्देश्य खनन-प्रभावित समुदायों के लिए प्रत्यक्ष विकास कोष सुनिश्चित करना था। मेघालय में पारंपरिक सामुदायिक भूमि स्वामित्व प्रणाली को देखते हुए यह फाउंडेशन विशेष महत्व रखती है।

खनन की भूमिका और बदलाव की ज़रूरत

मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि खनन क्षेत्र मेघालय की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है — राजस्व सृजन और हज़ारों लोगों की आजीविका दोनों के लिहाज़ से। साथ ही उन्होंने ज़ोर दिया कि खनन पद्धतियाँ अब सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों की ओर विकसित होनी चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब मेघालय में 'रैट-होल माइनिंग' पर सर्वोच्च न्यायालय का प्रतिबंध वर्षों से लागू है, और राज्य सरकार वैज्ञानिक खनन की नीतिगत दिशा तय करने की कोशिश कर रही है। संगमा का यह बयान उस नीतिगत बदलाव की ओर संकेत करता है।

पर्यावरण बहाली पर फोकस

DMF-वित्त पोषित परियोजनाओं में केवल बुनियादी ढाँचा ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण संरचनाओं और खनन-प्रभावित क्षेत्रों में वृक्षारोपण के ज़रिये पर्यावरण बहाली पर भी ध्यान दिया गया है। संगमा ने कहा कि अब फोकस बुनियादी ढाँचे के निर्माण से आगे बढ़कर ऐसी संपत्तियाँ तैयार करने पर होना चाहिए जो स्थायी आय उत्पन्न करें।

पर्यटन और उद्यमिता पर नज़र

मुख्यमंत्री ने पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उद्यमों में निवेश को मेघालय की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, खनिज संसाधनों के लाभ को विविधीकृत क्षेत्रों में लगाकर स्थानीय समुदायों को दीर्घकालिक लाभ दिलाया जा सकता है।

ज़िला प्रशासन को निर्देश

संगमा ने ज़िला प्रशासनों को निर्देश दिया कि उपलब्ध DMF निधि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करें और चल रही परियोजनाओं को अनावश्यक विलंब के बिना पूरा किया जाए। उन्होंने ज़िला अधिकारियों और स्थानीय समुदायों के बीच घनिष्ठ समन्वय की भी अपील की, ताकि विकास पहलों का अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित हो सके।

आने वाले महीनों में DMF की शेष 381 परियोजनाओं के पूरा होने और नई परियोजनाओं की स्वीकृति की प्रक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली तस्वीर यह है कि लगभग 41% परियोजनाएँ अभी अधूरी हैं — और मेघालय में रैट-होल माइनिंग पर सर्वोच्च न्यायालय के प्रतिबंध के बावजूद वैज्ञानिक खनन की ओर बदलाव की गति सवालों के घेरे में रही है। संगमा का 'टिकाऊ खनन' का आह्वान नया नहीं है; मुद्दा यह है कि पारंपरिक भूमि स्वामित्व प्रणाली और औद्योगिक खनन के बीच तालमेल बिठाने का कोई ठोस विधायी ढाँचा अभी तक नहीं बना है। जब तक DMF की शेष परियोजनाओं के लिए समयसीमा और जवाबदेही तय नहीं होती, यह भाषण भी उन सरकारी घोषणाओं की कतार में खड़ा रहेगा जो नीयत तो दिखाती हैं, पर नतीजे नहीं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय का जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) क्या है?
जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) 2015 में खान और खनिज संशोधन अधिनियम के तहत स्थापित एक कोष है, जो खनन कंपनियों के योगदान से बनता है और खनन-प्रभावित समुदायों के विकास पर खर्च होता है। मेघालय में इसने 10 वर्षों में ₹181 करोड़ जुटाए हैं।
मेघालय DMF ने अब तक कितनी परियोजनाएँ पूरी की हैं?
DMF ने मेघालय में कुल 923 परियोजनाएँ स्वीकृत की हैं, जिनमें से 542 पूरी हो चुकी हैं। शेष 381 परियोजनाएँ अभी प्रगति पर हैं। पूर्ण परियोजनाओं में स्कूली कक्षाएँ, स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल नेटवर्क और पैदल पुल शामिल हैं।
CM कॉनराड संगमा ने टिकाऊ खनन पर ज़ोर क्यों दिया?
मेघालय में 'रैट-होल माइनिंग' पर सर्वोच्च न्यायालय का प्रतिबंध लंबे समय से लागू है, और राज्य सरकार वैज्ञानिक विकल्पों की तलाश में है। संगमा ने कहा कि खनन पद्धतियाँ स्थानीय परिस्थितियों और सामुदायिक भूमि स्वामित्व को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण-अनुकूल होनी चाहिए।
DMF निधि का उपयोग किन क्षेत्रों में हुआ है?
DMF निधि का उपयोग मुख्यतः शिक्षा (कक्षा निर्माण), स्वास्थ्य सुविधाओं, पेयजल आपूर्ति, पैदल पुलों और पर्यावरण बहाली (जल संरक्षण व वृक्षारोपण) में हुआ है। भविष्य में पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उद्यमों में निवेश पर ज़ोर देने की योजना है।
मेघालय में खनन क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए कितना महत्वपूर्ण है?
मुख्यमंत्री संगमा के अनुसार खनन मेघालय की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है — यह राजस्व सृजन का प्रमुख स्रोत है और हज़ारों लोगों को आजीविका प्रदान करता है। हालाँकि, दीर्घकालिक टिकाऊपन के लिए इसे विविधीकृत आर्थिक क्षेत्रों से जोड़ने की ज़रूरत पर बल दिया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले