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लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2026: खड़गे, अखिलेश, शरद पवार समेत विपक्षी नेताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि

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लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2026: खड़गे, अखिलेश, शरद पवार समेत विपक्षी नेताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि

सारांश

लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर विपक्ष एकजुट दिखा — कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने भूमि सुधार से 1965 युद्ध तक की विरासत गिनाई, जबकि शरद पवार, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले और भगवंत मान ने 'जय जवान-जय किसान' के प्रणेता को नमन किया।

मुख्य बातें

2 अक्टूबर 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री और 'भारत रत्न' लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर विपक्षी नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर भूमि सुधार, हरित क्रांति, दुग्ध क्रांति और 1965 के युद्ध में शास्त्री के नेतृत्व को याद किया।
NCP-SP प्रमुख शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने एक्स पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी शास्त्री को नमन किया।
शास्त्री 1964–1966 तक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री रहे और उन्हें मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026 — पूर्व प्रधानमंत्री और 'भारत रत्न' लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर शुक्रवार को विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) (NCP-SP) के प्रमुख शरद पवार और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता व पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्र-निर्माण में शास्त्री के अमिट योगदान को याद किया।

खड़गे का संदेश: सादगी और राष्ट्रसेवा की मिसाल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'सादगी, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के प्रतीक, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जीवन भारत के लिए समर्पण की अद्भुत मिसाल है।' खड़गे ने शास्त्री की उपलब्धियों को विस्तार से गिनाते हुए लिखा कि भूमि सुधारों से लेकर हरित और दुग्ध क्रांति की नींव मजबूत करने तक, रेलवे में तीसरी श्रेणी समाप्त करने से लेकर बसों में महिलाओं के लिए सीटों की व्यवस्था तक और 1965 के युद्ध में देश को दृढ़ नेतृत्व देने तक, राष्ट्र-निर्माण में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने यह भी कहा कि गांधीवादी मूल्यों और उच्च विचारों से परिपूर्ण शास्त्री का सरल जीवन आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

अखिलेश यादव और शरद पवार का नमन

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री और 'भारत रत्न' शास्त्री को जयंती पर शत-शत नमन किया। NCP-SP के प्रमुख शरद पवार ने एक्स पर अपनी श्रद्धांजलि में लिखा, 'सादगी, कर्तव्य-निष्ठा और राष्ट्र-सेवा को अपने सार्वजनिक जीवन का आधार बनाने वाले और संकट के समय साहसी निर्णय लेकर देश के नेतृत्व को एक नई दिशा देने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।'

सुप्रिया सुले का 'जय जवान-जय किसान' वाला संदेश

NCP-SP सांसद सुप्रिया सुले ने अपने एक्स पोस्ट में शास्त्री को 'जय जवान-जय किसान' नारे के प्रणेता के रूप में याद किया। सुले ने कहा कि उन्हें एक आम आदमी के कर्तव्य-बोध और असीम देशभक्ति की मिसाल के तौर पर सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। उन्होंने जयंती के अवसर पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

भगवंत मान का शास्त्री को सलाम

पंजाब के मुख्यमंत्री और AAP नेता भगवंत मान ने भी लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। गौरतलब है कि शास्त्री की जयंती और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती एक ही दिन — 2 अक्टूबर — को पड़ती है, जिसे देश 'गांधी जयंती' के रूप में भी मनाता है। इस अवसर पर हर वर्ष राजनीतिक दलों के नेता दोनों महापुरुषों को नमन करते हैं।

शास्त्री की विरासत: क्यों याद किए जाते हैं आज भी

लाल बहादुर शास्त्री 1964 से 1966 तक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री रहे। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनका दृढ़ नेतृत्व और 'जय जवान-जय किसान' का नारा आज भी प्रासंगिक माना जाता है। उनके संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल में हरित क्रांति और श्वेत क्रांति की नींव रखी गई। उन्हें मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था। उनकी विरासत आज भी नेताओं और आम नागरिकों दोनों को प्रेरणा देती है, और आने वाले समय में भी उनके मूल्य राष्ट्र-निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन करते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक नीति-आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि शास्त्री का 'जय जवान-जय किसान' नारा आज भी कृषि और रक्षा नीति की बहसों में उद्धृत होता है, जो उनकी सोच की दीर्घकालिक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाल बहादुर शास्त्री की जयंती कब मनाई जाती है?
लाल बहादुर शास्त्री की जयंती प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को मनाई जाती है। यह दिन महात्मा गांधी की जयंती के साथ भी मेल खाता है, इसलिए इस तिथि का राष्ट्रीय महत्व और भी बढ़ जाता है।
लाल बहादुर शास्त्री को 'भारत रत्न' कब मिला?
लाल बहादुर शास्त्री को मरणोपरांत 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था। वे 1964 से 1966 तक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री रहे।
'जय जवान-जय किसान' नारा किसने दिया था?
यह प्रसिद्ध नारा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय उन्होंने सैनिकों और किसानों दोनों के योगदान को रेखांकित करने के लिए यह नारा प्रस्तुत किया था।
2026 की शास्त्री जयंती पर किन-किन विपक्षी नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
2 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, NCP-SP प्रमुख शरद पवार, NCP-SP सांसद सुप्रिया सुले और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्र-निर्माण में लाल बहादुर शास्त्री का क्या योगदान रहा?
शास्त्री के कार्यकाल में भूमि सुधार, हरित क्रांति और दुग्ध क्रांति की नींव रखी गई। उन्होंने रेलवे में तीसरी श्रेणी समाप्त करने और बसों में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित करने जैसे सामाजिक सुधार भी किए, तथा 1965 के युद्ध में देश को दृढ़ नेतृत्व प्रदान किया।
राष्ट्र प्रेस
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