मेघालय CM कॉनराड संगमा ने ₹5.90 करोड़ की पाइन होम परियोजना का उद्घाटन किया, 2028 तक 3,000 होमस्टे का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने सोमवार, 17 अगस्त को दक्षिण-पश्चिम खासी हिल्स जिले के मावलंगविर गाँव में पाइन होम इको-सस्टेनेबल प्रोजेक्ट का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने इस परियोजना को मेघालय में टिकाऊ और समुदाय-आधारित विकास का आदर्श मॉडल बताया।
परियोजना में क्या-क्या शामिल है
करीब ₹5.90 करोड़ की लागत से सैत्सनात मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से विकसित इस परियोजना में रेस्तरां, सामुदायिक भवन, सम्मेलन एवं प्रशिक्षण सुविधाएँ, अतिथि कक्ष और एक पर्यटन सूचना केंद्र शामिल हैं। परियोजना में प्राकृतिक हीटिंग सिस्टम, पुनर्चक्रित सामग्री और वर्षा जल संरक्षण जैसी पर्यावरण-अनुकूल विशेषताएँ भी अपनाई गई हैं।
संगमा ने बताया कि निर्माण में स्थानीय कारीगरों और श्रमिकों की केंद्रीय भूमिका रही और अधिकांश सामग्री स्थानीय स्तर पर ही जुटाई गई। उनके अनुसार इससे पारंपरिक कौशल संरक्षित होगा और आर्थिक लाभ समुदाय के भीतर ही बना रहेगा।
सरकार की मंशा और विकास की सोच
मुख्यमंत्री ने कहा, 'हमारा उद्देश्य प्राकृतिक वातावरण को संरक्षित रखते हुए आधुनिक नवाचार को बढ़ावा देना है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार दक्षिण-पश्चिम खासी हिल्स को ऐसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है जहाँ पर्यटक अधिक समय ठहरें और स्थानीय अर्थव्यवस्था में सार्थक योगदान दें।
यह ऐसे समय में आया है जब मेघालय सरकार शिलांग-केंद्रित विकास से आगे बढ़कर राज्य के दूरदराज़ क्षेत्रों तक पर्यटन और रोज़गार के अवसर पहुँचाने की कोशिश कर रही है। संगमा ने कहा, 'गारो हिल्स, खासी हिल्स और जयंतिया हिल्स साथ-साथ आगे बढ़ें, यही हमारा लक्ष्य है।'
सीएम होमस्टे मिशन और 2028 का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने सीएम होमस्टे मिशन का भी उल्लेख किया, जिसके तहत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक मेघालय में 3,000 होमस्टे स्थापित करना है। उनके अनुसार यह पहल ग्रामीण युवाओं के लिए रोज़गार और अतिरिक्त आय के नए रास्ते खोलेगी।
इसी क्रम में संगमा ने मावसिनराम स्थित त्वाहलोंगवार ओपन-एयर म्यूजियम का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। उन्होंने पाइन होम को एक 'जीवंत प्रयोगशाला' और त्वाहलोंगवार को एक 'जीवंत कक्षा' की संज्ञा दी, यह कहते हुए कि इनके अनुभवों का उपयोग भविष्य में जलवायु-अनुकूल स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, इको-लॉज और होमस्टे के निर्माण में किया जाएगा।
शोध और सांस्कृतिक संरक्षण की पहल
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री अनुसंधान अनुदान योजना का भी ज़िक्र किया, जिसके पहले वर्ष में 48 शोधार्थियों को सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा 'ट्रेसिंग द रूट्स' पहल के तहत 75 शोधार्थी खासी, जयंतिया और गारो समुदायों की उत्पत्ति और ऐतिहासिक यात्रा का अध्ययन करने के लिए वियतनाम, कंबोडिया और तिब्बत का दौरा करेंगे।
संगमा ने इस पहल का महत्व बताते हुए कहा, 'जो समाज अपने अतीत और अपनी जड़ों को जानता है, वह भविष्य की ओर अधिक आत्मविश्वास के साथ बढ़ता है।' गौरतलब है कि यह पहल राज्य की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो पर्यटन को सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक सशक्तिकरण से जोड़ती है।
पाइन होम जैसी परियोजनाएँ यदि अपेक्षित परिणाम देती हैं, तो मेघालय के अन्य दूरदराज़ जिलों में भी इसी मॉडल को दोहराने की योजना है।